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दो आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को किया बर्खास्त
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मांगों को लेकर धरने पर बैठी आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिका। संवाद
- फोटो : Narnol
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महिला एवं बाल विकास विभाग जिला कार्यक्रम अधिकारी संगीता यादव ने शुक्रवार को दो आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को और बर्खास्त कर दिया है। इनमें शहर के वार्ड छह और आठ की आंगनबाड़ी कार्यकर्ता शामिल हैं। अब तक जिले में 29 आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को बर्खास्त किया जा चुका है। ये सभी जिला प्रधान, ब्लॉक प्रधान, सर्कल प्रधान हैं। सरकार की ओर से इन सभी को नोटिस जारी किया गया था, लेकिन इन्होंने उसका जवाब नहीं दिया। इस पर सरकार ने उनके खिलाफ एक्शन लिया है। बर्खास्तगी के बाद अब तक 200 से अधिक आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने दोबारा ज्वाइन कर लिया है। साथ ही उन्होंने एक साधारण कागज पर ड्यूटी ज्वाइन करने के लिए लिखकर भी दिया है।
बता दें कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ता एवं सहायिकाओं ने आठ दिसंबर 2021 को मांगों को लेकर आंदोलन शुरू किया था। 29 दिसंबर को आंगनबाड़ी कार्यकर्ता प्रतिनिधिमंडल की मुख्यमंत्री से बातचीत हुई थी। मुख्यमंत्री ने तीन-चार मांगों पर अपनी सहमति जता दी थी। उसके बाद भी आंगनबाड़ी कार्यकर्ता काम पर नहीं लौटीं। इस पर सरकार ने उनके खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी। विभाग के उच्च अधिकारियों की ओर से जिला प्रधान, ब्लॉक प्रधान, सर्कल प्रधान को नोटिस जारी करना शुरू कर दिया गया। उक्त कार्यकर्ताओं को कई बार नोटिस भी जारी किया गया था। केंद्र पर, घरों के बाहर आदि स्थानों पर नोटिस चस्पा किए गए। व्हाट्सएप ग्रुप पर भी डाले गए, पर उन्होंने नोटिस का जवाब नहीं दिया। इस वजह से सरकार ने उनको बर्खास्त कर दिया।
4434 गर्भवती महिलाओं को नहीं मिल रहा सरकारी योजनाओं का लाभ
सरकार की ओर से गर्भवती महिलाओं, स्तनपान करवाने वाली माताओं तथा बच्चों के लिए कई योजनाएं चलाई गईं। इन योजनाओं में आपकी बेटी-हमारी बेटी, प्रधानमंत्री मातृत्व योजना आदि भी शामिल हैं, लेकिन आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के हड़ताल पर जाने की वजह से 4434 गर्भवती महिलाओं को लाभ नहीं मिल पा रहा।
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तीन महीनों से 68785 बच्चों को नहीं मिला पोषाहार
बता दें कि महिला एवं बाल विकास विभाग की ओर से आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से गर्भवती महिलाओं और छह वर्ष तक के बच्चों को चावल, गेहूं, चीनी, चना, मुरमुरा, मूंगफली, सोयाबीन, चना दाल व भुना हुआ चना आदि पोषाहार के रूप में दिया जाता है, ताकि उनको कुपोषण का शिकार होने से बचाया जा सके। हड़ताल पर जाने से जिले के 0 से 5 वर्ष तक के 68785 बच्चों को पोषाहार नहीं मिल रहा। 0 से एक वर्ष के 6075, एक वर्ष से 3 वर्ष के 25510, 3 वर्ष से 5 वर्ष तक के 37200 बच्चे शामिल हैं। कार्यकर्ता और सहायिकाओं पर ही गर्भवती महिलाओं और छोटे बच्चों का समय-समय पर टीकाकरण करवाने की जिम्मेदारी होती है।
जिले में कुल आंगनबाड़ी केंद्र-1201
जिले में आंगनबाड़ी कार्यकर्ता - 1201
पद भरे हुए- 1128
बर्खास्त -29
गर्भवती महिलाएं - 4434
0 से एक वर्ष - 6075 बच्चे
01 वर्ष से 03 वर्ष तक - 25510 बच्चे
03 वर्ष से 05 वर्ष तक - 37200 बच्चे
