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Palwal News: कागजों में चल रहा स्वच्छता अभियान, गंदे-टूटे शौचालय बता रहे हकीकत
Sat, 02 Aug 2025 11:20 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, पलवल
संवाद न्यूज एजेंसी, पलवल
Updated Sat, 02 Aug 2025 11:20 PM IST
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- रेलवे स्टेशन से लेकर अस्पताल तक शौचालयों की दुर्दशा, कई जगह शौचालयों में लगे है ताले
राहुल राज
पलवल। स्वच्छ भारत मिशन के तमाम दावों के बावजूद शहर के सरकारी शौचालयों की हालत बदतर बनी हुई है। कागजों में शहर को स्वच्छ दिखाने की हर मुमकिन कवायद की जा रही है, लेकिन हकीकत तो शहर के गंदे-टूटे शौचालय ही बयान कर देते हैं। नगर परिषद ने शहर में सार्वजनिक शौचालय तो बनवा दिए, लेकिन उनका रखरखाव करना भूल गई। अमर उजाला की टीम ने प्रमुख स्थानों पर बने शौचालयों की पड़ताल की तो पाया कि रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड, सब्जी मंडी और जिला नागरिक अस्पताल में बने शौचालय या तो बंद पड़े हैं या फिर गंदगी और बदबू से पटे पड़े हैं।
रेलवे स्टेशन पर हाल बेहाल
रेलवे स्टेशन परिसर में बना शौचालय पूरी तरह उपेक्षित है। स्टेशन पर बने शौचालय की वॉश बेसिन और शौचालय तक टूटा पड़ा है। वहीं, दिव्यांगजनों के लिए बनाए गए शौचालय पर ताला लटका हुआ है, जिसके कारण जरूरतमंद यात्री शौचालय का इस्तेमाल नहीं कर पा रहे हैं। यात्री खुले में शौच करने को मजबूर है।
बस स्टैंड परिसर के शौचालय में बदबू और जलभराव
बस स्टैंड परिसर में दो शौचालय बनाए गए है। थोड़ी देर की बारिश के बाद ही परिसर में बने शौचालय के बाहर जलभराव हो जाता है, जिसके कारण शौचालय जाने का रास्ता ही बंद हो जाता है। शौचालय में गंदगी पसरी रहती है, नल टूटे पड़े है और चारों तरफ फैली बदबू से यात्री परेशान हैं। शौचालयों में मच्छरों और मक्खियों का जमावड़ा बना रहता है। महिला शौचालय के बाहर तो आवारा कुत्तों का डेरा बन गया है। जिसके कारण यात्रियों को काफी परेशानी होती है।
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सब्जी मंडी में बना शौचालय पानी में रहता है डूबा
नगर परिषद ने सब्जी मंडी में सार्वजनिक शौचालय बनवाया था। सब्जी मंडी में जलभराव के कारण यह शौचालय अक्सर बंद रहता है और जब खुला होता है तब भी अंदर गंदगी, बदबू और टूटे उपकरणों से लोगों को दो-चार होना पड़ता है। भवन भी जर्जर अवस्था में पहुंच चुका है और जलभराव के चलते लोगों को अंदर जाना मुश्किल हो जाता है।
लघु सचिवालय में भी नहीं सुधरी व्यवस्था
लघु सचिवालय जैसी महत्वपूर्ण इमारत में बने शौचालय भी बदहाली की कहानी बयान कर रहे हैं। दिव्यांगों के लिए बनाए गए शौचालयों में सफाई का सामान पड़ा हुआ है, जिसके कारण शौचालय का प्रयोग नहीं किया जा सकता है। यहां के शौचालयों में भी बदबू और गंदगी ने अपना डेरा बना रखा है।
नागरिक अस्पताल में शौचालय बना स्टोर रूम
स्वास्थ्य सेवाओं के केंद्र जिला नागरिक अस्पताल में स्थिति और भी चिंताजनक है। यहां कई शौचालयों को स्टोर रूम के रूप में प्रयोग किया जा रहा है। उनमें कूड़ा-कचरा और अस्पताल का कचरा पड़ा रहता है और मरीजों व उनके परिजनों को असुविधा का सामना करना पड़ रहा है। कुछ शौचालयों की हालत तो ऐसी है कि वहां जाना तक मुश्किल हो जाता है।
