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Palwal News: रसायनयुक्त पानी खेती में घोल रहा जहर, प्रशासन ने नहीं उठाए ठोस कदम

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 26 Dec 2024 11:09 PM IST
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Chemical water is poisoning agriculture, administration did not take concrete steps
आगरा और गुरुग्राम नहर में आ रहा है फरीदाबाद और दिल्ली के उद्योगों का रसायनयुक्त पानी
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- बीओडी होना चाहिए चार मिलीग्राम तक, लेकिन है 45 से 50 मिलीग्राम

अनूप पाराशर



पलवल। शहरी गंदे पानी की सफाई के लिए तो सरकार ने दो-दो वाटर ट्रीटमेंट प्लांट लगा दिए, लेकिन आज तक सरकार जिले से गुजरने वाली आगरा व गुरुग्राम नहर पर वाटर ट्रीटमेंट प्लांट नहीं लगा पाई। इसके चलते दिल्ली-फरीदाबाद के उद्योगों से आने वाला रसायनयुक्त पानी यमुना नदी में ही नहीं खेती में भी जहर घोल रहा है। यह प्रदूषित जल आने वाली पीढ़ी के कल को बिगाड़ रहा है। इसकी तरफ न तो प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड का ध्यान है और न ही सरकार का। हालात ये हैं कि इस रसायनयुक्त पानी से होने वाली खेती के चलते इस इलाके में बीमारियां पनप रही हैं। चर्म रोग तो इस इलाके में आम है। इसके बावजूद सरकार की तरफ से कोई ठोस कदम आज तक नहीं उठाए गए हैं।



बता दें कि फरीदाबाद से पलवल होते हुए उजीना ड्रेन के रास्ते यमुना नदी में मिलने वाली गौंछी ड्रेन में फरीदाबाद के उद्योगों का ही नहीं हथीन की शराब फैक्ट्री का रसायनयुक्त पानी भी यमुना में पहुंचता है। ड्रेनों का पानी काफी विषैला हो चुका है, जिसमें मल मूत्र के अलावा जीव-जंतु व मनुष्य के शव तक बहते नजर आते हैं। इसके चलते ड्रेनों का पानी इस कदर जहरीला हो चुका है कि मछलियां तो क्या कोई व्यक्ति कुछ देर के लिए हाथ डाल दे तो उसे चर्म रोग हो जाए। आगरा और गुरुग्राम नहर के पानी को साफ करने का मुद्दा हर बार विधानसभा व लोकसभा चुनावों में उठाया जाता है, लेकिन बाद में यह मुद्दा केवल चुनावों तक ही सीमित बनकर रह जाता है। कई बार सामाजिक संस्थाएं इस मामले को लेकर आंदोलन भी कर चुकी हैं, फिर भी आज तक किसी ने कोई कदम नहीं उठाया।
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बीओडी की मात्रा पहुंच चुकी है 50 के पास

जिले से गुजरने वाली यमुना नदी का पानी भी निर्धारित मानकों से 10 गुणा से अधिक प्रदूषित है। जिला प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (पीसीबी) के रिकॉर्ड पर नजर दौड़ाई जाए तो यमुना नदी के पानी में बायो ऑक्साइड डिमांड (बीओडी) का स्तर 4 मिलीग्राम से अधिक नहीं होना चाहिए, लेकिन यह स्तर मौजूदा समय में 45 से 50 मिलीग्राम के आसपास है। दिल्ली में दर्जनों की संख्या में ऐसे नाले हैं, जिनके जरिये दिल्ली का केमिकल युक्त और गंदा पानी बगैर शोधन के सीधे यमुना नदी में मिल रहा है। पीसीबी के रिकॉर्ड के अनुसार पानीपत की तरफ से आ रही यमुना नदी में दिल्ली सीमा में प्रवेश करने से पहले बीओडी लेवल 1.5 मिलीग्राम के आसपास रहता है, लेकिन दिल्ली के बीचोंबीच यमुना नदी के पानी में बीओडी लेवल 40 के पार हो जाता है।
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जमीन के अंदर की धातुएं भी हो रहीं समाहित

