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रोक न टोक सड़कों पर खुलेआम घूम रहे मवेशी
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पलवल में दिल्ली-आगरा राजमार्ग पर बैठे सांड
- फोटो : Palwal
पलवल। सरकार सड़कों पर घूमते बेसहारा मवेशियों के संरक्षण की बात तो खूब करती है, लेकिन संरक्षण के नाम पर कुछ होता नजर नहीं आ रहा है। सरकार ने इनके लिए योजनाएं भी पिछले सात साल में काफी बनाईं, लेकिन योजनाएं सिरे नहीं चढ़ पाई हैं। मवेशी गंदगी में मुंह मारते नजर आते हैं। वहीं सांड़ तो सड़कों पर इस कदर उत्पात मचाते हैं कि कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। प्रशासन और सरकार द्वारा की जा रही इस अनदेखी के कारण पलवल में ही कई लोग सांड़ के हमले का शिकार होकर अपनी जान भी गवां चुके हैं।
जिले में राजमार्ग हो या लिंक मार्ग हर तरफ मवेशी घूमते नजर आते हैं। सड़कों पर बैठे सांड़ न सिर्फ गंदगी को फैलाते हैं, बल्कि लोगों के लिए खतरा भी बने रहते हैं। बीच सड़क में खड़े सांड़ के पास से यदि कोई वाहन चालक या पैदल व्यक्ति गुजरता है तो कई बार ये उस पर हमला भी कर देते हैं। इतना ही नहीं आपस में लड़ते समय भी कई बार सांड़ किसी वाहन पर या सड़क किनारे किसी दुकान में गिर जाते हैं।
जिले में सड़कों पर घूमते मवेशी लोगों के लिए दुर्घटनाओं का कारण बन रहे हैं। दिल्ली-आगरा राजमार्ग पर तो इतना बुरा हाल है कि कहीं-कहीं तो एक साथ कई-कई सांड़ सड़क पर बैठे रहते हैं। इसके कारण यातायात भी अवरुद्ध होता है। इन सांड़ों से निजात दिलाने के लिए स्थानीय लोग व सामाजिक संस्थाएं कई बार प्रशासन से शिकायत कर चुके हैं, लेकिन अब तक इस तरफ कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। अब तो हालात ये हो गए हैं कि सांड़ शहर के रास्तों से होते हुए गांवों में पहुंच रहे हैं तथा खेतों में खड़ी फसल को भी बर्बाद कर रहे हैं।
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सांड़ के संरक्षण के लिए बनाई थी नंदीशाला योजना
सरकार के निर्देश पर जिला प्रशासन ने 2018 में नंदीशाला योजना बनाई, ताकि सड़कों पर घूमते इन आवारा सांड़ को वहां रखा जा सकें। इसके लिए जिला प्रशासन के ग्राम पंचायतों से 25 एकड़ जमीन मांगी, जिसके बाद कई गांवों की तरफ से प्रशासन को इसके लिए जमीन भी उपलब्ध कराने का प्रस्ताव दे दिया गया, लेकिन अब तक इस तरफ प्रशासन ने ध्यान ही नहीं दिया।
ग्रीवेंस कमेटी की बैठक में भी उठा है कई बार मुद्दा
जिला ग्रीवेंस कमेटी की बैठक में भी कई बार बेसहारा मवेशियों खासकर सांड़ का मुद्दा उठा है, लेकिन हर बार केवल अधिकारियों को निर्देश देने तक ही सीमित रह जाता है। इसके अलावा जिला उपायुुक्त भी कई बार सड़क सुरक्षा नियमों को सख्ती से लागू कराने के लिए होने वाली बैठकों में अधिकारियों को पशुओं को हटवाने के आदेश दे चुकें हैं, फिर भी कोई समाधान नहीं हुआ।
कई बार हो चुकी हैं दुर्घटनाएं
सड़कों पर घूमते सांड़ के कारण जिले में कई हादसे हो चुके हैं। मेडिकल स्टोर संचालक की दो सांड़ों के आपस में लड़ते समय मोटरसाइकिल पर गिरने से मौत हो चुकी है। वहीं, गांव कुसलीपुर में एक बुजुर्ग की सांड़ द्वारा हमला करने से मौत हो चुकी है। एक गांव में एक महिला की सांड़ के हमले से मौत हो चुकी है। इनके अलावा दो सांड़ों ने आपस में लड़ते हुए प्रकाश विहार कॉलोनी में एक ही परिवार की तीन महिलाओं को घायल कर दिया था। उन्हें काफी चोटें आई थीं। आपस में लड़ते हुए दो सांड़ राजमार्ग पर आ गए थे, जिस कारण तेज गति में आगरा की तरफ से आ रही एक गाड़ी उनसे टकरा गई थी। हादसे गाड़ी में सवार दो लोग घायल हो गए थे।
जिले में सांड़ बहुत हैं। सांड़ द्वारा हमला करने दादाजी की मौत हो चुकी है। प्रशासन से कई बार शिकायत कर चुके हैं, लेकिन ध्यान नहीं है। इस तरफ ध्यान देने की जरूरत है। यह हर व्यक्ति की सुरक्षा के लिए है।
- योगेश कौशिक
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कई बार उपायुक्त व नगर परिषद अधिकारियों को इस बारे में लिखा जा चुका है। सांड़ों से लोगों को निजात दिलाई जाए। जल्द ही इस बारे में प्रशासन व नगर परिषद के खिलाफ अदालत में भी जनहित याचिका दायर करूंगा।
- सुभाष शर्मा, एडवोकेट
