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एक साथ चार चिताओं को मुखाग्नि देते ही लोगों की आंखों से छलकने लगे आंसू
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एक साथ चार चिताओं को मुखाग्नि देते ही लोगों की आंखों से छलकने लगे आंसू
होडल। बेटी मुझे पता होता कि अब तुम लोग कभी नहीं मिलोगे तो मैं और पहले ही तुम्हें लेने के लिए सड़क पर जा खड़ा हो जाता। यह शब्द बोलते ही सुरेश फूट-फूटकर रो पड़ा। श्मशान घाट में जब एक साथ चार लोगों की चिता को मुखाग्नि दी गई तो सभी की आंखों से आंसू छलक पड़े। मृतकों के परिजनों का तो रो-रोकर बुरा हाल है।
राजस्थान रोडवेज बस चालक की लापरवाही ने एक साथ ही मामा-भांजी के परिवार को लील लिया। मिलने-जुलने वाले और रिश्तेदार भी मौत की खबर सुनकर सहर और सोचने लगे की वह किसके घर पर पहले जाकर शोक मनाएं। मृतकों के परिजन व रिश्तेदारों के अलावा आसपास के लोगों का उनके घर पर हुजूम लगना शुरू हो गया लेकिन जब लोग घर पहुंचे तो वहां मृतक दयाचंद के घर पर ताला लटका मिला। बाद में लोग मृतक के भाई के घर पहुंचे।
इस हादसे की सूचना के बाद लघु खंड कालोनी व बाइसी मौहल्ले में मातम सा छा गया। मृतका सविता के ससुर सुरेश ने बताया कि सविता की आठ वर्षीय बेटी व मृतक दयानंद की पत्नी रेखा और तीन वर्षीय पुत्र रितिक अभी भी जिंदगी व मौत से जूझ रहे हैं। उन्हें तो यह तक नहीं पता कि इस दुर्घटना में अब उनके अपने नहीं रहे। लोग मृतकों के घरों पर बैठे दोपहर तक पलवल सरकारी अस्पताल से पोस्टमार्टम होने के बाद शवों के आने का इंतजार करते रहे। लोगों की आंखों से बहते आंसू उनके दुख को बयां कर रहे थे। जैसे ही चारों मृतकों के शव उनके घर पहुंचे तो दुख में बैठे लोगों का हुजूम लगना शुरू हो गया।
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आनन-फानन में मृतकों के शवों को स्नान आदि करा अंतिम संस्कार के लिए स्वर्गाश्रम ले जाया गया। शव यात्रा में शहर के सैकड़ों लोग शामिल हुए। स्वर्गाश्रम में एक साथ चारों शवों को चिताओं पर लिटा मुखाग्नि दी गई। नम आंखों से लोगों ने सभी मृतकों को भावभीनी विदाई दी। मृतका सविता के ससुर सुरेश ने रोते हुए कहा कि दुर्घटना से पांच मिनट पहले ही सविता का घर फोन आया की पापा वे आ गए हैं तथा बच्चों को और उसे घर ले जाएं, लेकिन उसके पहुंचने से पहले ही उस यमराज रोडवेज चालक ने उसके बच्चों को लील लिया।
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होडल। बेटी मुझे पता होता कि अब तुम लोग कभी नहीं मिलोगे तो मैं और पहले ही तुम्हें लेने के लिए सड़क पर जा खड़ा हो जाता। यह शब्द बोलते ही सुरेश फूट-फूटकर रो पड़ा। श्मशान घाट में जब एक साथ चार लोगों की चिता को मुखाग्नि दी गई तो सभी की आंखों से आंसू छलक पड़े। मृतकों के परिजनों का तो रो-रोकर बुरा हाल है।
राजस्थान रोडवेज बस चालक की लापरवाही ने एक साथ ही मामा-भांजी के परिवार को लील लिया। मिलने-जुलने वाले और रिश्तेदार भी मौत की खबर सुनकर सहर और सोचने लगे की वह किसके घर पर पहले जाकर शोक मनाएं। मृतकों के परिजन व रिश्तेदारों के अलावा आसपास के लोगों का उनके घर पर हुजूम लगना शुरू हो गया लेकिन जब लोग घर पहुंचे तो वहां मृतक दयाचंद के घर पर ताला लटका मिला। बाद में लोग मृतक के भाई के घर पहुंचे।
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इस हादसे की सूचना के बाद लघु खंड कालोनी व बाइसी मौहल्ले में मातम सा छा गया। मृतका सविता के ससुर सुरेश ने बताया कि सविता की आठ वर्षीय बेटी व मृतक दयानंद की पत्नी रेखा और तीन वर्षीय पुत्र रितिक अभी भी जिंदगी व मौत से जूझ रहे हैं। उन्हें तो यह तक नहीं पता कि इस दुर्घटना में अब उनके अपने नहीं रहे। लोग मृतकों के घरों पर बैठे दोपहर तक पलवल सरकारी अस्पताल से पोस्टमार्टम होने के बाद शवों के आने का इंतजार करते रहे। लोगों की आंखों से बहते आंसू उनके दुख को बयां कर रहे थे। जैसे ही चारों मृतकों के शव उनके घर पहुंचे तो दुख में बैठे लोगों का हुजूम लगना शुरू हो गया।
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आनन-फानन में मृतकों के शवों को स्नान आदि करा अंतिम संस्कार के लिए स्वर्गाश्रम ले जाया गया। शव यात्रा में शहर के सैकड़ों लोग शामिल हुए। स्वर्गाश्रम में एक साथ चारों शवों को चिताओं पर लिटा मुखाग्नि दी गई। नम आंखों से लोगों ने सभी मृतकों को भावभीनी विदाई दी। मृतका सविता के ससुर सुरेश ने रोते हुए कहा कि दुर्घटना से पांच मिनट पहले ही सविता का घर फोन आया की पापा वे आ गए हैं तथा बच्चों को और उसे घर ले जाएं, लेकिन उसके पहुंचने से पहले ही उस यमराज रोडवेज चालक ने उसके बच्चों को लील लिया।