शहर में शौचालयों की ये बदतर स्थिति न सिर्फ आमजन की परेशानी बढ़ा रही है, बल्कि सरकारी दावों की भी पोल खोल रही है। यह हाल तब है जब सरकार ‘स्वच्छ भारत मिशन’ के तहत करोड़ों रुपये खर्च कर रही है। संवाद
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राहुल राज
पलवल। स्वच्छ भारत मिशन के तमाम दावों के बावजूद शहर के सरकारी शौचालयों की हालत बदतर बनी हुई है। कागजों में शहर को स्वच्छ दिखाने की हर मुमकिन कवायद की जा रही है, लेकिन हकीकत तो शहर के गंदे-टूटे शौचालय ही बयान कर देते हैं। नगर परिषद ने शहर में सार्वजनिक शौचालय तो बनवा दिए, लेकिन उनका रखरखाव करना भूल गई। अमर उजाला की टीम ने प्रमुख स्थानों पर बने शौचालयों की पड़ताल की तो पाया कि रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड, सब्जी मंडी और जिला नागरिक अस्पताल में बने शौचालय या तो बंद पड़े हैं या फिर गंदगी और बदबू से पटे पड़े हैं।
रेलवे स्टेशन पर हाल बेहाल
रेलवे स्टेशन परिसर में बना शौचालय पूरी तरह उपेक्षित है। स्टेशन पर बने शौचालय की वॉश बेसिन और शौचालय तक टूटा पड़ा है। वहीं, दिव्यांगजनों के लिए बनाए गए शौचालय पर ताला लटका हुआ है, जिसके कारण जरूरतमंद यात्री शौचालय का इस्तेमाल नहीं कर पा रहे हैं। यात्री खुले में शौच करने को मजबूर है।
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बस स्टैंड परिसर के शौचालय में बदबू और जलभराव
बस स्टैंड परिसर में दो शौचालय बनाए गए है। थोड़ी देर की बारिश के बाद ही परिसर में बने शौचालय के बाहर जलभराव हो जाता है, जिसके कारण शौचालय जाने का रास्ता ही बंद हो जाता है। शौचालय में गंदगी पसरी रहती है, नल टूटे पड़े है और चारों तरफ फैली बदबू से यात्री परेशान हैं। शौचालयों में मच्छरों और मक्खियों का जमावड़ा बना रहता है। महिला शौचालय के बाहर तो आवारा कुत्तों का डेरा बन गया है। जिसके कारण यात्रियों को काफी परेशानी होती है।
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सब्जी मंडी में बना शौचालय पानी में रहता है डूबा
नगर परिषद ने सब्जी मंडी में सार्वजनिक शौचालय बनवाया था। सब्जी मंडी में जलभराव के कारण यह शौचालय अक्सर बंद रहता है और जब खुला होता है तब भी अंदर गंदगी, बदबू और टूटे उपकरणों से लोगों को दो-चार होना पड़ता है। भवन भी जर्जर अवस्था में पहुंच चुका है और जलभराव के चलते लोगों को अंदर जाना मुश्किल हो जाता है।
लघु सचिवालय में भी नहीं सुधरी व्यवस्था
लघु सचिवालय जैसी महत्वपूर्ण इमारत में बने शौचालय भी बदहाली की कहानी बयान कर रहे हैं। दिव्यांगों के लिए बनाए गए शौचालयों में सफाई का सामान पड़ा हुआ है, जिसके कारण शौचालय का प्रयोग नहीं किया जा सकता है। यहां के शौचालयों में भी बदबू और गंदगी ने अपना डेरा बना रखा है।
नागरिक अस्पताल में शौचालय बना स्टोर रूम
स्वास्थ्य सेवाओं के केंद्र जिला नागरिक अस्पताल में स्थिति और भी चिंताजनक है। यहां कई शौचालयों को स्टोर रूम के रूप में प्रयोग किया जा रहा है। उनमें कूड़ा-कचरा और अस्पताल का कचरा पड़ा रहता है और मरीजों व उनके परिजनों को असुविधा का सामना करना पड़ रहा है। कुछ शौचालयों की हालत तो ऐसी है कि वहां जाना तक मुश्किल हो जाता है।
शहर में शौचालयों की ये बदतर स्थिति न सिर्फ आमजन की परेशानी बढ़ा रही है, बल्कि सरकारी दावों की भी पोल खोल रही है। यह हाल तब है जब सरकार ‘स्वच्छ भारत मिशन’ के तहत करोड़ों रुपये खर्च कर रही है। संवाद