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हरियाणा: खर्च राशि का हिसाब देने में आनाकानी कर रहे कई विभाग, हरकत में आए वित्त सचिव

Tue, 19 Oct 2021 11:46 AM IST
प्रमोद कुमार यशपाल शर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़
यशपाल शर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: प्रमोद कुमार Updated Tue, 19 Oct 2021 11:46 AM IST
सार

हरियाणा के कई सरकारी विभाग योजनाओं पर खर्च की राशि का हिसाब-किताब नहीं दे रहे। गड़बड़ी की आशंका के बीच वित्त सचिव हरकत में आ गए हैं। उन्हें प्रधान महालेखाकार लेखा परीक्षा हरियाणा की ओर से पत्र लिखकर इस बाबत अवगत करवाया गया है। जिसके बाद उन्होंने खर्च राशि का हिसाब मांग लिया है।

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Many departments of Haryana are reluctant to give account of expenditure amount
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock

विस्तार

हरियाणा के सरकारी महकमे केंद्रीय योजनाओं को सिरे चढ़ाने पर खर्च हुई राशि का हिसाब-किताब नहीं दे रहे। नतीजन दो वित्तीय वर्ष के ऑडिट प्रमाण पत्र लंबित हैं। अंतत: प्रधान महालेखाकार लेखा परीक्षा हरियाणा को वित्त विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव को पत्र लिखना पड़ा है। उन्होंने वित्त वर्ष 2019-20, 20-21 में खर्च हुई राशि का पूरा लेखा-जोखा मांगा है। इसके बाद वित्त सचिव हरकत में आ गए हैं। अतिरिक्त मुख्य सचिव वित्त, टीवीएसएन प्रसाद ने सभी विभागाध्यक्षों को मांगी गई जानकारी प्राथमिकता के आधार पर सौंपने के निर्देश दिए हैं। सभी विभागों के अतिरिक्त मुख्य सचिवों, प्रधान सचिवों को प्रधान महालेखाकार के पत्र की प्रति भेजकर जरूरी कार्रवाई अमल में लाने को कहा गया है।
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जानकारी से वित्त विभाग की बजट एवं समन्वय शाखा और वित्त नियंत्रण शाखा के अधीक्षक को भी अवगत करवाना होगा। प्रधान महालेखाकार के पत्र की प्रकृति स्व व्याख्यात्मक है। पत्र में कहा गया है कि राज्य सरकार को केंद्रीय प्रायोजित योजनाओं, केंद्रीय क्षेत्र की योजनाओं और केंद्र-राज्य की साझा योजनाओं में अनुदान प्राप्त होता है। इनमें खर्च राशि का प्रमाण पत्र महालेखाकार लेखा परीक्षा को जारी करना है। बीते दो वित्तीय वर्ष में खर्च राशि का ब्योरा विभागों से जल्द दिलाएं।
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ये जानकारी मुहैया करानी होंगी
  • प्रदेश में संचालित तीनों तरह की योजनाओं की संख्या।
  • कितने खातों में राशि आई, उनके उप शीर्ष और शीर्ष। योजनाओं पर किस बैंक खाते से कितना खर्च हुआ, उसका विवरण।
  • केंद्र प्रायोजित योजनाओं, केंद्रीय क्षेत्र की योजनाओं और साझा योजनाओं पर कितना-कितना अनुदान दोनों वर्ष में केंद्र व प्रदेश सरकार ने स्वीकृत किया। स्वीकृति पत्र भी साथ में संलग्न करें।
  • राज्य भर में योजनाओं को क्रियान्वित करने वाली सभी क्रियान्वयन एजेंसियों का विवरण।
  • खर्च हो रही अनुदान राशि पर नियंत्रण व नजर रखने के लिए लागू किए गए प्रावधान का ब्योरा।

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राशि के दुरुपयोग की आशंका
प्रदेश में संचालित केंद्रीय व साझा परियोजनाओं में अनुदान राशि के दुरुपयोग की आशंका बनी रहती है। क्रियान्वयन एजेंसियां ठेकेदारों के कारण का अनेक बार सही मूल्यांकन नहीं करती। समय पर अनुदान उपयोगिता प्रमाण पत्र नहीं सौंपे जाते। कैग के ऑडिट में इसकी पोल पहले भी खुल चुकी है। 
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