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इस बारे में जल्द ही कोई उपाय किया जाएगा। राजमार्ग प्राधिकरण के अधिकारियों से भी कहकर सड़कों पर बैठने वाले सांड़ और मवेशियों को हटवाया जाएगा। इसके लिए इंतजाम किया जाएंगे, ताकि सांड़ों से लोगों को निजात मिल सके। नंदीशाला योजना की भी जानकारी लूंगा कि क्या है। उस पर भी कार्यवाही शुरू कराई जाएगी।
- कृष्ण कुमार, उपायुक्त पलवल
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जिले में राजमार्ग हो या लिंक मार्ग हर तरफ मवेशी घूमते नजर आते हैं। सड़कों पर बैठे सांड़ न सिर्फ गंदगी को फैलाते हैं, बल्कि लोगों के लिए खतरा भी बने रहते हैं। बीच सड़क में खड़े सांड़ के पास से यदि कोई वाहन चालक या पैदल व्यक्ति गुजरता है तो कई बार ये उस पर हमला भी कर देते हैं। इतना ही नहीं आपस में लड़ते समय भी कई बार सांड़ किसी वाहन पर या सड़क किनारे किसी दुकान में गिर जाते हैं।
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जिले में सड़कों पर घूमते मवेशी लोगों के लिए दुर्घटनाओं का कारण बन रहे हैं। दिल्ली-आगरा राजमार्ग पर तो इतना बुरा हाल है कि कहीं-कहीं तो एक साथ कई-कई सांड़ सड़क पर बैठे रहते हैं। इसके कारण यातायात भी अवरुद्ध होता है। इन सांड़ों से निजात दिलाने के लिए स्थानीय लोग व सामाजिक संस्थाएं कई बार प्रशासन से शिकायत कर चुके हैं, लेकिन अब तक इस तरफ कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। अब तो हालात ये हो गए हैं कि सांड़ शहर के रास्तों से होते हुए गांवों में पहुंच रहे हैं तथा खेतों में खड़ी फसल को भी बर्बाद कर रहे हैं।
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सांड़ के संरक्षण के लिए बनाई थी नंदीशाला योजना
सरकार के निर्देश पर जिला प्रशासन ने 2018 में नंदीशाला योजना बनाई, ताकि सड़कों पर घूमते इन आवारा सांड़ को वहां रखा जा सकें। इसके लिए जिला प्रशासन के ग्राम पंचायतों से 25 एकड़ जमीन मांगी, जिसके बाद कई गांवों की तरफ से प्रशासन को इसके लिए जमीन भी उपलब्ध कराने का प्रस्ताव दे दिया गया, लेकिन अब तक इस तरफ प्रशासन ने ध्यान ही नहीं दिया।
ग्रीवेंस कमेटी की बैठक में भी उठा है कई बार मुद्दा
जिला ग्रीवेंस कमेटी की बैठक में भी कई बार बेसहारा मवेशियों खासकर सांड़ का मुद्दा उठा है, लेकिन हर बार केवल अधिकारियों को निर्देश देने तक ही सीमित रह जाता है। इसके अलावा जिला उपायुुक्त भी कई बार सड़क सुरक्षा नियमों को सख्ती से लागू कराने के लिए होने वाली बैठकों में अधिकारियों को पशुओं को हटवाने के आदेश दे चुकें हैं, फिर भी कोई समाधान नहीं हुआ।
कई बार हो चुकी हैं दुर्घटनाएं
सड़कों पर घूमते सांड़ के कारण जिले में कई हादसे हो चुके हैं। मेडिकल स्टोर संचालक की दो सांड़ों के आपस में लड़ते समय मोटरसाइकिल पर गिरने से मौत हो चुकी है। वहीं, गांव कुसलीपुर में एक बुजुर्ग की सांड़ द्वारा हमला करने से मौत हो चुकी है। एक गांव में एक महिला की सांड़ के हमले से मौत हो चुकी है। इनके अलावा दो सांड़ों ने आपस में लड़ते हुए प्रकाश विहार कॉलोनी में एक ही परिवार की तीन महिलाओं को घायल कर दिया था। उन्हें काफी चोटें आई थीं। आपस में लड़ते हुए दो सांड़ राजमार्ग पर आ गए थे, जिस कारण तेज गति में आगरा की तरफ से आ रही एक गाड़ी उनसे टकरा गई थी। हादसे गाड़ी में सवार दो लोग घायल हो गए थे।
जिले में सांड़ बहुत हैं। सांड़ द्वारा हमला करने दादाजी की मौत हो चुकी है। प्रशासन से कई बार शिकायत कर चुके हैं, लेकिन ध्यान नहीं है। इस तरफ ध्यान देने की जरूरत है। यह हर व्यक्ति की सुरक्षा के लिए है।
- योगेश कौशिक
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कई बार उपायुक्त व नगर परिषद अधिकारियों को इस बारे में लिखा जा चुका है। सांड़ों से लोगों को निजात दिलाई जाए। जल्द ही इस बारे में प्रशासन व नगर परिषद के खिलाफ अदालत में भी जनहित याचिका दायर करूंगा।
- सुभाष शर्मा, एडवोकेट
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इस बारे में जल्द ही कोई उपाय किया जाएगा। राजमार्ग प्राधिकरण के अधिकारियों से भी कहकर सड़कों पर बैठने वाले सांड़ और मवेशियों को हटवाया जाएगा। इसके लिए इंतजाम किया जाएंगे, ताकि सांड़ों से लोगों को निजात मिल सके। नंदीशाला योजना की भी जानकारी लूंगा कि क्या है। उस पर भी कार्यवाही शुरू कराई जाएगी।
- कृष्ण कुमार, उपायुक्त पलवल