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लावारिस पशुओं के आतंक से पैदल निकलना भी खतरे से खाली नहीं

Mon, 10 Feb 2020 11:42 PM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Mon, 10 Feb 2020 11:42 PM IST
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Walking through terror of unclaimed animals is also not free from danger
नेशनल हाईवे 148बी पर गुजरता गोवंश। - फोटो : Narnol
लावारिस पशुओं के आतंक के कारण बाजारों में निकलना पैदल निकलना भी मुश्किल है। यहां किस चौराहे पर कब लावारिस पशु सामने आ जाएगा कोई नहीं बता सकता। बाजार से लेकर लेकर नेशनल हाईवे तक पर लावारिस पशुुओं का जमावड़ा है। लावारिस गोवंश की टक्कर के कारण पिछले साल एक व्यक्ति की मौत भी हुई थी। लावारिस गोवंश के कारण दुर्घटना का अंदेशा बना रहता है।
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महेंद्रगढ़ शहर में कोई भी 100 मीटर का ऐसा रोड़ आपको नहीं मिलेगा जहां लावारिस पशु न हों। हर चौक पर लावारिस गोवंश घूमते मिलेंगे। रात के समय सड़कों पर इनकी संख्या अधिक हो जाती है। बाजार से लेकर गलियों तक हर जगह लावारिस गोवंश टहल रहे हैं। बस अड्डे से लेकर रेलवे स्टेशन परिसर के अंदर तक लावारिस पशु दिख जाएंगे। छोटी सड़कों से लेकर नेशनल हाईवे 148 बी तक हर जगह सड़क भले ही न दिखे गोवंश जरूर मिलेंगे।
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लावारिस पशु सड़क हादसों का कारण बन रहे हैं। पशुओं की भीड़ लोगों के लिए परेशानी का सबब बन रही है। लोगों के दुपहिया वाहनों को निकलने में दिक्कत आ रही है। सब्जी मंडी, मुख्य बाजारों में भी लावारिस गोवंश का जमावड़ा है। हाईवे और शहर की सड़कों पर आए दिन दुपहिया वाहन आवारा पशुओं से टकरा कर घायल हो जाते है। लावारिस गोवंश की संख्या भी दिन प्रतिदिन बढ़ती जा रही है। पिछले साल लावारिस गोवंश ने चाय की दुकान चलाने वाले भानाराम को उठाकर पटक दिया था। जिसमें भानाराम की मौत हो गई थी। एक अनुमान के अनुसार महेंद्रगढ़ शहर में 300 से अधिक लावारिस गोवंश घूम रहे हैं।
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छोटे बच्चों, महिलाओं, बुजुर्गों को ज्यादा परेशानी
लावारिस पशुओं से छोटे बच्चों, महिलाओं, बुजुर्गों को काफी परेशानी आ रही है। लावारिस गोवंश अक्सर आपस में सड़कों पर लड़ते रहते हैं। स्कूली बच्चों को सबसे अधिक खतरा रहता है। लावारिस पशु लड़ते हुए कई बार दुकानों के अंदर भी घुस जाते हैं। जिससे दुकानदारों को भी नुकसान होता है।
ढाई वर्ष पहले चलाया था अभियान
प्रदेश सरकार के आदेश पर नपा ने 2017 में लावारिस गोवंश को पकड़ने के लिए अभियान चलाया था। उस समय इस दौरान पालिका प्रशासन ने लावारिस गोवंश को पकड़ने के लिए लगभग डेढ़ लाख रुपये खर्च कर किए थे। पालिका ने टैग लगाकर शहर की तीन गोशालों में डाल दिया था। शहर में टैग लगे और बिना टैग के लावारिस गोवंश घूम रहे हैं।

पहले भी लावारिस गोवंशों को गोशालाओं में छोड़ा गया था। अब शीघ्र ही इनको गोशालाओं में छोड़ा जाएगा। किसी को भी किसी प्रकार की परेशानी नहीं रहने दी जाएगी। नगर पालिका में अधिकारी न होने के कारण दिक्कतें आ रही हैं। अधिकारी मिलते ही इस काम को पूरा कराएंगे।
- रीना बंटी, चेयरपर्सन, नगर पालिका महेंद्रगढ़
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