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छांयसा और चिल्ली गांव में बुखार के नए 40 मरीज मिले
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चिल्ली में बुखार के मरीज दवा लेते हुए
- फोटो : Palwal
हथीन। बुखार प्रभावित छांयसा और चिल्ली गांवों में रविवार को स्वास्थ्य विभाग की टीमों को 40 बुखार के नए मरीज मिले हैं। छांयसा में 31 एवं चिल्ली में 9 नए मरीजों की पुष्टि हुई है। प्रवर चिकित्सा अधिकारी विजय कुमार ने बताया कि दोनों गांवों में ओपीडी सेवाएं जारी हैं। छांयसा में सोमवार से इंडोर मरीजों को भर्ती करने की सेवाएं भी शुरू की जाएंगी। इसके लिए भवन का चयन किया गया है। गांव स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के नए भवन के रास्ते में अभी भी पानी भरा है। इस कारण अस्थायी व्यवस्था की गई है। गांव में घर-घर सर्वेक्षण का काम भी शुरू कर दिया गया है। गांव में मच्छर नाशक दवाई का छिड़काव भी किया जा रहा है। नालियों में भी दवाई डाली जा रही है। फॉगिंग भी शुरू की गई है। गांव में पिछले एक पखवाड़े में सात मौतें हुई हैं। उधर, गांव चिल्ली में भी ओपीडी सेवाएं जारी हैं। रविवार को भी थर्मल स्क्रीनिंग का काम जारी रहा है।
गांव के निवर्तमान सरपंच नरेश कुमार ने ग्रामीणों से अपील की है कि वे टीकाकरण के प्रति उत्साह दिखाएं। उन्होंने गांव में स्थायी उप स्वास्थ्य केंद्र निर्माण की मांग की है। गांव में बुखार से 11 मौतें हो चुकी हैं। सीएमओ ब्रह्मदीप सिंधु ने लोगों को कहा है कि वे भयभीत न हों। स्वास्थ्य विभाग लोगों के घर तक स्वास्थ्य सेवाएं देगा। उन्होंने कहा कि मौसमी वायरल बुखार से बचाव हेतु पर्याप्त मात्रा में दवाइयां उपलब्ध हैं। छांयसा गांव में अभी भी भारी संख्या में बुखार के मरीज हैं। स्वास्थ्य विभाग उन्हीं रोगियों के आंकड़े बता रहा है, जोकि उनके पास इलाज के लिए पहुंच रहे हैं। जबकि वास्तविकता तो यह है कि भारी संख्या में मरीज अभी भी निजी अस्पतालों में इलाज करा रहे हैं। लोगों की मांग है कि गांव के लिए जिन दो मेडिकल अफसरों की नियुक्ति कागजों में है, उनको तत्काल गांव में तैनात किया जाए।
तीन दिन हो गए हैं पर बच्चों को नहीं मिल रहा आराम...
यहां पर तीन दिन हो गए हैं पर मेरे बच्चों को कोई आराम नहीं मिल रहा है। लगता है और लोगों की तरह मुझे भी कहीं निजी अस्पताल में बच्चों का उपचार करवाना पड़ेगा। यह कहना था जिला नागरिक अस्पताल के बच्चा वार्ड में बुखार से ग्रस्त दो मासूमों का इलाज कराने के लिए तीन दिन से रुके चिल्ली गांव निवासी मोहम्मद राशिद का। राशिद ने बताया कि गांव में उसके दो जुड़वां बच्चों को बुखार आ गया था। ज्यादा तबियत खराब होने के बाद जिला नागरिक अस्पताल में भर्ती कराया, लेकिन यहां ठीक से इलाज नहीं मिल रहा है। अब उनकी तबियत पहले से भी ज्यादा खराब होती जा रही है। अब तो बच्चों को उल्टियां भी हो रही हैं। अस्पताल में ठीक से देखरेख नहीं होती। यही कारण है कि यहां बच्चों का इलाज कराने के लिए आए लोग दूसरे दिन ही निजी अस्पतालों में भाग जाते हैं।
