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Palwal News: सहायता राशि में धांधली करने वाले चार कर्मचारियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज
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- माता या पिता न होने पर जुवेनाइल जस्टिस एक्ट के तहत बाल संरक्षण इकाई द्वारा दो बच्चों को दिए जाते हैं चार-चार हजार रुपये
- लंबे समय से कर्मचारी पहुंचा रहे थे रिश्तेदारों को फायदा
संवाद न्यूज एजेंसी
पलवल। असहाय बच्चों को दी जाने वाली सहायता योजना में धांधली किए जाने का मामला सामने आया है। मामले में कैंप थाना पुलिस ने बाल सरंक्षण इकाई के चार कर्मचारियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है। फर्जी दस्तावेजों के आधार पर सहायता राशि लेने वाले मुकदमे में नामजद किए गए हैं। दरअसल, जुवेनाइल जस्टिस एक्ट की धारा 45 के तहत असहाय और जिन बच्चों के माता-पिता में एक नहीं है, उनके दो बच्चों को सहायता राशि के तौर पर चार-चार हजार रुपये प्रति माह दिए जाते है, जिन्हें कर्मचारी मिलीभगत कर गलत तरीके से अपने रिश्तेदारों को लाभ पहुंचा रहे थे।
कैंप थाना प्रभारी इंस्पेक्टर दिनेश के अनुसार राष्ट्रीय बाल सरंक्षण आयोग की रजिस्ट्रार और एएसजे गोमती मनोचा ने अगस्त माह में पुलिस को शिकायत दी थी। शिकायत की जांच के बाद जिला बाल सरंक्षण इकाई में फर्जी तरीके से सहायता राशि हड़पने के पुख्ता प्रमाण मिले। गांव कटेसरा निवासी राहुल उर्फ रविंद्र नियमों के खिलाफ दो बच्चों रूही और कार्तिक के नाम पर यह राशि ले रहे थे। इसी प्रकार कौशल द्वारा भी बच्चों हरसल, माही के अलावा अन्य बच्चों के नाम पर भी धोखाधडी से राशि ली जा रही थी। जांच के दौरान पाया गया कि जिला बाल सरंक्षण इकाई के कर्मचारियों ने नजदीकी संबंधियों को गलत तरीके से लाभ पहुंचाया है। सात लाख रुपये से भी अधिक की राशि गलत तरीके से हड़पी गई है। साल 2018 से यह घोटाला किया जा रहा था।
इंस्पेक्टर दिनेश ने बताया कि जिला बाल संरक्षण इकाई की डाटा विशलेषक कीर्ति शर्मा, गायत्री देवी, सविता और सीता देवी के खिलाफ धोखाखड़ी का मुकदमा दर्ज किया गया है। धोखाधड़ी की राशि और अधिक हो सकती है, क्योंकि जिला बाल सरंक्षण इकाई के अधिकारियों ने पुलिस को पूरा रिकॉर्ड नहीं दिया है। पूरे रिकॉर्ड की जांच होने पर धोखाधड़ी के आरोपियों की संख्या भी बढ़ सकती है। इस मामले के आरोपियों को जल्द ही गिरफ्तार कर पूरा रिकॉर्ड कब्जे में लिया जाएगा और जांच में जो भी आरोपी पाया जाएगा, उन्हें गिरफ्तार किया जाएगा।
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- लंबे समय से कर्मचारी पहुंचा रहे थे रिश्तेदारों को फायदा
संवाद न्यूज एजेंसी
पलवल। असहाय बच्चों को दी जाने वाली सहायता योजना में धांधली किए जाने का मामला सामने आया है। मामले में कैंप थाना पुलिस ने बाल सरंक्षण इकाई के चार कर्मचारियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है। फर्जी दस्तावेजों के आधार पर सहायता राशि लेने वाले मुकदमे में नामजद किए गए हैं। दरअसल, जुवेनाइल जस्टिस एक्ट की धारा 45 के तहत असहाय और जिन बच्चों के माता-पिता में एक नहीं है, उनके दो बच्चों को सहायता राशि के तौर पर चार-चार हजार रुपये प्रति माह दिए जाते है, जिन्हें कर्मचारी मिलीभगत कर गलत तरीके से अपने रिश्तेदारों को लाभ पहुंचा रहे थे।
कैंप थाना प्रभारी इंस्पेक्टर दिनेश के अनुसार राष्ट्रीय बाल सरंक्षण आयोग की रजिस्ट्रार और एएसजे गोमती मनोचा ने अगस्त माह में पुलिस को शिकायत दी थी। शिकायत की जांच के बाद जिला बाल सरंक्षण इकाई में फर्जी तरीके से सहायता राशि हड़पने के पुख्ता प्रमाण मिले। गांव कटेसरा निवासी राहुल उर्फ रविंद्र नियमों के खिलाफ दो बच्चों रूही और कार्तिक के नाम पर यह राशि ले रहे थे। इसी प्रकार कौशल द्वारा भी बच्चों हरसल, माही के अलावा अन्य बच्चों के नाम पर भी धोखाधडी से राशि ली जा रही थी। जांच के दौरान पाया गया कि जिला बाल सरंक्षण इकाई के कर्मचारियों ने नजदीकी संबंधियों को गलत तरीके से लाभ पहुंचाया है। सात लाख रुपये से भी अधिक की राशि गलत तरीके से हड़पी गई है। साल 2018 से यह घोटाला किया जा रहा था।
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इंस्पेक्टर दिनेश ने बताया कि जिला बाल संरक्षण इकाई की डाटा विशलेषक कीर्ति शर्मा, गायत्री देवी, सविता और सीता देवी के खिलाफ धोखाखड़ी का मुकदमा दर्ज किया गया है। धोखाधड़ी की राशि और अधिक हो सकती है, क्योंकि जिला बाल सरंक्षण इकाई के अधिकारियों ने पुलिस को पूरा रिकॉर्ड नहीं दिया है। पूरे रिकॉर्ड की जांच होने पर धोखाधड़ी के आरोपियों की संख्या भी बढ़ सकती है। इस मामले के आरोपियों को जल्द ही गिरफ्तार कर पूरा रिकॉर्ड कब्जे में लिया जाएगा और जांच में जो भी आरोपी पाया जाएगा, उन्हें गिरफ्तार किया जाएगा।
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