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Palwal News: प्रशासन की लापरवाही से खेत में बने मौत के गड्ढे ने ली बच्चियों की जान

Wed, 06 Aug 2025 11:17 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, पलवल
संवाद न्यूज एजेंसी, पलवल Updated Wed, 06 Aug 2025 11:17 PM IST
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Death pit created in the field due to negligence of administration
लोगों ने कहा गड्ढे के आसपास चेतावनी बोर्ड या रेलिंग होती तो हादसा टाला जा सकता था
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बरसात की वजह से गड्ढों में भरा है पानी


रोशनलाल शर्मा
होडल : गांव सराय में एक ही परिवार की तीन बच्चियों की मौत ने प्रशासन की लापरवाही भी सामने ला दी है। खनन पर पाबंदी के बाद भी खेतों में जानलेवा गड्ढे खोदकर छोड़ दिए गए हैं। बरसात के दिनों में उन गड्ढों में पानी भर गया है। वहां तक बच्चे न पहुंचे इसके लिए कोई इंतजाम नहीं किया गया है। होडल।
क्षेत्र के गांव सराय में दो सगी बहनों एक चचेरी बहन की ईंट भट्ठा के लिए मिट्टी उठाने के लिए खोदे गए गड्ढे में डूबने से हुई मौत से जहां गांव में मातम पसरा हुआ है। वहीं, खनन विभाग कि बगैर अनुमति से खेतों से उठाई जाने वाली मिट्टी के मामले में जिला खनन विभाग पर सवालिया निशान खड़े हो रहे हैं। दरसल, जिले में अवैध खनन पर रोक लगाने के लिए जिला उपायुक्त डॉ. हरीश कुमार वशिष्ठ समय-समय पर खनन विभाग के अधिकारियों के साथ बैठक करते हैं। आरोप है कि खनन विभाग के अधिकारियों की मिलीभगत से इस पर लगाम नहीं लग पा रहा है। गांव सराय में बुधवार को हुआ हादसा भी प्रशासन की लापरवाही की वजह से हुआ है। गड्ढे के आसपास बैरिकेडिंग भी नहीं की गई थी।
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गांव वालों का कहना है कि इस तरह के गड्ढों को लेकर कोई जागरूकता नहीं फैलाई गई, न ही इन्हें भरने या सुरक्षित करने की कोई कोशिश की गई। अगर गड्ढे के आसपास चेतावनी बोर्ड या रेलिंग होती तो शायद यह हादसा टाला जा सकता था। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि इस तरह के खतरनाक गड्ढों को तुरंत भरा जाए और दोषी भट्ठा संचालकों के खिलाफ कार्रवाई की जाए।
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मौसी के बीमार होने पर बकरियों को चराने गई थीं बच्ची

घटनास्थल पर मौजूद लोगों ने बताया कि गांव में मेहनत मजदूरी करने वाले जमशेद की पत्नी कहिफ़ा की सेहत कई दिन से खराब चल रही थी। अपनी मौसी की तबीयत खराब होने से 7 वर्षीय अंशिफा अपनी सगी बहन सोफिया व चचेरी बहन अल्फिया को लेकर बकरियों को चराने गई थींं। खेल खेल में वे गड्ढे में नहाने चली गईं। मृतक अंशिका व सोफिया की मां हमसिहना ने रोते हुए कहा कि दोनों बेटियों में जल्दी घर आकर खाना खाने की बात कही, लेकिन ऊपर वाले को कुछ और ही मंजूर था। गांव निवासी समसुद्दीन, रहीश, अकरम ने पीड़ित परिवार को आर्थिक सहायता देने की मांग की है।



गांव में पसरा मातम
हादसे में जान गंवाने वाली अंशिफा गांव सराय के सरकारी स्कूल में तीसरी कक्षा में अल्फ़िया दूसरी कक्षा में और सोफिया पहली में पढ़ती थी। अंशिफा और सोफिया की मां हमसीहना व अल्फ़िया की मां कहिफ़ा सगी बहने हैं। एक साथ दोनों बहनों की गोद उजाड़ने के बाद बार-बार रोते हुए बेहोशी में आ रही थीं। हादसे की खबर सुनते ही चीख पुकार मच गई। बच्चियों की मां बार-बार बेहोश हो रही थीं। गांव की महिलाएं पानी के छींटें मार रही थीं। अंशिका व सोफिया की मां हमसीहना ने रोते हुए कहा कि वह 40 दिनों के लिए जमात में गए उसके पिता शाहिद को बेटियों के बारे में क्या जवाब देगी। अब उसकी बेटी इस दुनिया में नहीं हैं।
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