{"_id":"6a5a76969b5c79f65e0139c7","slug":"deliveries-of-high-risk-pregnant-women-will-not-take-place-in-small-hospitals-instructions-issued-to-refer-them-to-larger-centers-palwal-news-c-24-1-pal1009-126087-2026-07-18","type":"story","status":"publish","title_hn":"Palwal News: छोटे अस्पतालों में नहीं होगा हाई रिस्क गर्भवतियों का प्रसव, बड़े केंद्रों में रेफर करने के निर्देश","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Palwal News: छोटे अस्पतालों में नहीं होगा हाई रिस्क गर्भवतियों का प्रसव, बड़े केंद्रों में रेफर करने के निर्देश
विज्ञापन
हाई रिस्क गर्भवती महिलाओं की सुरक्षित डिलीवरी के लिए जागरूक करने को लेकर चलाया जा रहा विशेष अभियान
मोहम्मद अम्मार
पलवल। जिले में उच्च जोखिम (हाई रिस्क) वाली गर्भवती महिलाओं और नवजात शिशुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने 7 से 22 जुलाई तक विशेष जागरूकता अभियान शुरू किया है। अभियान के तहत जिले की सभी हाई रिस्क गर्भवती महिलाओं की पहचान कर उन्हें लगातार ट्रैक किया जा रहा है। जिला स्तर पर चिकित्सकों द्वारा काउंसलिंग की जा रही है, जबकि आशा कार्यकर्ता घर-घर जाकर महिलाओं का फॉलोअप कर रही हैं।
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने बताया कि अभियान का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी उच्च जोखिम वाली गर्भवती महिला की डिलीवरी छोटे अस्पताल या ऐसे केंद्र पर न हो, जहां विशेषज्ञ चिकित्सक और आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध न हों। महिलाओं को जिला नागरिक अस्पताल पलवल या ऐसे संस्थानों में प्रसव कराने के लिए प्रेरित किया जा रहा है, जहां स्त्री रोग विशेषज्ञ (गायनोलॉजिस्ट), एनेस्थेटिस्ट, शिशु रोग विशेषज्ञ (पीडियाट्रिशियन), आईसीयू और अन्य जरूरी सुविधाएं मौजूद हों।
प्रत्येक माह 2400 महिलाओं की होती है डिलीवरी
अधिकारियों के अनुसार, जिले में प्रत्येक माह औसतन 2400 गर्भवती महिलाओं की डिलीवरी होती है। इनमें हाई रिस्क श्रेणी की महिलाओं की विशेष निगरानी केवल गायनोलॉजिस्ट की देखरेख में की जा रही है। जिला स्तर पर भी इन मामलों की नियमित समीक्षा की जा रही है ताकि समय रहते किसी भी जटिलता का पता लगाकर उचित उपचार उपलब्ध कराया जा सके।
विज्ञापन
लगातार निगरानी और काउंसलिंग के चलते मातृ मृत्यु दर में आई कमी
स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि इस रणनीति का सकारात्मक परिणाम भी सामने आया है। पहले जिले में हर वर्ष लगभग 40 से 50 मातृ मृत्यु के मामले सामने आते थे, जबकि अब यह संख्या घटकर करीब 25 से 30 रह गई है। विभाग का लक्ष्य मातृ मृत्यु दर में और कमी लाना तथा सुरक्षित मातृत्व को बढ़ावा देना है।
अभियान के तहत नेशनल इंटीग्रेटेड मेडिकल एसोसिएशन (नीमा) तथा बीएमएस से जुड़े चिकित्सकों को भी निर्देश दिए गए हैं कि वे किसी भी उच्च जोखिम वाली गर्भवती महिला का प्रसव तभी कराएं, जब उनके संस्थान में स्त्री रोग विशेषज्ञ, एनेस्थेटिस्ट और शिशु रोग विशेषज्ञ सहित सभी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध हों अन्यथा ऐसे मामलों को तुरंत उच्च स्वास्थ्य संस्थान के लिए रेफर किया जाए। अधिकारियों ने गर्भवती महिलाओं और उनके परिजनों से अपील की है कि वे किसी भी जोखिम की स्थिति में नजदीकी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, उपमंडल अस्पताल या जिला नागरिक अस्पताल से संपर्क करें और विशेषज्ञों की निगरानी में ही प्रसव कराएं।
