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Mahendragarh-Narnaul News: पशुओं की एविल दवा के नशे में चूर हो रहा युवा
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नारनौल। नशे का खुमार युवाओं में इस कदर चढ़ रहा है कि अब वह पशुओं को दी जाने वाली एविल दवा को भी नहीं छोड़ रहे हैं। ऐसे युवाओं की संख्या एक-दो नहीं सैकड़ों में हो सकती है। नारनौल के नागरिक अस्पताल की बात करें तो 15 ऐसे युवा नारनौल अस्पताल पहुंचे जो पशुओं को लगने वाले एविल इंजेक्शन के शिकार हो गए हैं।
अक्सर दिल्ली, मुंबई जैसे बड़े शहरों में हेरोइन व स्मैक के मामले सुनने में आते थे, लेकिन अब नारनौल जैसे छोटे शहर में भी युवाओं को नशे ने अपनी चपेट में जकड़ लिया है। नशामुक्ति केंद्र के चिकित्सकों को कहना है कि युवा ज्यादा नशा करने के लिए पशुओं को लगने वाली एविल दवा में नशामुक्ति केंद्र की दवा मिलाकर इंजेक्शन लगा रहे हैं। एक साल में नारनौल के नागरिक अस्पताल में करीब 15 मामले सामने आ चुके हैं। नशा मुक्तिकेंद्र में यह युवा नशे की लत से छुटकारा पाने के लिए दवा लेने आते हैं, लेकिन इनमें ज्यादातर युवा इस दवा का गलत प्रयोग कर रहे हैं।
एन कोर्ड कमेटी की हर माह होती है बैठक
जिले में बढ़ते नशे के कारोबार पर अंकुश लगाने के लिए हर माह एन कोर्ड कमेटी की बैठक होती है। यह कमेटी नशे के बढ़ते मामलों पर अंकुश लगाने के लिए की जाती है, जिसमें नशा संबंधित मामलों को देखने वाले ज्यादातर अधिकारी उपस्थित रहते हैं। एन कोर्ड कमेटी की हर माह बैठक होती है।
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पशुओं को लगने वाले एविल इंजेक्शन में अस्पताल से दी जानी वाली दवा को मिलाकर लेने की बात सामने आ रही है। इससे नशा ज्यादा होता है, जो चिंताजनक है। नशे की दवा लेने वाले युवा अपने परिजनों को साथ लेकर आएं।
-डॉ. अनिल यादव, मनोरोग विशेषज्ञ नागरिक अस्पताल, नारनौल।
केस नंबर 1
मेरे मां को मत बताना, उसे सदमा लग जाएगा
नारनौल का एक युवक तीन दिन पहले नारनौल के नागरिक अस्पताल में दवा लेने के लिए आया। वह युवक पशुओं को लगने वाला एविल इंजेक्शन लगाने की लत का आदी हो चुका था, लेकिन अब वह नशे को छोड़ना चाहता था। जब चिकित्सक ने कहा कि अपने परिजन को बुलाओ। तब युवक कहने लगा कि उसकी मां को नहीं पता की वह इस तरह का नशा भी करता है। अगर उन्हें पता चल जाएगा तो वह सदमे में चली जाएगी।
केस नंबर 2
नशा छोड़ने की बात कहकर गया, नशा करने लगा
अटेली क्षेत्र का एक युवक नारनौल के नागरिक अस्पताल में नशा छोड़ने की बात कहकर उपचार लेने लग गया, लेकिन वह पशुओं को लगने वाला एविल इंजेक्शन में दवा मिलाकर ज्यादा नशा करने लग गया, जिसके बाद हालात बिगड़ने के बाद परिजन अस्पताल में लेकर आए हैं। परिजनों को इस बात का पता चला तो उनके पैरों तले की जमीन खिसक गई। अब दोबारा नए सिरे से उपचार चल रहा है।
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अक्सर दिल्ली, मुंबई जैसे बड़े शहरों में हेरोइन व स्मैक के मामले सुनने में आते थे, लेकिन अब नारनौल जैसे छोटे शहर में भी युवाओं को नशे ने अपनी चपेट में जकड़ लिया है। नशामुक्ति केंद्र के चिकित्सकों को कहना है कि युवा ज्यादा नशा करने के लिए पशुओं को लगने वाली एविल दवा में नशामुक्ति केंद्र की दवा मिलाकर इंजेक्शन लगा रहे हैं। एक साल में नारनौल के नागरिक अस्पताल में करीब 15 मामले सामने आ चुके हैं। नशा मुक्तिकेंद्र में यह युवा नशे की लत से छुटकारा पाने के लिए दवा लेने आते हैं, लेकिन इनमें ज्यादातर युवा इस दवा का गलत प्रयोग कर रहे हैं।
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एन कोर्ड कमेटी की हर माह होती है बैठक
जिले में बढ़ते नशे के कारोबार पर अंकुश लगाने के लिए हर माह एन कोर्ड कमेटी की बैठक होती है। यह कमेटी नशे के बढ़ते मामलों पर अंकुश लगाने के लिए की जाती है, जिसमें नशा संबंधित मामलों को देखने वाले ज्यादातर अधिकारी उपस्थित रहते हैं। एन कोर्ड कमेटी की हर माह बैठक होती है।
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पशुओं को लगने वाले एविल इंजेक्शन में अस्पताल से दी जानी वाली दवा को मिलाकर लेने की बात सामने आ रही है। इससे नशा ज्यादा होता है, जो चिंताजनक है। नशे की दवा लेने वाले युवा अपने परिजनों को साथ लेकर आएं।
-डॉ. अनिल यादव, मनोरोग विशेषज्ञ नागरिक अस्पताल, नारनौल।
केस नंबर 1
मेरे मां को मत बताना, उसे सदमा लग जाएगा
नारनौल का एक युवक तीन दिन पहले नारनौल के नागरिक अस्पताल में दवा लेने के लिए आया। वह युवक पशुओं को लगने वाला एविल इंजेक्शन लगाने की लत का आदी हो चुका था, लेकिन अब वह नशे को छोड़ना चाहता था। जब चिकित्सक ने कहा कि अपने परिजन को बुलाओ। तब युवक कहने लगा कि उसकी मां को नहीं पता की वह इस तरह का नशा भी करता है। अगर उन्हें पता चल जाएगा तो वह सदमे में चली जाएगी।
केस नंबर 2
नशा छोड़ने की बात कहकर गया, नशा करने लगा
अटेली क्षेत्र का एक युवक नारनौल के नागरिक अस्पताल में नशा छोड़ने की बात कहकर उपचार लेने लग गया, लेकिन वह पशुओं को लगने वाला एविल इंजेक्शन में दवा मिलाकर ज्यादा नशा करने लग गया, जिसके बाद हालात बिगड़ने के बाद परिजन अस्पताल में लेकर आए हैं। परिजनों को इस बात का पता चला तो उनके पैरों तले की जमीन खिसक गई। अब दोबारा नए सिरे से उपचार चल रहा है।