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Palwal News: स्टीयरिंग संभाली, चप्पू थामा ...और जीत लिया एशियाड
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ब्रोंज मेडल के साथ सलमान और उसके साथी सतनाम सिंह।
एशियन गेम्स के रोइंग मेंस डबल स्कल्स में तावडू के सलमान ने सतनाम के साथ जीता कांस्य
2018 में सेना में हुए थे भर्ती, नायब सूबेदार के पद पर कर रहे देश की सेवा
संवाद न्यूज एजेंसी
तावडू। जापान में आयोजित 20वें एशियन गेम्स की मेंस डबल स्कल्स रोइंग प्रतियोगिता में भारत को ब्रॉन्ज मेडल दिलाने में मूल रूप से उत्तर प्रदेश के अमेठी निवासी और बचपन से तावडू में रह रहे सलमान खान ने अहम भूमिका निभाई है। दोनों खिलाड़ियों ने 6 मिनट 13 सेकंड में रेस पूरी की। इस उपलब्धि के साथ सलमान ने संघर्ष से शिखर तक का सफर तय किया है।
कासिम खान के बेटे सलमान का जीवन चुनौतीपूर्ण रहा है। आर्थिक रूप से कमजोर परिवार से संबंध रखने वाले सलमान ने शुरुआती दौर में पैसे के लिए टैक्सी चलाई। उनकी लंबाई को देखते हुए लोगों ने सेना में जाने का सुझाव दिया। 2018 में वे सेना में भर्ती हो गए, जहां कोच ने उन्हें रोइंग के लिए चुना। फिलहाल वे नायब सूबेदार के पद पर देश की सेवा कर रहे हैं।
सलमान के पास रोइंग का कोई अनुभव नहीं था, लेकिन कोच की मदद और कड़ी मेहनत से वे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शानदार प्रदर्शन करते रहे। बीच में उन्होंने यह गेम छोड़ भी दिया था, लेकिन कोच ने उन पर भरोसा जताया और उन्हें फिर से खेल से जोड़ा, जिसके परिणामस्वरूप एशियन गेम्स के मेंस डबल स्कल्स में भारत को पहला मेडल मिला। सलमान ने कहा कि उनका प्रयास देश का नाम रोशन करना है और आगे भी देश को और अधिक पदक दिलाना है।
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2018 में सेना में हुए थे भर्ती, नायब सूबेदार के पद पर कर रहे देश की सेवा
संवाद न्यूज एजेंसी
तावडू। जापान में आयोजित 20वें एशियन गेम्स की मेंस डबल स्कल्स रोइंग प्रतियोगिता में भारत को ब्रॉन्ज मेडल दिलाने में मूल रूप से उत्तर प्रदेश के अमेठी निवासी और बचपन से तावडू में रह रहे सलमान खान ने अहम भूमिका निभाई है। दोनों खिलाड़ियों ने 6 मिनट 13 सेकंड में रेस पूरी की। इस उपलब्धि के साथ सलमान ने संघर्ष से शिखर तक का सफर तय किया है।
कासिम खान के बेटे सलमान का जीवन चुनौतीपूर्ण रहा है। आर्थिक रूप से कमजोर परिवार से संबंध रखने वाले सलमान ने शुरुआती दौर में पैसे के लिए टैक्सी चलाई। उनकी लंबाई को देखते हुए लोगों ने सेना में जाने का सुझाव दिया। 2018 में वे सेना में भर्ती हो गए, जहां कोच ने उन्हें रोइंग के लिए चुना। फिलहाल वे नायब सूबेदार के पद पर देश की सेवा कर रहे हैं।
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सलमान के पास रोइंग का कोई अनुभव नहीं था, लेकिन कोच की मदद और कड़ी मेहनत से वे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शानदार प्रदर्शन करते रहे। बीच में उन्होंने यह गेम छोड़ भी दिया था, लेकिन कोच ने उन पर भरोसा जताया और उन्हें फिर से खेल से जोड़ा, जिसके परिणामस्वरूप एशियन गेम्स के मेंस डबल स्कल्स में भारत को पहला मेडल मिला। सलमान ने कहा कि उनका प्रयास देश का नाम रोशन करना है और आगे भी देश को और अधिक पदक दिलाना है।
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