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गलघोटू बीमारी से लोग घबराए नहीं: सिविल सर्जन
Updated Mon, 08 Oct 2018 10:56 PM IST
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गलघोटू बीमारी से लोग घबराए नहीं: सिविल सर्जन
पलवल। जिला सिविल सर्जन डॉ. प्रदीप शर्मा ने सोमवार को अपने कार्यालय में एक पत्रकार वार्ता में कहा कि गलघोटू बीमारी बढ़ रही है लेकिन इससे लोग घबराए नहीं। शुरू में ही ध्यान देते हुए तुरंत डॉक्टर के पास जाकर इलाज कराएं। अगर किसी बच्चे को जुखाम, गले में सूजन, बुखार आदि लक्षण दिखाई दें तो, तुरंत चिकित्सक के पास जाएं। सिविल सर्जन डॉ. प्रदीप शर्मा ने गलघोटू की बीमारी के लक्षण और रोकथाम से मीडिया के माध्यम से लोगों को अवगत कराया और बताया कि 7 वर्ष तक के बच्चों को डीपीटी वैक्सीन व 7 से 12 वर्ष तक के बच्चों को डीटी वैक्सीन दी जाती है। सिविल सर्जन ने बताया कि निमोनिया से बचने के लिए भी हरियाणा सरकार इसी महीने में नीमोकॉक्कल वैक्सीन लांच करने जा रही है, जिससे कि निमोनिया से होने वाली मृत्यु दर पर काबू पा लिया जाएगा। हथीन के गुलेसरा गांव में व हसनपुर के नगला खानपुर में सोमवार को टीकाकरण कैंप लगाया गया। इसमें बच्चों को डीपीटी और डीटी वैक्सीन लगाई गयी। सिविल सर्जन ने बताया कि बच्चों में अगर बुखार, जुकाम, गला खराब जैसी समस्याएं नजर आएं तो रोग निरोधक के रूप में चिकित्सक की देखरेख में उनको दवाएं व सीरप दे सकते हैं।
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पलवल। जिला सिविल सर्जन डॉ. प्रदीप शर्मा ने सोमवार को अपने कार्यालय में एक पत्रकार वार्ता में कहा कि गलघोटू बीमारी बढ़ रही है लेकिन इससे लोग घबराए नहीं। शुरू में ही ध्यान देते हुए तुरंत डॉक्टर के पास जाकर इलाज कराएं। अगर किसी बच्चे को जुखाम, गले में सूजन, बुखार आदि लक्षण दिखाई दें तो, तुरंत चिकित्सक के पास जाएं। सिविल सर्जन डॉ. प्रदीप शर्मा ने गलघोटू की बीमारी के लक्षण और रोकथाम से मीडिया के माध्यम से लोगों को अवगत कराया और बताया कि 7 वर्ष तक के बच्चों को डीपीटी वैक्सीन व 7 से 12 वर्ष तक के बच्चों को डीटी वैक्सीन दी जाती है। सिविल सर्जन ने बताया कि निमोनिया से बचने के लिए भी हरियाणा सरकार इसी महीने में नीमोकॉक्कल वैक्सीन लांच करने जा रही है, जिससे कि निमोनिया से होने वाली मृत्यु दर पर काबू पा लिया जाएगा। हथीन के गुलेसरा गांव में व हसनपुर के नगला खानपुर में सोमवार को टीकाकरण कैंप लगाया गया। इसमें बच्चों को डीपीटी और डीटी वैक्सीन लगाई गयी। सिविल सर्जन ने बताया कि बच्चों में अगर बुखार, जुकाम, गला खराब जैसी समस्याएं नजर आएं तो रोग निरोधक के रूप में चिकित्सक की देखरेख में उनको दवाएं व सीरप दे सकते हैं।