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आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने विधायक के निवास का किया घेराव
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पलवल। 11 दिन से हड़ताल कर रही आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने शनिवार को विधायक दीपक मंगला के निवास का घेराव धरना दिया। कार्यकर्ता शहर के बीचों बीच से जुलूस निकालते हुए विधायक के निवास पर पहुंची। जहां उन्होंने नारेबाजी करते हुए धरना दिया। इस अवसर पर विधायक मंगला को मांगों को ज्ञापन सौंपा। करीब एक घंटे तक कार्यकर्ता विधायक के निवास पर नारेबाजी करती रहीं। विधायक ने कार्यकर्ताओं ने ज्ञापन लेकर मुख्यमंत्री तक उनकी मांगों को पहुंचाने का आश्वासन दिया। इस दौरान पुलिस बल तैनात रहा। धरना-प्रदर्शन की अध्यक्षता उर्मिला रावत व रामरति दलाल ने की, जबकि संचालन जिला सचिव कृष्णा देवी ने किया।
दरअसल, बीती आठ दिसंबर से पलवल की आंगनबाड़ी कार्यकर्ता हड़ताल पर हैं। 11 दिनों से कार्यकर्ता अलग-अलग गतिविधियों के माध्यम से सरकार तक अपनी बात पहुंचाने का प्रयास कर रही हैं। कार्यकर्ता निरंतर लघु सचिवालय पर धरना प्रदर्शन कर रही हैं। बृहस्पतिवार को कार्यकर्ताओं ने राष्ट्रीय राजमार्ग पर बस स्टैंड तक जुलूस निकाला था। शनिवार सुबह हजारों आंगनबाड़ी कार्यकर्ता ताऊ देवीलाल टाउन पार्क पर एकत्रित हुईं। पार्क में सभा करने के बाद कार्यकर्ता विधायक के निवास का घेराव करने के लिए रवाना हुई। कार्यकर्ताओं ने देवीलाल पार्क से जुलूस की शुरूआत की। जुलूस आगरा चौक, सोहना मोड़, मीनार गेट व कमेटी चौक होते हुए विधायक मंगला के निवास पर पहुंचा। जहां कार्यकर्ताओं ने जमकर नारेबाजी करते हुए धरना शुरू कर दिया।
लंबे समय से संघर्ष कर रही हैं कार्यकर्ता
सीटू के जिला प्रधान श्रीपाल सिंह भाटी ने कहा कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ता पिछले लंबे समय से अपनी मांगों को पूरा कराने के लिए संघर्ष कर रही है। उसके बाद सरकार इनकी मांगों को पूरा नहीं कर रही हैं। वर्ष 2018 में कार्यकर्ताओं ने लंबे समय तक हड़ताल की थी, जिसकी बाद मुख्यमंत्री ने मांगों को पूरा करने का आश्वासन दिया था, परंतु आज तक मांगों का संज्ञान तक नहीं लिया है। बार-बार ज्ञापन सौंपने के बाद मांगों को पूरा नहीं किया जा रहा है। प्रदेश सरकार केवल कर्मचारियों का शोषण कर रही है। धरने को किसान नेता सोहनपाल चौहान, बीधू सिह, दरियाब सिंह, रामरति दलाल, उर्मिला रावत, कमला देवी, राजवती, ओमवती व विमलेश सहित अन्य ने संबोधित किया।
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ये हैं आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की प्रमुख मांगे
जिला प्रधान उर्मिला रावत ने अपनी मांगों के बारे में बताते हुए कहा कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को सरकारी कर्मचारी का दर्जा दिया जाए, जब तक कर्मचारी नहीं बनाया जाता तब तक न्यूनतम वेतन 24 हजार रुपये लागू किया जाए। 2018 में की गई घोषणाओं को लागू करते हुए महंगाई भत्ते की तमाम किस्त मानदेय में जोड़कर दी जाए। महंगाई भत्ते का बकाया एरियर भी तुरंत दिया जाए। हेल्पर के पदनाम को बदला जाए। विभाग द्वारा बिना फोन व अन्य संसाधन दिए वर्कर्स पर ऑनलाइन काम का दबाव बनाना बंद किया जाए। कार्यकर्ता को पांच लाख व सहायक को तीन लाख रुपये सेवानिवृत्ति लाभ दिया जाए। पेंशन लागू की जाए। कार्यकर्ता से सुपरवाइजर के रूप में 50 प्रतिशत की पदोन्न्ति को तुरंत लागू किया जाए। केंद्रों का बढ़ा किराया दिया जाएगा।
