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पानीपत रिफाइनरी पर 659.49 करोड़ का जुर्माना लगाने की तैयारी में है एनजीटी

Wed, 27 Nov 2019 06:24 AM IST
दुष्यंत शर्मा माई सिटी रिपोर्टर, पानीपत
माई सिटी रिपोर्टर, पानीपत Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Wed, 27 Nov 2019 06:24 AM IST
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NGT set to impose fine of 659.49 crore on Panipat refinery
NGT - फोटो : PTI

नेशनल ग्रीन ट्रिब्युनल (एनजीटी) ने अनुमति दे दी तो इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन लिमिटेड (आईओसीएल) पानीपत को 659.49 करोड़ रुपये का जुर्माना भरना पड़ सकता है। जुर्माने की  इस राशि में पर्यावरण को पहुंचे नुकसान और जीर्णोद्धार की लागत दोनों को शामिल किया गया है। 

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पानीपत रिफाइनरी पर यह कार्रवाई अपनी ही इकाई के केमिकल युक्त पानी को बगैर शोधित किए जमीन के अंदर डालने पर की जाएगी। कमेटी ने माना है कि इकाई के आसपास के 70 वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल में भूजल भी दूषित हो चुका है, जिससे थर्मल क्षेत्र के गांव वासी गंभीर बीमारी की चपेट में आ गए हैं। 
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प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से नुकसान और जीर्णोद्धार की लागत की रिपोर्ट मंगलवार को एनजीटी में पेश कर दी है। अब इस पर फैसला आना बाकी है। इसके लिए एनजीटी ने अगले साल फरवरी की तय की है।
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एनजीटी ने अगस्त के महीने में पानीपत रिफायनरी की ओर से फैलाए गए प्रदूषण और उसकी क्षतिपूर्ति के लिए एसआईआर-एनईईआरआई) और सेंट्रल ग्रांउड वॉटर बोर्ड (सीजीडब्ल्यूबी) की संयुक्त टीम बनाई थी। जिसने रिफायनरी और आसपास के इलाकों में  प्रदूषण की जांच की थी। टीम ने विस्तार से जांच करके जुर्माना तथा जीर्णोद्धार के लिए आंकलन तैयार किया है। 

उसी के आधार पर की गई जांच में यह खुलासा हुआ है कि पानीपत रिफाइनरी में  केमिकल युक्त पानी को बगैर शोधित किए जमीन के अंदर डाला गया है।  जिसके कारण आसपास के 70 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र का भूजल दूषित हो चुका है। इतना ही नहीं आसपास आक्सीजन की कमी होने के कारण थर्मल क्षेत्र के गांव वासी गंभीर बीमारी की चपेट में आ गए हैं।  

इस रिपोर्ट को तैयार करने के लिए एक्सपर्ट की राय भी ली गई थी। एक्सर्ट और तीनों संस्थाओं से रिपोर्ट मिलने के बाद 20 सितंबर को बैठक हुई,  जिसमें उपायुक्त पानीपत ने एक्सपर्ट राय के लिए मैसर्स इंजीनियर्स इंडिया लिमिटेड को शामिल किया गया। एक्सपर्ट और कमेटी ने  20 नवंबर को एनजीटी को रिपोर्ट सौंप दी।  

ये है रिपोर्ट में
1. ऑक्सीजन में आई कमी एवं अवैध रूप से केमिकल युक्त पानी बहाने पर भूजल के दूषित होने पर क्षतिपूर्ति 26.90 करोड़ रुपये 
2. लोगों के स्वास्थ्य एवं पर्यावरण की क्षतिपूर्ति: 92.59 करोड़ रुपये 
3. भूजल को हुए नुकसान की क्षतिपूर्ति 540 करोड़ रुपये 
क्षतिपूर्ति की कुल राशि:  659.49 करोड़ रुपये

आईओसीएल की ओर से पहले 17.31 करोड़ रुपये का जुर्माना अदा किया जा चुका है। ऐसे में इस राशि को कम करने के बाद 642.18 करोड़ रुपये की क्षतिपूर्ति पानीपत रिफाइनरी पर बनी। 


सरपंच  ने रिफाइनरी के खिलाफ दायर की थी अपील 
थर्मल के पास रिफाइनरी से लगे गांव सिठाना, बोहली, ददलाना, रजापुर और महबूदुपर में प्रदूषण से दिक्कत थी। लोग बीमार हो रहे थे। लिवर और त्वचा संबंधी बीमारियों की चपेट में आ गए थे। जिस पर सिठाना गांव के सरपंच सतपाल सिंह ने वर्ष 2018 में एनजीटी में अपील की थी, इसके बाद एनजीटी ने जुर्माना लगाया था और आगे की जांच के लिए संयुक्त कमेटी का गठन किया था।

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