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Mahendragarh-Narnaul News: देवउठनी एकादशी पर किया तुलसी पूजन
Sun, 02 Nov 2025 11:26 PM IST
नोएडा ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
Updated Sun, 02 Nov 2025 11:26 PM IST
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फोटो संख्या:51- श्री विष्णु मंदिर में तुलसी पूजन करती महिलाएं--स्रोत आयोजक
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महेंद्रगढ़। देवउठनी एकादशी पर शहर के रेलवे रोड स्थित श्री विष्णु भगवान के मंदिर में तुलसी पूजन किया गया। यहां पुजारी ने श्रद्धालु महिलाओं को एकादशी की कथा सुनाई।
एकादशी के दिन सुबह से ही मंदिर में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ने लगी। महिलाओं ने पारंपरिक वेशभूषा में पूजा की थाली लेकर मंदिर पहुंचीं और पूजा की। मंदिर प्रभारी शंकर ने बताया कि तुलसी माता की आराधना से कार्यक्रम की शुरुआत की गई। पहले मंदिर परिसर को रंगोली, दीपों और फूलों से सजाया गया और परिसर को दीप मालाओं से अलंकृत किया।
महिलाओं ने जल, रोली, चावल, फूल, दीपक और नैवेद्य अर्पित कर तुलसी माता की पूजा की। इसके बाद सभी ने सामूहिक रूप से तुलसी स्तुति का पाठ किया और भक्ति गीत गाए। तुलसी का भारतीय संस्कृति और जीवन में अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान है।
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देवउठनी एकादशी के दिन भगवान विष्णु चार महीने की योग निद्रा से जाग्रत होते हैं और सृष्टि में जीवन और ऊर्जा का संचार होता है। भगवान विष्णु की निद्रा समाप्त होने के बाद ही विवाह, यज्ञ और अन्य मांगलिक कार्यों की शुरुआत की जाती है।
इसलिए इस दिन तुलसी विवाह का कर शुभ कार्यों की शुरुआत की जाती है। कार्यक्रम के अंत में महिलाओं ने तुलसी माता को प्रसाद का भोग लगाया और एक-दूसरे को देवउठनी एकादशी की शुभकामनाएं दीं। कार्यक्रम के समापन पर सभी श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया गया।
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एकादशी के दिन सुबह से ही मंदिर में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ने लगी। महिलाओं ने पारंपरिक वेशभूषा में पूजा की थाली लेकर मंदिर पहुंचीं और पूजा की। मंदिर प्रभारी शंकर ने बताया कि तुलसी माता की आराधना से कार्यक्रम की शुरुआत की गई। पहले मंदिर परिसर को रंगोली, दीपों और फूलों से सजाया गया और परिसर को दीप मालाओं से अलंकृत किया।
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महिलाओं ने जल, रोली, चावल, फूल, दीपक और नैवेद्य अर्पित कर तुलसी माता की पूजा की। इसके बाद सभी ने सामूहिक रूप से तुलसी स्तुति का पाठ किया और भक्ति गीत गाए। तुलसी का भारतीय संस्कृति और जीवन में अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान है।
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देवउठनी एकादशी के दिन भगवान विष्णु चार महीने की योग निद्रा से जाग्रत होते हैं और सृष्टि में जीवन और ऊर्जा का संचार होता है। भगवान विष्णु की निद्रा समाप्त होने के बाद ही विवाह, यज्ञ और अन्य मांगलिक कार्यों की शुरुआत की जाती है।
इसलिए इस दिन तुलसी विवाह का कर शुभ कार्यों की शुरुआत की जाती है। कार्यक्रम के अंत में महिलाओं ने तुलसी माता को प्रसाद का भोग लगाया और एक-दूसरे को देवउठनी एकादशी की शुभकामनाएं दीं। कार्यक्रम के समापन पर सभी श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया गया।