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दरअसल, बीती आठ दिसंबर से पलवल की आंगनबाड़ी कार्यकर्ता हड़ताल पर हैं। 11 दिनों से कार्यकर्ता अलग-अलग गतिविधियों के माध्यम से सरकार तक अपनी बात पहुंचाने का प्रयास कर रही हैं। कार्यकर्ता निरंतर लघु सचिवालय पर धरना प्रदर्शन कर रही हैं। बृहस्पतिवार को कार्यकर्ताओं ने राष्ट्रीय राजमार्ग पर बस स्टैंड तक जुलूस निकाला था। शनिवार सुबह हजारों आंगनबाड़ी कार्यकर्ता ताऊ देवीलाल टाउन पार्क पर एकत्रित हुईं। पार्क में सभा करने के बाद कार्यकर्ता विधायक के निवास का घेराव करने के लिए रवाना हुई। कार्यकर्ताओं ने देवीलाल पार्क से जुलूस की शुरूआत की। जुलूस आगरा चौक, सोहना मोड़, मीनार गेट व कमेटी चौक होते हुए विधायक मंगला के निवास पर पहुंचा। जहां कार्यकर्ताओं ने जमकर नारेबाजी करते हुए धरना शुरू कर दिया।
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लंबे समय से संघर्ष कर रही हैं कार्यकर्ता
सीटू के जिला प्रधान श्रीपाल सिंह भाटी ने कहा कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ता पिछले लंबे समय से अपनी मांगों को पूरा कराने के लिए संघर्ष कर रही है। उसके बाद सरकार इनकी मांगों को पूरा नहीं कर रही हैं। वर्ष 2018 में कार्यकर्ताओं ने लंबे समय तक हड़ताल की थी, जिसकी बाद मुख्यमंत्री ने मांगों को पूरा करने का आश्वासन दिया था, परंतु आज तक मांगों का संज्ञान तक नहीं लिया है। बार-बार ज्ञापन सौंपने के बाद मांगों को पूरा नहीं किया जा रहा है। प्रदेश सरकार केवल कर्मचारियों का शोषण कर रही है। धरने को किसान नेता सोहनपाल चौहान, बीधू सिह, दरियाब सिंह, रामरति दलाल, उर्मिला रावत, कमला देवी, राजवती, ओमवती व विमलेश सहित अन्य ने संबोधित किया।
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ये हैं आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की प्रमुख मांगे
जिला प्रधान उर्मिला रावत ने अपनी मांगों के बारे में बताते हुए कहा कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को सरकारी कर्मचारी का दर्जा दिया जाए, जब तक कर्मचारी नहीं बनाया जाता तब तक न्यूनतम वेतन 24 हजार रुपये लागू किया जाए। 2018 में की गई घोषणाओं को लागू करते हुए महंगाई भत्ते की तमाम किस्त मानदेय में जोड़कर दी जाए। महंगाई भत्ते का बकाया एरियर भी तुरंत दिया जाए। हेल्पर के पदनाम को बदला जाए। विभाग द्वारा बिना फोन व अन्य संसाधन दिए वर्कर्स पर ऑनलाइन काम का दबाव बनाना बंद किया जाए। कार्यकर्ता को पांच लाख व सहायक को तीन लाख रुपये सेवानिवृत्ति लाभ दिया जाए। पेंशन लागू की जाए। कार्यकर्ता से सुपरवाइजर के रूप में 50 प्रतिशत की पदोन्न्ति को तुरंत लागू किया जाए। केंद्रों का बढ़ा किराया दिया जाएगा।