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एक वर्ष बाद भी डॉक्टर की बाट जोह रहा पशु अस्पताल
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पलवल। लालगढ़ गांव स्थित राजकीय पशु अस्पताल में पिछले साल नया भवन तो बना दिया गया, लेकिन एक वर्ष बाद भी डॉक्टर की नियुक्ति नहीं हुई है। लाखों रुपये का बजट खर्च कर बनाए गए अस्पताल का ग्रामीणों को लाभ नहीं मिल पा रहा है। इस संबंध में कई बार उच्चाधिकारियों से शिकायत भी की गई, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। ऐसे में लोगों को मजबूरन निजी डॉक्टरों से अपने पशुओं का उपचार कराना पड़ता है।
यह क्षेत्र दुग्ध उत्पादन का प्रमुख क्षेत्र माना जाता है। पशु पालन यहां के लोगों का मुख्य व्यवसाय है। प्रतिदिन यहां से दिल्ली व फरीदाबाद में दूध की सप्लाई की जाती है। बड़े गांव बड़ौली के साथ लगते लालगढ़ गांव की आबादी करीब चार हजार है। यहां के ज्यादातर लोग अपनी आजीविका के लिए दूध बेचने का काम करते हैं। हालांकि यहां पर कई सालों पहले पशु अस्पताल बनाया गया था, लेकिन डॉक्टर और स्टॉफ नहीं होने से वह जर्जर हो गया। ग्रामीणों ने सुधार की मांग उठाई, तो शासन ने पिछले साल नए भवन का निर्माण करवा दिया, लेकिन स्थिति यह है कि आज तक डॉक्टर की नियुक्ति नहीं की गई है। रखरखाव न होने से बड़ी-बड़ी झाड़ियां उग आई हैं और यहां असामाजिक तत्वों का जमावड़ा लगा रहता है। चारदीवारी न होने से यहां पशु विचरण करते रहते हैं।
वर्जन-
गांव में अस्पताल का भवन तो बना दिया गया है, लेकिन डॉक्टर नहीं हैं। ऐसे में पशुओं को उपचार के लिए निजी डॉक्टरों के पास या बड़ौली ले जाना पड़ता है। जिसमें काफी खर्च आता है। - हरिपाल, ग्रामीण
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पशु अस्पताल में डॉक्टर की नियुक्ति को लेकर कई बार सरपंच व अधिकारियों से शिकायत की गई है, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही है। समय से उपचार के अभाव में कई बार पशुओं की मौत भी हो जाती है। - तिलक राज, ग्रामीण
कई बार संबंधित विभाग में लिखित शिकायत भेजकर डॉक्टर की नियुक्ति की मांग की गई है, लेकिन अधिकारी स्टाफ कम होने की बात कहते हैं। सरकार को पलवल में अधिक डॉक्टरों की नियुक्ति करनी चाहिए, ताकि लोगों को लाभ मिल सके। - दिनेश, सरंपच लालगढ़
स्टाफ की कमी होने के कारण डॉक्टरों को अतिरिक्त चार्ज दिया गया है। फिलहाल डॉक्टर फील्ड के काम में व्यस्त हैं। लालगढ़ अस्पताल में डॉक्टर की स्थायी नियुक्ति के लिए प्रयास किया जा रहा है, जल्द ही वहां डॉक्टर भेज दिया जाएगा। - डॉ. नीलम आर्या, उपनिदेशक, पशु पालन एवं डेयरी विभाग
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यह क्षेत्र दुग्ध उत्पादन का प्रमुख क्षेत्र माना जाता है। पशु पालन यहां के लोगों का मुख्य व्यवसाय है। प्रतिदिन यहां से दिल्ली व फरीदाबाद में दूध की सप्लाई की जाती है। बड़े गांव बड़ौली के साथ लगते लालगढ़ गांव की आबादी करीब चार हजार है। यहां के ज्यादातर लोग अपनी आजीविका के लिए दूध बेचने का काम करते हैं। हालांकि यहां पर कई सालों पहले पशु अस्पताल बनाया गया था, लेकिन डॉक्टर और स्टॉफ नहीं होने से वह जर्जर हो गया। ग्रामीणों ने सुधार की मांग उठाई, तो शासन ने पिछले साल नए भवन का निर्माण करवा दिया, लेकिन स्थिति यह है कि आज तक डॉक्टर की नियुक्ति नहीं की गई है। रखरखाव न होने से बड़ी-बड़ी झाड़ियां उग आई हैं और यहां असामाजिक तत्वों का जमावड़ा लगा रहता है। चारदीवारी न होने से यहां पशु विचरण करते रहते हैं।
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गांव में अस्पताल का भवन तो बना दिया गया है, लेकिन डॉक्टर नहीं हैं। ऐसे में पशुओं को उपचार के लिए निजी डॉक्टरों के पास या बड़ौली ले जाना पड़ता है। जिसमें काफी खर्च आता है। - हरिपाल, ग्रामीण
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पशु अस्पताल में डॉक्टर की नियुक्ति को लेकर कई बार सरपंच व अधिकारियों से शिकायत की गई है, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही है। समय से उपचार के अभाव में कई बार पशुओं की मौत भी हो जाती है। - तिलक राज, ग्रामीण
कई बार संबंधित विभाग में लिखित शिकायत भेजकर डॉक्टर की नियुक्ति की मांग की गई है, लेकिन अधिकारी स्टाफ कम होने की बात कहते हैं। सरकार को पलवल में अधिक डॉक्टरों की नियुक्ति करनी चाहिए, ताकि लोगों को लाभ मिल सके। - दिनेश, सरंपच लालगढ़
स्टाफ की कमी होने के कारण डॉक्टरों को अतिरिक्त चार्ज दिया गया है। फिलहाल डॉक्टर फील्ड के काम में व्यस्त हैं। लालगढ़ अस्पताल में डॉक्टर की स्थायी नियुक्ति के लिए प्रयास किया जा रहा है, जल्द ही वहां डॉक्टर भेज दिया जाएगा। - डॉ. नीलम आर्या, उपनिदेशक, पशु पालन एवं डेयरी विभाग