औद्योगिक अपशिष्ट रिसकर जमीन के अंदर जाने से शीशा, कैडमियम व क्रोमियम जैसी भारी धातुएं भी भूजल स्रोतों में समाहित हो गई हैं। कई इकाइयां और संस्थान अपने सीवरेज के पानी को भी रजवाहों में डाल देते हैं। आर्सेनिक, फ्लोराइड और आयरन जैसे तत्वों के ज्यादा होने से नहर व रजवाहों के साथ बसे गांवों के लोगों में इंसेफेलाइटिस, पीलिया और टाइफाइड जैसी बीमारियां होती हैं। इसके अलावा दूषित जल से, एक्जिमा, हेपेटाइटिस और लीवर संबंधी जानलेवा बीमारियां बहुत तेजी से बढ़ी हैं।



जिले के गांव बासवां व भिडूकी जैसे गांवों के किसान ज्यादा प्रभावित हैं। चिकित्सकों की मानें तो आगरा और गुरुग्राम नहर से निकलने वाले रजवाहों का पानी इतना दूषित है कि दो मिनट उस पानी में हाथ डालकर बैठ जाएं तो चरम रोग हो जाएंगे। इस पानी से खेती न करने की सलाह के बावजूद किसान फसलों की सिंचाई करते हैं। इससे कई तरह की बीमारियां फैल सकती हैं। फ्लोराइड की अत्यधिक मात्रा वाला जल फ्लुओरोसिस का कारण बनता है, जिसकी वजह से दांत और हड्डियों की स्थायी क्षति का खतरा बढ़ जाता है। यमुना बचाओ अभियान के संरक्षण होने के नाते मेरे द्वारा बाकायदा जिले में पदयात्रा के माध्यम से किसानों को जागरूक भी करने का प्रयास किया गया, लेकिन जल की कमी के चलते किसान इसी पानी से खेतों में फसलों की सिंचाई करने को मजबूर हैं। जब तक सरकार इस तरफ ध्यान नहीं देगी, तब तक इसी तरह से आगरा व गुरुग्राम नहर में उद्योगों का रसायनयुक्त पानी आता रहेगा। इस पर रोक लगाने के लिए पानी का शोधन करने की बेहद आवश्यकता है। -डॉ. शिव सिंह रावत, पूर्व अधीक्षक अभियंता सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग हरियाणा



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विभाग द्वारा समय-समय पर औद्योगिक इकाइयों में लगाए गए ट्रीटमेंट सिस्टम की जांच की जाती है और उन्हें आवश्यक दिशानिर्देश दिए जाते हैं। इसके अलावा जहां कहीं से भी इस प्रकार प्रदूषित पानी रजवाहे आदि में डालने की शिकायत मिलती है, उसके खिलाफ तुरंत कार्रवाई की जाती है। ड्रेनों के दूषित होने का मामला सरकार के संज्ञान में हैं।


- आकांक्षा तंवर, क्षेत्रीय अधिकारी जिला प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड





सफाई के लिए बड़े पैमाने पर शोधन संयंत्र लगाने की आवश्यकता है। इसके लिए मैं प्रयासरत हूं। मैं इस बारे में जल्द ही सिंचाई विभाग के अधिकारियों से बात कर मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी से भी बात करूंगा। मेरा प्रयास है कि फरीदाबाद संसदीय क्षेत्र के लोगों को पीने तथा सिंचाई के लिए स्वच्छ जल मिले। इसके लिए हर संभव प्रयास किए जाएंगे। ट्रीटमेंट प्लांट लगवाने के बारे में भी बात करूंगा।

-कृष्णपाल गुर्जर, केंद्रीय राज्यमंत्री भारत सरकार।
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