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चौहान पाल के किसानों ने दिया धरना को समर्थन
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पलवल। कृषि कानूनों की वापसी व न्यूनतम समर्थन मूल्य पर गारंटी कानून की मांग को लेकर अटोहां चौक पर चल रहे धरने को शुक्रवार को चौहान पाल के किसानों ने समर्थन दिया। इस अवसर पर अध्यक्षता मट्टर सिंह ने की। संचालन रूपराम तेवतिया ने किया। धरने पर आए किसानों ने 19 अगस्त को किसानों के असामाजिक तत्वों द्वारा की गई मारपीट व तोड़फोड़ की निंदा की। किसानों ने मांग की कि आरोपियों को शीघ्र गिरफ्तार किया जाए। ऐसा न करने पर जिले में बड़ा आंदोलन किया जाएगा। धरना स्थल पर किसानों ने जमकर नारेबाजी की।
धरने पर पांच सितंबर को मुज्जफरनगर में होने वाली किसानों की महापंचायत में पलवल से भी ज्यादा से ज्यादा किसानों को ले जाने का निर्णय लिया गया। कहा गया कि किसान नेता गांवों में जाकर किसानों को इस बारे में सूचित करें तथा उन्हें मुज्जफरनगर में पहुंचने का निमंत्रण दें। किसानों ने कहा कि सरकार कृषि कानूनों को वापिस ले। कानून वापस न होने तक कोई भी किसान वापिस नहीं जाएगा। धरना जारी रहेगा। किसानों की आवाज को सरकार दबाने का प्रयास कर रही है। किसान अब किसी दबाव में आने वाले नहीं है। उन्होंने कहा कि सरकार ने किसानों की मांगों पर ध्यान नहीं दिया तो सरकार को इसका खामियाजा भुगतना पड़ेगा।
किसानों का कहना था कि सरकार जिस तरह से किसान, मजदूर व आम वर्ग का शोषण कर रही है, लोग उसका हिसाब चुनावों में लेंगे। किसानों ने कहा कि आज हर चीज महंगी होती जा रही है, लेकिन किसानों की फसल का मूल्य वहीं पर है। सरकार किसानों की आय दोगुणा करने की बात कहकर गलत कृषि कानूनों को लादना चाहती है। जिससे उनके उद्योगपति मित्रों को फायदा हो, लेकिन अब किसी किसी बहकावे में आने वाले नहीं है। धरने को भजन गायक किशन जाब, रणजीत चौहान, बिजेंद्र मीतरौल, गोपी औरंगागाद, जयदेव चौहान, अच्छेलाल, हुकम सिंह अटोहां तथा बीर सिंह औरंगागाद ने अपने भजनों के माध्यम से किसानों का मनोरंजन किया। साथ ही कृषि कानूनों पर सरकार के खिलाफ जमकर टिप्पणियां की।
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धरने को डॉ. रघुवीर सिंह, धर्मवीर सिंह घुघेरा, राजेंद्र बैंसला बडौली, राज कुमार ओलिहान, इदरीश मोहम्मद अलीगढ़, राज सिंह, बीधु सिंह, रणवीर चौहान, राजेंद्र घर्रोट, इंद्रजीत कुंउू तथा राज सिंह ने संबोधित किया।
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धरने पर पांच सितंबर को मुज्जफरनगर में होने वाली किसानों की महापंचायत में पलवल से भी ज्यादा से ज्यादा किसानों को ले जाने का निर्णय लिया गया। कहा गया कि किसान नेता गांवों में जाकर किसानों को इस बारे में सूचित करें तथा उन्हें मुज्जफरनगर में पहुंचने का निमंत्रण दें। किसानों ने कहा कि सरकार कृषि कानूनों को वापिस ले। कानून वापस न होने तक कोई भी किसान वापिस नहीं जाएगा। धरना जारी रहेगा। किसानों की आवाज को सरकार दबाने का प्रयास कर रही है। किसान अब किसी दबाव में आने वाले नहीं है। उन्होंने कहा कि सरकार ने किसानों की मांगों पर ध्यान नहीं दिया तो सरकार को इसका खामियाजा भुगतना पड़ेगा।
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किसानों का कहना था कि सरकार जिस तरह से किसान, मजदूर व आम वर्ग का शोषण कर रही है, लोग उसका हिसाब चुनावों में लेंगे। किसानों ने कहा कि आज हर चीज महंगी होती जा रही है, लेकिन किसानों की फसल का मूल्य वहीं पर है। सरकार किसानों की आय दोगुणा करने की बात कहकर गलत कृषि कानूनों को लादना चाहती है। जिससे उनके उद्योगपति मित्रों को फायदा हो, लेकिन अब किसी किसी बहकावे में आने वाले नहीं है। धरने को भजन गायक किशन जाब, रणजीत चौहान, बिजेंद्र मीतरौल, गोपी औरंगागाद, जयदेव चौहान, अच्छेलाल, हुकम सिंह अटोहां तथा बीर सिंह औरंगागाद ने अपने भजनों के माध्यम से किसानों का मनोरंजन किया। साथ ही कृषि कानूनों पर सरकार के खिलाफ जमकर टिप्पणियां की।
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धरने को डॉ. रघुवीर सिंह, धर्मवीर सिंह घुघेरा, राजेंद्र बैंसला बडौली, राज कुमार ओलिहान, इदरीश मोहम्मद अलीगढ़, राज सिंह, बीधु सिंह, रणवीर चौहान, राजेंद्र घर्रोट, इंद्रजीत कुंउू तथा राज सिंह ने संबोधित किया।