चिकित्सक या संस्थान इन निर्देशों की अनदेखी कर उच्च जोखिम वाली गर्भवती महिला की डिलीवरी बिना आवश्यक विशेषज्ञों और संसाधनों के कराता है, तो उसके विरुद्ध प्रशासनिक कार्रवाई की जाएगी। -डॉ. संजय शर्मा, डिप्टी सिविल सर्जन, जिला नागरिक अस्पताल पलवल
विज्ञापन
मोहम्मद अम्मार
पलवल। जिले में उच्च जोखिम (हाई रिस्क) वाली गर्भवती महिलाओं और नवजात शिशुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने 7 से 22 जुलाई तक विशेष जागरूकता अभियान शुरू किया है। अभियान के तहत जिले की सभी हाई रिस्क गर्भवती महिलाओं की पहचान कर उन्हें लगातार ट्रैक किया जा रहा है। जिला स्तर पर चिकित्सकों द्वारा काउंसलिंग की जा रही है, जबकि आशा कार्यकर्ता घर-घर जाकर महिलाओं का फॉलोअप कर रही हैं।
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने बताया कि अभियान का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी उच्च जोखिम वाली गर्भवती महिला की डिलीवरी छोटे अस्पताल या ऐसे केंद्र पर न हो, जहां विशेषज्ञ चिकित्सक और आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध न हों। महिलाओं को जिला नागरिक अस्पताल पलवल या ऐसे संस्थानों में प्रसव कराने के लिए प्रेरित किया जा रहा है, जहां स्त्री रोग विशेषज्ञ (गायनोलॉजिस्ट), एनेस्थेटिस्ट, शिशु रोग विशेषज्ञ (पीडियाट्रिशियन), आईसीयू और अन्य जरूरी सुविधाएं मौजूद हों।
विज्ञापन
प्रत्येक माह 2400 महिलाओं की होती है डिलीवरी
अधिकारियों के अनुसार, जिले में प्रत्येक माह औसतन 2400 गर्भवती महिलाओं की डिलीवरी होती है। इनमें हाई रिस्क श्रेणी की महिलाओं की विशेष निगरानी केवल गायनोलॉजिस्ट की देखरेख में की जा रही है। जिला स्तर पर भी इन मामलों की नियमित समीक्षा की जा रही है ताकि समय रहते किसी भी जटिलता का पता लगाकर उचित उपचार उपलब्ध कराया जा सके।
विज्ञापन
लगातार निगरानी और काउंसलिंग के चलते मातृ मृत्यु दर में आई कमी
स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि इस रणनीति का सकारात्मक परिणाम भी सामने आया है। पहले जिले में हर वर्ष लगभग 40 से 50 मातृ मृत्यु के मामले सामने आते थे, जबकि अब यह संख्या घटकर करीब 25 से 30 रह गई है। विभाग का लक्ष्य मातृ मृत्यु दर में और कमी लाना तथा सुरक्षित मातृत्व को बढ़ावा देना है।
अभियान के तहत नेशनल इंटीग्रेटेड मेडिकल एसोसिएशन (नीमा) तथा बीएमएस से जुड़े चिकित्सकों को भी निर्देश दिए गए हैं कि वे किसी भी उच्च जोखिम वाली गर्भवती महिला का प्रसव तभी कराएं, जब उनके संस्थान में स्त्री रोग विशेषज्ञ, एनेस्थेटिस्ट और शिशु रोग विशेषज्ञ सहित सभी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध हों अन्यथा ऐसे मामलों को तुरंत उच्च स्वास्थ्य संस्थान के लिए रेफर किया जाए। अधिकारियों ने गर्भवती महिलाओं और उनके परिजनों से अपील की है कि वे किसी भी जोखिम की स्थिति में नजदीकी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, उपमंडल अस्पताल या जिला नागरिक अस्पताल से संपर्क करें और विशेषज्ञों की निगरानी में ही प्रसव कराएं।
चिकित्सक या संस्थान इन निर्देशों की अनदेखी कर उच्च जोखिम वाली गर्भवती महिला की डिलीवरी बिना आवश्यक विशेषज्ञों और संसाधनों के कराता है, तो उसके विरुद्ध प्रशासनिक कार्रवाई की जाएगी। -डॉ. संजय शर्मा, डिप्टी सिविल सर्जन, जिला नागरिक अस्पताल पलवल