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अंबेडकर महाविद्या के छात्र ने लगाई फांसी, सुसाइड नोट बरामद
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Updated Sat, 18 Feb 2017 04:18 PM IST
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गांव मलोखड़ा स्थित अंबेडकर महाविद्या विहार में एक छात्र (25) ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर उसका पोस्टमार्टम कराया है। मृतक ने सुसाइड नोट भी छोड़ है, जिसमें उसने लिखा है कि वह अपनी जिंदगी खुद समाप्त कर रहा है। इसमें किसी का कोई दोष नहीं है।
मृतक (योगेश) के परिवार से पुलिस ने बयान ले लिया है। एसएचओ देवेंद्र सिंह ने बताया मृतक के पिता विष्णु भगवान ने कहा है कि उनकी किसी से कोई रंजिश नहीं थी। वे इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं चाहते हैं। एसएचओ ने बताया कि योगेश बहादुरगढ़ के सेक्टर-7 का निवासी था।
उसने वर्ष 2014 में अंबेडकर शिक्षण संस्थान में धार्मिक विषयों का अध्ययन शुरू किया था। वह नारायण गुरुकक्ष भवन में अपने सहपाठियों के साथ रहता था। रोजाना की तरह रात को खाना खाने के बाद वह सोने के लिए अपने कमरे में चला गया। योगेश के साथ रहने वाले छात्र कई दिनों से छुट्टी पर गए थे। शुक्रवार की सुबह उसके सहपाठी लक्ष्मण ने योगेश को पंखे से लटका पाया।
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चाहता था अंगदान हो
सूचना मिलने पर पुलिस मौकेे पर पहुंची। पुलिस ने एक सुसाइड नोट बरामद किया है। उसने लिखा है कि वह अपनी जिंदगी खुद समाप्त कर रहा है। इसमें किसी का कोई दोष नहीं है। योगेश ने सुसाइड नोट में मरने के बाद अपने अंग जरूरतमंदों को दान करने के लिए भी लिखा था, लेकिन ज्यादा समय बीत जाने से अंगदान नहीं हो सका।
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मृतक (योगेश) के परिवार से पुलिस ने बयान ले लिया है। एसएचओ देवेंद्र सिंह ने बताया मृतक के पिता विष्णु भगवान ने कहा है कि उनकी किसी से कोई रंजिश नहीं थी। वे इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं चाहते हैं। एसएचओ ने बताया कि योगेश बहादुरगढ़ के सेक्टर-7 का निवासी था।
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उसने वर्ष 2014 में अंबेडकर शिक्षण संस्थान में धार्मिक विषयों का अध्ययन शुरू किया था। वह नारायण गुरुकक्ष भवन में अपने सहपाठियों के साथ रहता था। रोजाना की तरह रात को खाना खाने के बाद वह सोने के लिए अपने कमरे में चला गया। योगेश के साथ रहने वाले छात्र कई दिनों से छुट्टी पर गए थे। शुक्रवार की सुबह उसके सहपाठी लक्ष्मण ने योगेश को पंखे से लटका पाया।
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चाहता था अंगदान हो
सूचना मिलने पर पुलिस मौकेे पर पहुंची। पुलिस ने एक सुसाइड नोट बरामद किया है। उसने लिखा है कि वह अपनी जिंदगी खुद समाप्त कर रहा है। इसमें किसी का कोई दोष नहीं है। योगेश ने सुसाइड नोट में मरने के बाद अपने अंग जरूरतमंदों को दान करने के लिए भी लिखा था, लेकिन ज्यादा समय बीत जाने से अंगदान नहीं हो सका।