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Palwal News: म्हारी छोरियां छोरों से कम हैं के, कुश्ती चैंपियनशिप के दूसरे दिन महिला पहलवानों ने दिखाया दम

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Mon, 26 May 2025 11:16 PM IST
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Are our girls any less than boys? Women wrestlers showed their strength on the second day of wrestling championship
कुल 10 भार वर्गों में से 7 में हरियाणा की महिला पहलवानों ने स्वर्ण पदक जीता
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संवाद न्यूज एजेंसी




पलवल। कुश्ती चैंपियनशिप के दूसरे दिन हरियाणा के पहलवानों ने विभिन्न भार वर्गों में अपना वर्चस्व दिखाया। इस दौरान कुल 10 भार वर्गों में से 7 में हरियाणा की महिला पहलवानों ने स्वर्ण पदक हासिल किया। महाराष्ट्र, राजस्थान और दिल्ली की टीम ने एक-एक गोल्ड मेडल पर कब्जा जमाया। 40 किलोग्राम वर्ग में हरियाणा की चेष्टा ने सोना जीता। 43 किलोग्राम में हरियाणा की रचना ने पहला स्थान हासिल किया, जबकि 46 किलोग्राम वर्ग में महाराष्ट्र की ऋतुजा ने जीत दर्ज की।
वहीं, 49 किलोग्राम में हरियाणा की अंजली ने स्वर्ण पदक अपने नाम किया और 53 किलोग्राम में हरियाणा की सारिका ने विजय प्राप्त की। 57 किलोग्राम वर्ग में दिल्ली की मोनी ने शानदार प्रदर्शन के साथ गोल्ड मेडल जीता। 61 किलोग्राम में हरियाणा की टीना पुनिया ने और 65 किलोग्राम में राजस्थान की अश्विनी विश्नोई ने पहला स्थान हासिल किया। 69 और 73 किलोग्राम वर्ग में हरियाणा की मनीषा और काजल ने गोल्ड मेडल हासिल किया।
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दांव पड़ा भारी, चीख से कांपा अखाड़ा

सचिन कुमार

पलवल। सोमवार को राष्ट्रीय कुश्ती चैंपियनशिप के दूसरे दिन एक मुकाबला ऐसा हुआ जिसने हर किसी को भावुक कर दिया। दिल्ली की भारती और महाराष्ट्र की प्रणाली आमने-सामने थीं। दूसरे हाफ में दोनों पहलवानों ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी। मैच खत्म होने में बस एक मिनट का समय बाकी था, दोनों पहलवान दमखम के साथ अखाड़े में भिड़ीं, लेकिन जैसे-जैसे वक्त खत्म होने को आया, मुकाबला और भी रोमांचक हो गया।

आखिरी मिनट में प्रणाली ने एक जबरदस्त दांव लगाया। भारती ने खुद को बचाने की कोशिश की, लेकिन इसी दौरान उनके कंधे में गहरी अंदरूनी चोट लग गई। भारती चीख उठीं। रेफरी ने तुरंत दोनों को अलग किया, लेकिन भारती मैट पर ही पड़ी रहीं। स्टेडियम में सन्नाटा छा गया। कोच बेचैन होकर दौड़े, मेडिकल टीम भी तुरंत पहुंची। दर्शकों और परिजनों की आंखों में चिंता थी। कुछ लोग रेफरी पर भड़क उठे, बोले ऐसे तो खिलाड़ी का हाथ-पैर ही टूट जाएगा। तीन मिनट तक स्टेडियम जैसे थम गया, फिर भारती की आंखें खुलीं। दर्द के बावजूद उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और मुकाबला खत्म किया। हालांकि, भारती यह मैच हार गईं, लेकिन उन्होंने जो हौसला दिखाया, वह दिल जीत लेने वाला था। खेल एक प्रतिस्पर्धा है, इसमें चोट लगना आम बात है, लेकिन जो खिलाड़ी हार कर भी खड़े हो जाएं, वही असली विजेता होते हैं।
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