कुल बच्चे- 68785 बच्चे।
सरकार के आदेश पर शुक्रवार को नारनौल के वार्ड नंबर 6 और 8 की आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को बर्खास्त किया गया है। 20 जनवरी से 7 मार्च तक 29 कार्यकर्ताओं को बर्खास्त किया जा चुका है। इनको कई बार नोटिस भी जारी किया गया था, जिनका इन्होंने एक बार भी जवाब नहीं दिया। 200 से अधिक आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने दोबारा ज्वाइन भी कर लिया है। -संगीता यादव, महिला एवं बाल विकास, जिला कार्यक्रम अधिकारी
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बता दें कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ता एवं सहायिकाओं ने आठ दिसंबर 2021 को मांगों को लेकर आंदोलन शुरू किया था। 29 दिसंबर को आंगनबाड़ी कार्यकर्ता प्रतिनिधिमंडल की मुख्यमंत्री से बातचीत हुई थी। मुख्यमंत्री ने तीन-चार मांगों पर अपनी सहमति जता दी थी। उसके बाद भी आंगनबाड़ी कार्यकर्ता काम पर नहीं लौटीं। इस पर सरकार ने उनके खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी। विभाग के उच्च अधिकारियों की ओर से जिला प्रधान, ब्लॉक प्रधान, सर्कल प्रधान को नोटिस जारी करना शुरू कर दिया गया। उक्त कार्यकर्ताओं को कई बार नोटिस भी जारी किया गया था। केंद्र पर, घरों के बाहर आदि स्थानों पर नोटिस चस्पा किए गए। व्हाट्सएप ग्रुप पर भी डाले गए, पर उन्होंने नोटिस का जवाब नहीं दिया। इस वजह से सरकार ने उनको बर्खास्त कर दिया।
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4434 गर्भवती महिलाओं को नहीं मिल रहा सरकारी योजनाओं का लाभ
सरकार की ओर से गर्भवती महिलाओं, स्तनपान करवाने वाली माताओं तथा बच्चों के लिए कई योजनाएं चलाई गईं। इन योजनाओं में आपकी बेटी-हमारी बेटी, प्रधानमंत्री मातृत्व योजना आदि भी शामिल हैं, लेकिन आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के हड़ताल पर जाने की वजह से 4434 गर्भवती महिलाओं को लाभ नहीं मिल पा रहा।
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तीन महीनों से 68785 बच्चों को नहीं मिला पोषाहार
बता दें कि महिला एवं बाल विकास विभाग की ओर से आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से गर्भवती महिलाओं और छह वर्ष तक के बच्चों को चावल, गेहूं, चीनी, चना, मुरमुरा, मूंगफली, सोयाबीन, चना दाल व भुना हुआ चना आदि पोषाहार के रूप में दिया जाता है, ताकि उनको कुपोषण का शिकार होने से बचाया जा सके। हड़ताल पर जाने से जिले के 0 से 5 वर्ष तक के 68785 बच्चों को पोषाहार नहीं मिल रहा। 0 से एक वर्ष के 6075, एक वर्ष से 3 वर्ष के 25510, 3 वर्ष से 5 वर्ष तक के 37200 बच्चे शामिल हैं। कार्यकर्ता और सहायिकाओं पर ही गर्भवती महिलाओं और छोटे बच्चों का समय-समय पर टीकाकरण करवाने की जिम्मेदारी होती है।
जिले में कुल आंगनबाड़ी केंद्र-1201
जिले में आंगनबाड़ी कार्यकर्ता - 1201
पद भरे हुए- 1128
बर्खास्त -29
गर्भवती महिलाएं - 4434
0 से एक वर्ष - 6075 बच्चे
01 वर्ष से 03 वर्ष तक - 25510 बच्चे
03 वर्ष से 05 वर्ष तक - 37200 बच्चे
कुल बच्चे- 68785 बच्चे।
सरकार के आदेश पर शुक्रवार को नारनौल के वार्ड नंबर 6 और 8 की आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को बर्खास्त किया गया है। 20 जनवरी से 7 मार्च तक 29 कार्यकर्ताओं को बर्खास्त किया जा चुका है। इनको कई बार नोटिस भी जारी किया गया था, जिनका इन्होंने एक बार भी जवाब नहीं दिया। 200 से अधिक आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने दोबारा ज्वाइन भी कर लिया है। -संगीता यादव, महिला एवं बाल विकास, जिला कार्यक्रम अधिकारी