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बसपा नेताओं ने आंदोलन में पहुंचकर दिया किसानों कोसमर्थन
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पलवल। संयुक्त किसान मोर्चा के तत्वावधान में चल रहा किसान आंदोलन शुक्रवार को भी जारी रहा। अध्यक्षता बसपा के जिलाध्यक्ष हरदयाल सिंह अटोहा द्वारा की गई। मंच संचालन रूप राम तेवतिया ने किया। किसान संघर्ष समिति पलवल द्वारा धरने में शामिल दलित मजदूर व बसपा नेताओं का स्वागत किया।
आंदोलन में शामिल किसानों ने उनसे आह्वान किया कि अब वे गांवों में जनजागरण अभियान चलाकर दलितों, मजदूर, दबे कुचले वर्ग और महिलाओं के जत्थे तैयार करें। हर गांव में किसान मजदूर व महिलाओं को आंदोलन को मजबूत करने की जिम्मेदारी सौंपी जाए। किसान नेता राजकुमार औहलियान, रत्न सिंह सोरोत ने बताया कि संयुक्त किसान मोर्चा ने इस आंदोलन को और तेज करने की तैयारी की है। यह ऐसा समय है जब देश का अन्नदाता हर मुश्किल का सामना करते हुए सात माह से सड़कों पर है और सरकार राजहट पर अड़ी हुई है। जिसे किसी कीमत पर भुलाया नहीं जा सकता है।
भाजपा के शासनकाल में देश अघोषित आपातकाल के दौर से गुजर रहा है। देश में इसी दौर में किसानों ने तीन कृषि कानूनों की वापसी की मांग को लेकर आंदोलन शुरू किया है। किसान नेताओं ने बताया कि ये देश के अन्नदाता ही हैं जो खरीद खुदरा में करता है तथा अपने उत्पाद की बिक्री थोक में करता है। केंद्र सरकार के तीनों कानून किसान व खेत मजदूरों पर घातक प्रहार हैं ताकि किसान को न्यूनतम समर्थन मूल्य का लाभ न मिल सके। धरने को बसपा नेता जीवन लाल, हरदयाल,रोशनलाल अल्लिका, उदयसिंह , ताराचन्द राजेश बहीन, इन्दरजीत अल्लिका, सोहन पाल नरेंद्र गहलव ने भी संबोधित किया।
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आंदोलन में शामिल किसानों ने उनसे आह्वान किया कि अब वे गांवों में जनजागरण अभियान चलाकर दलितों, मजदूर, दबे कुचले वर्ग और महिलाओं के जत्थे तैयार करें। हर गांव में किसान मजदूर व महिलाओं को आंदोलन को मजबूत करने की जिम्मेदारी सौंपी जाए। किसान नेता राजकुमार औहलियान, रत्न सिंह सोरोत ने बताया कि संयुक्त किसान मोर्चा ने इस आंदोलन को और तेज करने की तैयारी की है। यह ऐसा समय है जब देश का अन्नदाता हर मुश्किल का सामना करते हुए सात माह से सड़कों पर है और सरकार राजहट पर अड़ी हुई है। जिसे किसी कीमत पर भुलाया नहीं जा सकता है।
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भाजपा के शासनकाल में देश अघोषित आपातकाल के दौर से गुजर रहा है। देश में इसी दौर में किसानों ने तीन कृषि कानूनों की वापसी की मांग को लेकर आंदोलन शुरू किया है। किसान नेताओं ने बताया कि ये देश के अन्नदाता ही हैं जो खरीद खुदरा में करता है तथा अपने उत्पाद की बिक्री थोक में करता है। केंद्र सरकार के तीनों कानून किसान व खेत मजदूरों पर घातक प्रहार हैं ताकि किसान को न्यूनतम समर्थन मूल्य का लाभ न मिल सके। धरने को बसपा नेता जीवन लाल, हरदयाल,रोशनलाल अल्लिका, उदयसिंह , ताराचन्द राजेश बहीन, इन्दरजीत अल्लिका, सोहन पाल नरेंद्र गहलव ने भी संबोधित किया।
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