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Palwal News: डीएपी की कालाबाजारी चरम पर, किसान परेशान

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 20 Oct 2026 11:53 PM IST
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Black marketing of DAP at its peak; farmers in distress
संवाद न्यूज एजेंसी
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तावडू। सरसों की बिजाई के सीजन में तावडू क्षेत्र में डीएपी खाद की कमी और कालाबाजारी को लेकर किसानों की परेशानी बढ़ती जा रही है। किसानों का आरोप है कि सरकारी खाद बिक्री केंद्रों और गोदामों पर समय पर डीएपी उपलब्ध नहीं हो रही है। इसके चलते उन्हें निजी विक्रेताओं से महंगे दामों पर खाद खरीदने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। कुछ स्थानों पर डीएपी के लिए 1800 रुपये तक वसूलने की शिकायतें सामने आ रही हैं।
किसानों ने बताया कि सरसों की बिजाई के लिए इस समय डीएपी की सबसे अधिक आवश्यकता है। लेकिन सरकारी केंद्रों पर पर्याप्त मात्रा में खाद नहीं मिलने से उन्हें घंटों भटकना पड़ रहा है। किसानों ने आरोप लगाया कि कुछ निजी विक्रेताओं ने खाद का स्टॉक जमा कर रखा है और अधिक कीमत वसूलकर किसानों की मजबूरी का फायदा उठा रहे हैं। किसानों का कहना है कि पहले ही डीजल, बीज, कीटनाशक और अन्य कृषि लागत बढ़ने से खेती महंगी हो चुकी है। ऐसे में खाद के लिए अतिरिक्त राशि चुकानी पड़ने से उन पर आर्थिक बोझ और बढ़ रहा है। समय पर डीएपी नहीं मिलने से सरसों की बिजाई प्रभावित होने की आशंका भी किसानों को सता रही है। पहले 50 किलो का डीएपी बैग 1350 रुपये में मिलता था, लेकिन अब दाम भी बढ़ा दिए गए हैं। किसानों ने जिला प्रशासन और कृषि विभाग से तावडू क्षेत्र के सरकारी व निजी खाद बिक्री केंद्रों का औचक निरीक्षण कराने की मांग की है। साथ ही खाद के स्टॉक, बिक्री मूल्य और किसानों को दिए जा रहे बिलों की जांच करने की मांग की है। किसानों का कहना है कि यदि कहीं जमाखोरी या निर्धारित मूल्य से अधिक वसूली की पुष्टि होती है तो संबंधित विक्रेताओं के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए।
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कोट
जिले में डीएपी खाद की कोई कमी नहीं है। सोमवार को भी उन्होंने निरीक्षण किया था। अगर इस तरह का कोई मामला सामने आता है तो विभाग को जानकारी दें, तुरंत कार्रवाई की जाएगी। -अजीत सिंह, एसडीओ, कृषि विभाग नूंह, अजीत सिंह का कहना है कि
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