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Palwal News: 1,456 नए शिक्षकों से बदलेगी मेवात की तस्वीर
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2,194 पदों की भारी कमी के बीच शिक्षा व्यवस्था को मिली बड़ी राहत
दिनेश देशवाल
नूंह। वर्षों से शिक्षकों की भारी कमी से जूझ रहे नूंह जिले की प्राथमिक शिक्षा व्यवस्था के लिए आखिरकार राहत की बड़ी खबर आई है। हरियाणा राज्य कर्मचारी चयन आयोग की ओर से बृहस्पतिवार को प्राइमरी टीचर (मेवात कैडर) के 1456 पदों का अंतिम परिणाम घोषित किए जाने के बाद जिले के सरकारी स्कूलों में शिक्षा व्यवस्था में सुधार की नई उम्मीद जगी है। लंबे समय से हजारों पद खाली होने के कारण जहां एक-एक शिक्षक कई कक्षाओं का जिम्मा संभालने को मजबूर थे, वहीं अब नए शिक्षकों की नियुक्ति से सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले 1.38 लाख से अधिक बच्चों को बेहतर शैक्षणिक माहौल मिलने की संभावना बढ़ गई है।
नूंह जिले में प्राथमिक शिक्षा की स्थिति लंबे समय से चिंताजनक बनी हुई है। जिले में प्राइमरी टीचरों के कुल 3,898 स्वीकृत पद हैं, लेकिन इनमें से केवल 991 नियमित शिक्षक ही कार्यरत हैं। इनके अलावा 713 गेस्ट टीचर और 407 शिक्षा सहायक स्कूलों में सेवाएं दे रहे हैं। इसके बावजूद जिले में 2,194 पद अब भी खाली पड़े हैं। यही कारण है कि सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की भारी कमी का सीधा असर बच्चों की पढ़ाई पर पड़ रहा है।
30 विद्यार्थियों पर एक शिक्षक होना अनिवार्य
जिले में कुल 504 प्राथमिक विद्यालय संचालित हैं, जिनमें 1,38,026 विद्यार्थी शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। शिक्षा का अधिकार (आरटीई) कानून के अनुसार प्राथमिक स्तर पर 30 विद्यार्थियों पर एक शिक्षक होना अनिवार्य है, लेकिन नूंह में यह अनुपात 75 विद्यार्थियों पर एक शिक्षक से भी अधिक पहुंच चुका है। विशेषज्ञों का मानना है कि इतने अधिक छात्र-शिक्षक अनुपात में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देना किसी भी शिक्षक के लिए बेहद कठिन हो जाता है।
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स्थिति का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि जिले के कई स्कूल आज भी केवल एक शिक्षक के भरोसे चल रहे हैं। पुनहाना और नूंह खंड के 9-9 स्कूल, तावडू के 12, फिरोजपुर झिरका के 20 और नगीना के 18 प्राथमिक विद्यालय ऐसे हैं जहां पूरे स्कूल की जिम्मेदारी केवल एक शिक्षक के कंधों पर है। ऐसे स्कूलों में एक ही शिक्षक को अलग-अलग कक्षाओं के बच्चों को पढ़ाने के साथ-साथ प्रशासनिक कार्य भी संभालने पड़ते हैं।
यहां एक भी पद भरा नहीं
अधिक चिंताजनक स्थिति उन स्कूलों की है जहां एक भी नियमित प्राइमरी शिक्षक उपलब्ध नहीं है। आंकड़ों के अनुसार पुनहाना के 2, नूंह के 5, तावडू के 1, फिरोजपुर झिरका के 7 और नगीना के 7 प्राथमिक विद्यालय ऐसे हैं, जहां प्राइमरी शिक्षक का एक भी पद भरा नहीं है। इन विद्यालयों में या तो गेस्ट टीचरों के भरोसे पढ़ाई चल रही है या फिर वैकल्पिक व्यवस्था से काम चलाया जा रहा है।
सेवानिवृत्त जिला शिक्षा अधिकारी डॉ. दिनेश शास्त्री, रिटायर्ड हेड टीचर हसमत अली, मास्टर सुभाष चंद खेड़ला, मास्टर सतबीर आदि का कहना है कि मेवात जैसे शैक्षिक रूप से पिछड़े क्षेत्र में शिक्षकों की उपलब्धता सबसे महत्वपूर्ण आवश्यकता है। लगातार खाली पड़े पदों के कारण बच्चों की बुनियादी शिक्षा प्रभावित हो रही थी।
कोट
बिना शिक्षकों के निपुण योजना को धरातल पर उतारने में काफी मुश्किल आ रही थी। नए अध्यापक आएंगे तो निश्चित तौर पर जिले की शिक्षा व्यवस्था में एक बड़ा बदलाव साबित होगा और प्रत्येक बच्चे बुनियादी साक्षरता संख्या ज्ञान में निपुण बना पाएंगे।
