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-स्वच्छता के नारे हुए फेल, दिवाली पर भी शहर में लगे रहे गंदगी के ढेर
Updated Thu, 08 Nov 2018 10:36 PM IST
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स्वच्छता के नारे फेल, शहर में लगे गंदगी के ढेर
- हर महीने 35 लाख खर्च होने के बावजूद सफाई नदारद
अमर उजाला ब्यूरो
पलवल। अरे दिवाली पर तो सफाई ठीक से कर दो। लाला जी, सरकार समय पर पैसा नहीं देती, जितना पैसा मिलता है, उतनी सफाई कर दी। यह कहना है कि शहर के अंदर नगर परिषद द्वारा लगाए गए सफाई कर्मचारियों का। हाल तो यह है कि शहर में सफाई होती ही नहीं है। यदि खानापूर्ति के लिए सफाई कर्मचारी आते भी हैं तो वे लोगों से इस तरह की भाषा बोल कर चले जाते हैं। दिवाली पर जहां हर जगह लोग अपने आसपास के क्षेत्रों में सफाई करते दिखे वहीं जिले की कई मुख्य सड़कों पर स्वच्छता के नारे पूरी तरह से फेल नजर आए। पूरा शहर गंदगी से अटा पड़ा रहा, लेकिन न तो यह नगर परिषद अधिकारियों को दिखाई दिया और न ही प्रशासन को। लोग दिवाली पर भी शहर में जगह-जगह पड़े गंदगी के ढेरों के पास से मुंह पर कपड़ा लपेट कर निकलते रहे। शहर में सफाई व्यवस्था का यह हाल तो तब है, जब नगर परिषद द्वारा हर महीने शहर की सफाई के लिए 26 लाख रुपये तथा अब नगर परिषद में शामिल किए गए गांवों में सफाई व्यवस्था दुरुस्त कराने के लिए 9 लाख रुपये का ठेका छोड़ा हुआ है। हर महीने 35 लाख रुपये खर्च करने के बाद भी शहर गंदगी के ढेर पर बसा हुआ है। दिवाली के दिन भी शहर में सफाई न होने पर विपक्षी राजनीतिक दलों के नेताओं ने ही नहीं, बल्कि भाजपा नेताओं व सत्ता पक्ष के पार्षदों ने भी इस बात पर बेहद रोष जताया है। पार्षद बबीता ठाकुर, समाजसेवी यूनुस अहमद, ललित मित्तल आदि का कहना है कि वे अब इस बारे में जल्द ही मुख्यमंत्री से मिलेंगे तथा इस बात का जवाब मांगेंगे कि आखिर सफाई के नाम पर हर महीने नगर परिषद खाते से दिया जाने वाला 35 लाख रुपये कहां जा रहा है। उन्होंने कहा कि गंदगी के फोटो भी मुख्यमंत्री को दिखाए जाएंगे।
शहर में रोज सफाई होती है। दिवाली से एक दिन पहले भी सफाई कराई गई, लेकिन लोग घरों का कूड़ा सफाई होते ही बाहर सड़कों पर डाल देते हैं। अब ऐसे लोगों की पहचान कर कार्रवाई की जाएगी। - इंदू भारद्वाज, नगर परिषद की अध्यक्ष
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- हर महीने 35 लाख खर्च होने के बावजूद सफाई नदारद
अमर उजाला ब्यूरो
पलवल। अरे दिवाली पर तो सफाई ठीक से कर दो। लाला जी, सरकार समय पर पैसा नहीं देती, जितना पैसा मिलता है, उतनी सफाई कर दी। यह कहना है कि शहर के अंदर नगर परिषद द्वारा लगाए गए सफाई कर्मचारियों का। हाल तो यह है कि शहर में सफाई होती ही नहीं है। यदि खानापूर्ति के लिए सफाई कर्मचारी आते भी हैं तो वे लोगों से इस तरह की भाषा बोल कर चले जाते हैं। दिवाली पर जहां हर जगह लोग अपने आसपास के क्षेत्रों में सफाई करते दिखे वहीं जिले की कई मुख्य सड़कों पर स्वच्छता के नारे पूरी तरह से फेल नजर आए। पूरा शहर गंदगी से अटा पड़ा रहा, लेकिन न तो यह नगर परिषद अधिकारियों को दिखाई दिया और न ही प्रशासन को। लोग दिवाली पर भी शहर में जगह-जगह पड़े गंदगी के ढेरों के पास से मुंह पर कपड़ा लपेट कर निकलते रहे। शहर में सफाई व्यवस्था का यह हाल तो तब है, जब नगर परिषद द्वारा हर महीने शहर की सफाई के लिए 26 लाख रुपये तथा अब नगर परिषद में शामिल किए गए गांवों में सफाई व्यवस्था दुरुस्त कराने के लिए 9 लाख रुपये का ठेका छोड़ा हुआ है। हर महीने 35 लाख रुपये खर्च करने के बाद भी शहर गंदगी के ढेर पर बसा हुआ है। दिवाली के दिन भी शहर में सफाई न होने पर विपक्षी राजनीतिक दलों के नेताओं ने ही नहीं, बल्कि भाजपा नेताओं व सत्ता पक्ष के पार्षदों ने भी इस बात पर बेहद रोष जताया है। पार्षद बबीता ठाकुर, समाजसेवी यूनुस अहमद, ललित मित्तल आदि का कहना है कि वे अब इस बारे में जल्द ही मुख्यमंत्री से मिलेंगे तथा इस बात का जवाब मांगेंगे कि आखिर सफाई के नाम पर हर महीने नगर परिषद खाते से दिया जाने वाला 35 लाख रुपये कहां जा रहा है। उन्होंने कहा कि गंदगी के फोटो भी मुख्यमंत्री को दिखाए जाएंगे।
शहर में रोज सफाई होती है। दिवाली से एक दिन पहले भी सफाई कराई गई, लेकिन लोग घरों का कूड़ा सफाई होते ही बाहर सड़कों पर डाल देते हैं। अब ऐसे लोगों की पहचान कर कार्रवाई की जाएगी। - इंदू भारद्वाज, नगर परिषद की अध्यक्ष
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