फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Mahendragarh/Narnaul News ›   Warmth in the weather, farmers' hopes are getting cold

Mahendragarh-Narnaul News: मौसम में गर्माहट, ठंडे हो रहे किसानों के अरमान

Sat, 02 Nov 2024 12:59 AM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल Updated Sat, 02 Nov 2024 12:59 AM IST
विज्ञापन
Warmth in the weather, farmers' hopes are getting cold
नारनौल।
विज्ञापन

क्षेत्र में किसानों द्वारा सरसों की बिजाई का कार्य किया जा रहा है, लेकिन मौसम में गर्माहट किसानों के लिए चिंता का विषय बनी हुई है।
क्षेत्र में खरीफ फसल में बाजरा और ग्वार तो वहीं रबी फसल में गेंहू और सरसों मुख्य तौर पर उगाई जाती है। सरसों और गेंहू की फसल के लिए सर्द मौसम अनुकूल रहता है, लेकिन नवंबर शुरू होने के बाद भी तापमान में गिरावट नहीं हो रही है। इस कारण जो किसान सरसों की बिजाई कर चुके हैं, उनकी फसल उग नहीं पाई है और अगर कुछ जगह फसल उग भी गई है तो गर्म मौसम के कारण रोग लगने से फसल खराब हो रही है।
क्षेत्र में सरसों की बिजाई के लिए सितंबर मध्य से अक्तूबर अंत तक का समय उपयुक्त माना जाता है। सरसों की फसल के लिए 25 से 30 डिग्री सेंटीग्रेड तापमान उपयुक्त रहता है। वहीं सरसों की बीजाई के समय दिन का तापमान 33 डिग्री सेल्सियस से ज्यादा नहीं होना चाहिए। इन दिनों दिन का तापमान 35 डिग्री के पास बना हुआ। इस कारण सरसों की फसल को विकास करने के लिए उपयुक्त मौसम नहीं मिल पा रहा है।
विज्ञापन


धोलिया रोग के लक्षण और बचाव:
धोलिया रोग सरसों की फसल में लगने वाला एक कीट है, इसे चितकबरा कीट भी कहा जाता है। शिशु और प्रौढ़ दोनों उम्र के किट पौधों से रस चूसकर नुकसान पहुंचाते हैं। कारणवश सरसों के पत्तों पर सफेद निशान हो जाते हैं और धीरे-धीरे सफेद रंग बढ़ने लगता है। धोलिया रोग से बचाव के लिए फसल बिजाई के समय 200 मिली लीटर और कटाई के समय 400 मिली लीटर मैलाथियान 50 ईसी को क्रमश: 200 और 400 लीटर पानी प्रति एकड़ में मिश्रित कर छिड़काव करना चाहिए।
विज्ञापन
विज्ञापन


फसल खराब होने के कारण किसानों को हो रहा आर्थिक नुकसान:
फसल खराब होने के कारण किसानों को आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ रहा है। क्योंकि सरसों की बीजाई में प्रति एकड़ करीब 10 हजार की लागत आती है। जिसमें बीजाई से पहले पलाव, ट्रैक्टर द्वारा बीजाई, बीज का खर्च इत्यादि शामिल है। फसल खराब होने के कारण किसानों को सरसों की फसल की बिजाई दोबारा करनी पड़ेगी, जल्द सर्दी का आगमन नहीं होता है तो संभावना है कि इस बार सरसों की पैदावार गत वर्ष की तुलना में कम रहे



अधिक तापमान के कारण सरसों के पौधे का पूर्ण विकास नहीं हो पा रहा। फसल के अनुकूल वातावरण नहीं मिलने के कारण फसल में धोलिया रोग लगने की संभावना बन जाती है। फसल को धोलिया रोग से बचाने के लिए मैलाथियान 50 ईसी का छिड़काव करना चाहिए। फसल की अच्छी पैदावार और पौधे के पूर्ण विकास से संबंधित अधिक जानकारी के लिए किसान नजदीकी कृषि कार्यालय में संपर्क कर सकते हैं।
डॉ. सतीश कुमार इंदौरा, तकनीकी सहायक, कृषि विभाग, नारनौल।

01जेएनडी12 : दीपावली पर चलते पटाखों से उठता धुआं। संवाद

01जेएनडी12 : दीपावली पर चलते पटाखों से उठता धुआं। संवाद

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed