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Palwal News: जर्जर कमरों में कैद डबचिक की पुरानी पहचान
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डबचिक की बदहाल तस्वीर,
भवन के कमरे हुए जर्जर, छत से दिखाई दे रहा सरिया, सैलानियों को परेशानी
1975 में हुई थी स्थापना
असलम खान
होडल। शहर की पहचान और दिल्ली-आगरा राष्ट्रीय राजमार्ग-19 से गुजरने वाले पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र रहा हरियाणा पर्यटन का डबचिक पर्यटन स्थल इन दिनों बदहाली की मार झेल रहा है। करीब 22 एकड़ में फैला पर्यटन स्थल उपेक्षा के कारण जर्जर हालत में है। दूर-दराज से आने वाले पर्यटक यहां ठहरने के लिए पहुंचते हैं, लेकिन सुविधाओं के अभाव में उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
एक समय पहले होडल का डबचिक विदेशी सैलानियों का मन मोह लेता था, लेकिन आज डबचिक की हालत बहुत खराब है। इसके कमरे जर्जर हालत में है, कमरों की छत से सरिया दिखाई दे रहा है।
डबचिक की स्थापना वर्ष 1975 में होडल में की गई थी। इसकी आधारशिला तत्कालीन राज्यपाल बीएन चक्रवर्ती ने रखी थी। प्राकृतिक वातावरण, ऊंचे पेड़, हरा-भरा पार्क और पक्षियों की मधुर आवाज यहां आने वाले पर्यटकों को आकर्षित करती थी।
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कई तरह के मनोरंजन के साधन थे मौजूद
एक समय था जब यहां झील में नौकायन, बतखों का झुंड, जलमुर्गियां, बार, हाथी-घोड़े की सवारी, बंदर का खेल, रीछ-भालू और स्नैक चार्मर जैसी मनोरंजन की सुविधाएं भी उपलब्ध थीं। मेहमानों के ठहरने के लिए दो डिलक्स समेत 20 कमरे थे। वर्तमान में डबचिक में बैंक्वेट हॉल, रेस्टोरेंट, फैमिली हॉल, लॉन और पार्किंग जैसी सुविधाएं उपलब्ध हैं। हालांकि, स्थानीय लोगों के अनुसार पहले की तुलना में यहां की हरियाली और प्राकृतिक सुंदरता काफी कम हो गई है। मीठे पानी की आपूर्ति बंद होने के बाद पेड़ों और हरियाली पर भी असर पड़ने की बात कही जा रही है। पहले पर्यटकों के लिए कर्मन बॉर्डर क्षेत्र से मीठा पानी उपलब्ध कराया जाता था, जिसे काफी समय पहले बंद कर दिया गया।
1.68 करोड़ के टेंडर का इंतजार
डबचिक भवन की मरम्मत, रखरखाव और सौंदर्यीकरण के लिए एक साल पहले हरियाणा सरकार की ओर से करीब 1.68 करोड़ रुपये का टेंडर लगाए जाने की बात सामने आ रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि मरम्मत और सौंदर्यीकरण का काम समय पर पूरा हो जाए तो डबचिक को फिर से पुराने स्वरूप में लाया जा सकता है। डबचिक में मेहमानों के खाने-पीने और ठहरने से हर वर्ष करीब 94 लाख रुपये की आय होने की बात बताई गई है। इसके बावजूद यह बदहाल है।
कोट
डबचिक के मेंटेनेंस और सौंदर्यीकरण के लिए टेंडर लगाया हुआ है। जर्जर कमरों की मरम्मत की जाएगी। जर्जर कमरों में की जा रही बुकिंग को बंद कर दिया जाएगा।
- अजय तनेजा, चीफ इंजीनियर, हरियाणा पर्यटन
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1975 में हुई थी स्थापना
असलम खान
होडल। शहर की पहचान और दिल्ली-आगरा राष्ट्रीय राजमार्ग-19 से गुजरने वाले पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र रहा हरियाणा पर्यटन का डबचिक पर्यटन स्थल इन दिनों बदहाली की मार झेल रहा है। करीब 22 एकड़ में फैला पर्यटन स्थल उपेक्षा के कारण जर्जर हालत में है। दूर-दराज से आने वाले पर्यटक यहां ठहरने के लिए पहुंचते हैं, लेकिन सुविधाओं के अभाव में उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
एक समय पहले होडल का डबचिक विदेशी सैलानियों का मन मोह लेता था, लेकिन आज डबचिक की हालत बहुत खराब है। इसके कमरे जर्जर हालत में है, कमरों की छत से सरिया दिखाई दे रहा है।
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डबचिक की स्थापना वर्ष 1975 में होडल में की गई थी। इसकी आधारशिला तत्कालीन राज्यपाल बीएन चक्रवर्ती ने रखी थी। प्राकृतिक वातावरण, ऊंचे पेड़, हरा-भरा पार्क और पक्षियों की मधुर आवाज यहां आने वाले पर्यटकों को आकर्षित करती थी।
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कई तरह के मनोरंजन के साधन थे मौजूद
एक समय था जब यहां झील में नौकायन, बतखों का झुंड, जलमुर्गियां, बार, हाथी-घोड़े की सवारी, बंदर का खेल, रीछ-भालू और स्नैक चार्मर जैसी मनोरंजन की सुविधाएं भी उपलब्ध थीं। मेहमानों के ठहरने के लिए दो डिलक्स समेत 20 कमरे थे। वर्तमान में डबचिक में बैंक्वेट हॉल, रेस्टोरेंट, फैमिली हॉल, लॉन और पार्किंग जैसी सुविधाएं उपलब्ध हैं। हालांकि, स्थानीय लोगों के अनुसार पहले की तुलना में यहां की हरियाली और प्राकृतिक सुंदरता काफी कम हो गई है। मीठे पानी की आपूर्ति बंद होने के बाद पेड़ों और हरियाली पर भी असर पड़ने की बात कही जा रही है। पहले पर्यटकों के लिए कर्मन बॉर्डर क्षेत्र से मीठा पानी उपलब्ध कराया जाता था, जिसे काफी समय पहले बंद कर दिया गया।
1.68 करोड़ के टेंडर का इंतजार
डबचिक भवन की मरम्मत, रखरखाव और सौंदर्यीकरण के लिए एक साल पहले हरियाणा सरकार की ओर से करीब 1.68 करोड़ रुपये का टेंडर लगाए जाने की बात सामने आ रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि मरम्मत और सौंदर्यीकरण का काम समय पर पूरा हो जाए तो डबचिक को फिर से पुराने स्वरूप में लाया जा सकता है। डबचिक में मेहमानों के खाने-पीने और ठहरने से हर वर्ष करीब 94 लाख रुपये की आय होने की बात बताई गई है। इसके बावजूद यह बदहाल है।
कोट
डबचिक के मेंटेनेंस और सौंदर्यीकरण के लिए टेंडर लगाया हुआ है। जर्जर कमरों की मरम्मत की जाएगी। जर्जर कमरों में की जा रही बुकिंग को बंद कर दिया जाएगा।
- अजय तनेजा, चीफ इंजीनियर, हरियाणा पर्यटन