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Palwal News: 11.50 करोड़ की योजना तैयार, स्कूलों में बनेंगी लैब और लाइब्रेरी
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मेवात विकास अभिकरण ने तैयार की योजना, बजट मिलते ही काम शुरू होने की उम्मीद
1 हजार रुपये आईटीआई छात्राओं को हर महीने मिलेंगे
दिनेश देशवाल
नूंह। जिले की बदहाल शिक्षा व्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए मेवात विकास अभिकरण (एमडीए) ने करीब 11.50 करोड़ रुपये की व्यापक योजना तैयार की है। योजना में स्कूलों की बुनियादी सुविधाओं में सुधार से लेकर बच्चों को बेहतर शैक्षणिक अवसर उपलब्ध कराने, ड्रॉपआउट रोकने, तकनीकी शिक्षा को बढ़ावा देने और गांव स्तर पर लाइब्रेरी विकसित करने तक कई महत्वपूर्ण पहल शामिल की गई हैं। डीपीआर तैयार होने के बाद सैद्धांतिक मंजूरी और बजट मिलते ही इन पर काम शुरू होने की उम्मीद है।
नूंह जिले में शिक्षा व्यवस्था के सामने शिक्षकों की कमी के साथ-साथ स्कूलों की खराब इमारतें और पर्याप्त सुविधाओं का अभाव बड़ी चुनौती है। जिले के करीब 901 सरकारी स्कूलों में लगभग 450 स्कूल जर्जर अवस्था में बताए जा रहे हैं। इसके अलावा कई गांवों में प्राइमरी के बाद आगे की पढ़ाई की सुविधा नहीं होने के कारण विद्यार्थियों को दूसरे गांवों में जाना पड़ता है। परिवहन और अन्य परेशानियों के चलते कई बच्चे बीच में ही पढ़ाई छोड़ देते हैं। ऐसे में एमडीए की प्रस्तावित योजना को शिक्षा व्यवस्था में सुधार की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।
तकनीक, इंजीनियरिंग में बढ़ेगी रुचि
योजना के तहत जिले के 20 सरकारी स्कूलों में स्टेम लैब (साइंस-टेक्नॉलोजी-इंजीनियरिंग-मैथ्स की लैब) स्थापित की जाएंगी। इनका उद्देश्य विद्यार्थियों में विज्ञान, तकनीक, इंजीनियरिंग और गणित के प्रति रुचि बढ़ाना है। इसके अलावा सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों के लिए ड्यूल डेस्क उपलब्ध कराए जाएंगे, जिससे स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं को बेहतर किया जा सके। योजना में गांव स्तर पर 10 नई लाइब्रेरी स्थापित करने का प्रावधान किया गया है। वहीं, पहले से संचालित 15 लाइब्रेरियों सहित कुल 25 लाइब्रेरियों में फर्नीचर और अन्य जरूरी सामान उपलब्ध कराया जाएगा। इससे ग्रामीण क्षेत्र के विद्यार्थियों को अपने गांव में ही पढ़ाई और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए बेहतर माहौल मिल सकेगा।
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ड्रॉपआउट रोकने पर भी रहेगा जोर
बच्चों का स्कूल छोड़ना रोकने के लिए सरकारी स्कूलों और ग्राम पंचायतों को प्रोत्साहित करने की योजना भी बनाई गई है। इसके साथ ही विद्यार्थियों को ऐतिहासिक और शैक्षणिक महत्व के स्थानों का भ्रमण कराने, छात्रवृत्ति और निशुल्क कोचिंग की व्यवस्था को विस्तार देने का भी प्रस्ताव है। अधिकारियों का मानना है कि इन गतिविधियों से विद्यार्थियों में पढ़ाई के प्रति रुचि बढ़ेगी और उन्हें प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए बेहतर अवसर मिलेंगे। जिले की बेटियों को तकनीकी शिक्षा की ओर आकर्षित करने के लिए आईटीआई में पढ़ने वाली छात्राओं को एक हजार रुपये प्रतिमाह वित्तीय प्रोत्साहन देने का निर्णय लिया गया है। इससे आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की छात्राओं को तकनीकी शिक्षा जारी रखने में मदद मिलने की उम्मीद है।
इसके अलावा अनुसूचित जाति बहुल गांवों के सरकारी स्कूलों में सोलर एनर्जी सिस्टम सहित अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए अलग से 1.50 करोड़ रुपये खर्च करने की योजना है। इससे इन स्कूलों में बिजली और अन्य आधारभूत सुविधाओं को मजबूत किया जाएगा।
कोट
योजनाओं की स्वीकृति एमडीए की बैठक में मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी से मिल चुकी है। डीपीआर तैयार होने और बजट मिलने के बाद कार्य शुरू किया जाएगा। योजनाएं जमीन पर उतरने के बाद जिले की शिक्षा व्यवस्था में व्यापक बदलाव देखने को मिलेगा। -अखिल पिलानी, उपायुक्त, नूंह