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मोहम्मद राशिद की बात में सच्चाई भी नजर आती है, क्योंकि जिले में शायद ही ऐसा कोई नर्सिंग होम या निजी अस्पताल होगा जहां बुखार के मरीज न हो। बच्चों के डॉक्टरों के यहां तो इतना बुरा हाल है कि वहां बिस्तर ही उपलब्ध नहीं हैं। बच्चों में बुखार अधिक फैलने के बावजूद जिला नागरिक अस्पताल का बच्चा वार्ड पूरी तरह से खाली सा पड़ा है। जिला नागरिक अस्पताल में रविवार को केवल 10 बच्चे बुखार से ग्रस्त भर्ती थे। जबकि, इनमें भी करीब चार बच्चे चिल्ली गांव के मरीजों के लिए विशेष रूप से तैयार किए गए वार्ड में भर्ती हैं। सरकारी अस्पताल में मरीजों को बेहतर सुविधाएं नहीं मिलने के कारण निजी अस्पतालों में मरीजों की संख्या अधिक है। हालांकि, अस्पताल में ही अपने बच्चे का इलाज करा रहीं असलीमा का कहना है कि तीन दिन बाद मेरे बच्चे को कुछ आराम हुआ है। वैसे अस्पताल में स्वास्थ्य कर्मियों की लापरवाही ज्यादा है।
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गांव के निवर्तमान सरपंच नरेश कुमार ने ग्रामीणों से अपील की है कि वे टीकाकरण के प्रति उत्साह दिखाएं। उन्होंने गांव में स्थायी उप स्वास्थ्य केंद्र निर्माण की मांग की है। गांव में बुखार से 11 मौतें हो चुकी हैं। सीएमओ ब्रह्मदीप सिंधु ने लोगों को कहा है कि वे भयभीत न हों। स्वास्थ्य विभाग लोगों के घर तक स्वास्थ्य सेवाएं देगा। उन्होंने कहा कि मौसमी वायरल बुखार से बचाव हेतु पर्याप्त मात्रा में दवाइयां उपलब्ध हैं। छांयसा गांव में अभी भी भारी संख्या में बुखार के मरीज हैं। स्वास्थ्य विभाग उन्हीं रोगियों के आंकड़े बता रहा है, जोकि उनके पास इलाज के लिए पहुंच रहे हैं। जबकि वास्तविकता तो यह है कि भारी संख्या में मरीज अभी भी निजी अस्पतालों में इलाज करा रहे हैं। लोगों की मांग है कि गांव के लिए जिन दो मेडिकल अफसरों की नियुक्ति कागजों में है, उनको तत्काल गांव में तैनात किया जाए।
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तीन दिन हो गए हैं पर बच्चों को नहीं मिल रहा आराम...
यहां पर तीन दिन हो गए हैं पर मेरे बच्चों को कोई आराम नहीं मिल रहा है। लगता है और लोगों की तरह मुझे भी कहीं निजी अस्पताल में बच्चों का उपचार करवाना पड़ेगा। यह कहना था जिला नागरिक अस्पताल के बच्चा वार्ड में बुखार से ग्रस्त दो मासूमों का इलाज कराने के लिए तीन दिन से रुके चिल्ली गांव निवासी मोहम्मद राशिद का। राशिद ने बताया कि गांव में उसके दो जुड़वां बच्चों को बुखार आ गया था। ज्यादा तबियत खराब होने के बाद जिला नागरिक अस्पताल में भर्ती कराया, लेकिन यहां ठीक से इलाज नहीं मिल रहा है। अब उनकी तबियत पहले से भी ज्यादा खराब होती जा रही है। अब तो बच्चों को उल्टियां भी हो रही हैं। अस्पताल में ठीक से देखरेख नहीं होती। यही कारण है कि यहां बच्चों का इलाज कराने के लिए आए लोग दूसरे दिन ही निजी अस्पतालों में भाग जाते हैं।
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मोहम्मद राशिद की बात में सच्चाई भी नजर आती है, क्योंकि जिले में शायद ही ऐसा कोई नर्सिंग होम या निजी अस्पताल होगा जहां बुखार के मरीज न हो। बच्चों के डॉक्टरों के यहां तो इतना बुरा हाल है कि वहां बिस्तर ही उपलब्ध नहीं हैं। बच्चों में बुखार अधिक फैलने के बावजूद जिला नागरिक अस्पताल का बच्चा वार्ड पूरी तरह से खाली सा पड़ा है। जिला नागरिक अस्पताल में रविवार को केवल 10 बच्चे बुखार से ग्रस्त भर्ती थे। जबकि, इनमें भी करीब चार बच्चे चिल्ली गांव के मरीजों के लिए विशेष रूप से तैयार किए गए वार्ड में भर्ती हैं। सरकारी अस्पताल में मरीजों को बेहतर सुविधाएं नहीं मिलने के कारण निजी अस्पतालों में मरीजों की संख्या अधिक है। हालांकि, अस्पताल में ही अपने बच्चे का इलाज करा रहीं असलीमा का कहना है कि तीन दिन बाद मेरे बच्चे को कुछ आराम हुआ है। वैसे अस्पताल में स्वास्थ्य कर्मियों की लापरवाही ज्यादा है।