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प्रकृति की पूजा ही परमात्मा की पूजा : कुलदीप
Mon, 18 Aug 2025 12:37 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
Updated Mon, 18 Aug 2025 12:37 AM IST
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फोटो संख्या:64- गांव खायरा में श्रीमद्भागवत कथा के दौरान कथा सुनती महिलाएं--स्राेत- आयोजक
महेंद्रगढ़। गांव खायरा में चल रही सात दिवसीय श्रीमद्भागवत महापुराण कथा के पांचवें दिन श्रद्धालुओं को भगवान कृष्ण की बाल लीलाओं की कथा सुनाई गई। कथा व्यास कुलदीप भारद्वाज महाराज ने कहा कि प्रकृति की पूजा ही परमात्मा की पूजा होती है।
उन्होंने भगवान कृष्ण की बाल लीला का वर्णन किया। कथा के दौरान पूतना वध, सकटासुर, अघासुर, कालिया नाग का उद्धार, गोपियों का वस्त्र हरण, ब्रह्माजी का मान मर्दन एवं गोवर्धन नाथ की कथा सुनाई गई। विकास के नाम पर जो प्रकृति से छेड़छाड़ हो रही है वह वास्तव में विनाश है। नदियां, पौधे, पर्वत, प्रकृति संतुलन के लिए आवश्यक हैं इनका संरक्षण किया जाना चाहिए।
उन्होंने भगवान कृष्ण के गो प्रेम का सुंदर चित्रण कर गाय के दूध को अमृत के रूप में बताया। भगवान के प्रकृति प्रेम का सुंदर चित्रण करते हुए गिरीराज पूजन के महत्व को प्रतिपादित किया।
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उन्होंने कहा कि प्रकृति की पूजा ही परमात्मा की पूजा है। यदि किसी कार्य में सद्भावना जुड़ी हो तो वह कार्य ईश्वर की साक्षी पूजा है। किसी भूखे को भोजन कराना भी यज्ञ है। परमात्मा जब भक्त को याद करने लगे तो यह भक्त की भक्ति की पराकाष्ठा है।
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उन्होंने भगवान कृष्ण की बाल लीला का वर्णन किया। कथा के दौरान पूतना वध, सकटासुर, अघासुर, कालिया नाग का उद्धार, गोपियों का वस्त्र हरण, ब्रह्माजी का मान मर्दन एवं गोवर्धन नाथ की कथा सुनाई गई। विकास के नाम पर जो प्रकृति से छेड़छाड़ हो रही है वह वास्तव में विनाश है। नदियां, पौधे, पर्वत, प्रकृति संतुलन के लिए आवश्यक हैं इनका संरक्षण किया जाना चाहिए।
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उन्होंने भगवान कृष्ण के गो प्रेम का सुंदर चित्रण कर गाय के दूध को अमृत के रूप में बताया। भगवान के प्रकृति प्रेम का सुंदर चित्रण करते हुए गिरीराज पूजन के महत्व को प्रतिपादित किया।
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उन्होंने कहा कि प्रकृति की पूजा ही परमात्मा की पूजा है। यदि किसी कार्य में सद्भावना जुड़ी हो तो वह कार्य ईश्वर की साक्षी पूजा है। किसी भूखे को भोजन कराना भी यज्ञ है। परमात्मा जब भक्त को याद करने लगे तो यह भक्त की भक्ति की पराकाष्ठा है।