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1 हजार रुपये आईटीआई छात्राओं को हर महीने मिलेंगे
दिनेश देशवाल
नूंह। जिले की बदहाल शिक्षा व्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए मेवात विकास अभिकरण (एमडीए) ने करीब 11.50 करोड़ रुपये की व्यापक योजना तैयार की है। योजना में स्कूलों की बुनियादी सुविधाओं में सुधार से लेकर बच्चों को बेहतर शैक्षणिक अवसर उपलब्ध कराने, ड्रॉपआउट रोकने, तकनीकी शिक्षा को बढ़ावा देने और गांव स्तर पर लाइब्रेरी विकसित करने तक कई महत्वपूर्ण पहल शामिल की गई हैं। डीपीआर तैयार होने के बाद सैद्धांतिक मंजूरी और बजट मिलते ही इन पर काम शुरू होने की उम्मीद है।
नूंह जिले में शिक्षा व्यवस्था के सामने शिक्षकों की कमी के साथ-साथ स्कूलों की खराब इमारतें और पर्याप्त सुविधाओं का अभाव बड़ी चुनौती है। जिले के करीब 901 सरकारी स्कूलों में लगभग 450 स्कूल जर्जर अवस्था में बताए जा रहे हैं। इसके अलावा कई गांवों में प्राइमरी के बाद आगे की पढ़ाई की सुविधा नहीं होने के कारण विद्यार्थियों को दूसरे गांवों में जाना पड़ता है। परिवहन और अन्य परेशानियों के चलते कई बच्चे बीच में ही पढ़ाई छोड़ देते हैं। ऐसे में एमडीए की प्रस्तावित योजना को शिक्षा व्यवस्था में सुधार की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।
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तकनीक, इंजीनियरिंग में बढ़ेगी रुचि
योजना के तहत जिले के 20 सरकारी स्कूलों में स्टेम लैब (साइंस-टेक्नॉलोजी-इंजीनियरिंग-मैथ्स की लैब) स्थापित की जाएंगी। इनका उद्देश्य विद्यार्थियों में विज्ञान, तकनीक, इंजीनियरिंग और गणित के प्रति रुचि बढ़ाना है। इसके अलावा सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों के लिए ड्यूल डेस्क उपलब्ध कराए जाएंगे, जिससे स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं को बेहतर किया जा सके। योजना में गांव स्तर पर 10 नई लाइब्रेरी स्थापित करने का प्रावधान किया गया है। वहीं, पहले से संचालित 15 लाइब्रेरियों सहित कुल 25 लाइब्रेरियों में फर्नीचर और अन्य जरूरी सामान उपलब्ध कराया जाएगा। इससे ग्रामीण क्षेत्र के विद्यार्थियों को अपने गांव में ही पढ़ाई और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए बेहतर माहौल मिल सकेगा।
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ड्रॉपआउट रोकने पर भी रहेगा जोर
बच्चों का स्कूल छोड़ना रोकने के लिए सरकारी स्कूलों और ग्राम पंचायतों को प्रोत्साहित करने की योजना भी बनाई गई है। इसके साथ ही विद्यार्थियों को ऐतिहासिक और शैक्षणिक महत्व के स्थानों का भ्रमण कराने, छात्रवृत्ति और निशुल्क कोचिंग की व्यवस्था को विस्तार देने का भी प्रस्ताव है। अधिकारियों का मानना है कि इन गतिविधियों से विद्यार्थियों में पढ़ाई के प्रति रुचि बढ़ेगी और उन्हें प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए बेहतर अवसर मिलेंगे। जिले की बेटियों को तकनीकी शिक्षा की ओर आकर्षित करने के लिए आईटीआई में पढ़ने वाली छात्राओं को एक हजार रुपये प्रतिमाह वित्तीय प्रोत्साहन देने का निर्णय लिया गया है। इससे आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की छात्राओं को तकनीकी शिक्षा जारी रखने में मदद मिलने की उम्मीद है।
इसके अलावा अनुसूचित जाति बहुल गांवों के सरकारी स्कूलों में सोलर एनर्जी सिस्टम सहित अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए अलग से 1.50 करोड़ रुपये खर्च करने की योजना है। इससे इन स्कूलों में बिजली और अन्य आधारभूत सुविधाओं को मजबूत किया जाएगा।
कोट
योजनाओं की स्वीकृति एमडीए की बैठक में मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी से मिल चुकी है। डीपीआर तैयार होने और बजट मिलने के बाद कार्य शुरू किया जाएगा। योजनाएं जमीन पर उतरने के बाद जिले की शिक्षा व्यवस्था में व्यापक बदलाव देखने को मिलेगा। -अखिल पिलानी, उपायुक्त, नूंह