कुसुम मलिक, जिला एफएलएन कॉर्डिनेटर।
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दिनेश देशवाल
नूंह। वर्षों से शिक्षकों की भारी कमी से जूझ रहे नूंह जिले की प्राथमिक शिक्षा व्यवस्था के लिए आखिरकार राहत की बड़ी खबर आई है। हरियाणा राज्य कर्मचारी चयन आयोग की ओर से बृहस्पतिवार को प्राइमरी टीचर (मेवात कैडर) के 1456 पदों का अंतिम परिणाम घोषित किए जाने के बाद जिले के सरकारी स्कूलों में शिक्षा व्यवस्था में सुधार की नई उम्मीद जगी है। लंबे समय से हजारों पद खाली होने के कारण जहां एक-एक शिक्षक कई कक्षाओं का जिम्मा संभालने को मजबूर थे, वहीं अब नए शिक्षकों की नियुक्ति से सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले 1.38 लाख से अधिक बच्चों को बेहतर शैक्षणिक माहौल मिलने की संभावना बढ़ गई है।
नूंह जिले में प्राथमिक शिक्षा की स्थिति लंबे समय से चिंताजनक बनी हुई है। जिले में प्राइमरी टीचरों के कुल 3,898 स्वीकृत पद हैं, लेकिन इनमें से केवल 991 नियमित शिक्षक ही कार्यरत हैं। इनके अलावा 713 गेस्ट टीचर और 407 शिक्षा सहायक स्कूलों में सेवाएं दे रहे हैं। इसके बावजूद जिले में 2,194 पद अब भी खाली पड़े हैं। यही कारण है कि सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की भारी कमी का सीधा असर बच्चों की पढ़ाई पर पड़ रहा है।
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30 विद्यार्थियों पर एक शिक्षक होना अनिवार्य
जिले में कुल 504 प्राथमिक विद्यालय संचालित हैं, जिनमें 1,38,026 विद्यार्थी शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। शिक्षा का अधिकार (आरटीई) कानून के अनुसार प्राथमिक स्तर पर 30 विद्यार्थियों पर एक शिक्षक होना अनिवार्य है, लेकिन नूंह में यह अनुपात 75 विद्यार्थियों पर एक शिक्षक से भी अधिक पहुंच चुका है। विशेषज्ञों का मानना है कि इतने अधिक छात्र-शिक्षक अनुपात में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देना किसी भी शिक्षक के लिए बेहद कठिन हो जाता है।
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स्थिति का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि जिले के कई स्कूल आज भी केवल एक शिक्षक के भरोसे चल रहे हैं। पुनहाना और नूंह खंड के 9-9 स्कूल, तावडू के 12, फिरोजपुर झिरका के 20 और नगीना के 18 प्राथमिक विद्यालय ऐसे हैं जहां पूरे स्कूल की जिम्मेदारी केवल एक शिक्षक के कंधों पर है। ऐसे स्कूलों में एक ही शिक्षक को अलग-अलग कक्षाओं के बच्चों को पढ़ाने के साथ-साथ प्रशासनिक कार्य भी संभालने पड़ते हैं।
यहां एक भी पद भरा नहीं
अधिक चिंताजनक स्थिति उन स्कूलों की है जहां एक भी नियमित प्राइमरी शिक्षक उपलब्ध नहीं है। आंकड़ों के अनुसार पुनहाना के 2, नूंह के 5, तावडू के 1, फिरोजपुर झिरका के 7 और नगीना के 7 प्राथमिक विद्यालय ऐसे हैं, जहां प्राइमरी शिक्षक का एक भी पद भरा नहीं है। इन विद्यालयों में या तो गेस्ट टीचरों के भरोसे पढ़ाई चल रही है या फिर वैकल्पिक व्यवस्था से काम चलाया जा रहा है।
सेवानिवृत्त जिला शिक्षा अधिकारी डॉ. दिनेश शास्त्री, रिटायर्ड हेड टीचर हसमत अली, मास्टर सुभाष चंद खेड़ला, मास्टर सतबीर आदि का कहना है कि मेवात जैसे शैक्षिक रूप से पिछड़े क्षेत्र में शिक्षकों की उपलब्धता सबसे महत्वपूर्ण आवश्यकता है। लगातार खाली पड़े पदों के कारण बच्चों की बुनियादी शिक्षा प्रभावित हो रही थी।
कोट
बिना शिक्षकों के निपुण योजना को धरातल पर उतारने में काफी मुश्किल आ रही थी। नए अध्यापक आएंगे तो निश्चित तौर पर जिले की शिक्षा व्यवस्था में एक बड़ा बदलाव साबित होगा और प्रत्येक बच्चे बुनियादी साक्षरता संख्या ज्ञान में निपुण बना पाएंगे।
कुसुम मलिक, जिला एफएलएन कॉर्डिनेटर।