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महेंद्रगढ़- रेवाड़ी के 50 किमी लंबे रेलवे ट्रैक के विद्युतीकरण का कार्य पूरा
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महेंद्रगढ़-रेवाड़ी के बीच तैयार विद्युत रेलवे ट्रैक का बुधवार को मुख्य संरक्षा आयुक्त (सीआरएस) निरीक्षण करेंगे। ट्रैक का रेवाड़ी से हनुमानगढ़ तक विद्युतीकरण किया जा रहा है। इसमें रेवाड़ी से महेंद्रगढ़ रेलवे स्टेशन तक विद्युतीकरण का काम लगभग पूरा हो चुका है। ट्रैक का विद्युतीकरण हो जाने पर निश्चित रूप से गाड़ियों की स्पीड बढ़ेगी। उम्मीद है जनवरी 2020 से महेंद्रगढ़ से रेवाड़ी के बीच बिजली वाली ट्रेनें दौड़ती नजर आएंगी।
केंद्र सरकार ने वर्ष 2018 के बजट में रेवाड़ी से हनुमानगढ़ वाया महेंद्रगढ़, सादुलपुर रेलवे लाइन का विद्युतीकरण करने की घोषणा को मंजूर करते हुए बजट जारी किया था। बजट में 320 किलोमीटर लंबी इस रेलवे लाइन पर 288.36 करोड़ रुपये खर्च किए जाने हैं। पिछले डेढ़ साल से इस विद्युतीकरण पर काम लगातार चल रहा है। रेवाड़ी से महेंद्रगढ़ तक का रेलवे ट्रैक का काम पूरा हो चुका है। बुधवार को मुख्य संरक्षा आयुक्त रेवाड़ी से महेंद्रगढ़ ट्रैक का स्पेशल ट्रेन के माध्यम से निरीक्षण करेंगे। सुबह 9.30 बजे रेवाड़ी से यह ट्रेन चलेगी और दोपहर एक बजे महेंद्रगढ़ पहुंचेगी। इस दौरान उनके साथ जयपुर एवं बीकानेर मंडल के अन्य अधिकारी उपस्थित रहेंगे। रेलवे अधिकारियों ने बताया कि केंद्र सरकार ने 2018-19 के आम बजट में रेवाड़ी एवं महेंद्रगढ़ को राजस्थान से जोड़ने वाले रेवाड़ी-सादलपुर-हनुमानगढ़ के इस ट्रैक का विद्युतीकरण करने की घोषणा की थी। 320 किलोमीटर दूरी के इस ट्रैक में 112 किलोमीटर हरियाणा की रेलवे लाइन शामिल है। इसके अतिरिक्त सादलपुर से रतनगढ़-बीकानेर-लालगढ़ के ट्रैक तथा रतनगढ़ एवं सरदार शहर के रेलवे ट्रैक का भी विद्युतीकरण किया जाना है। 286 किलोमीटर इस रेलवे ट्रैक पर 236.35 करोड़ रुपये की लागत आएगी।
यह होगा फायदा
डीजल इंजन से चलने वाले रेवाड़ी-बीकानेर रूट पर इलेक्ट्रिक इंजन की ट्रेनें चलेंगी। इस इंजन का सबसे बड़ा फायदा है कि इससे प्रदूषण नहीं होगा तथा ट्रेनों की रफ्तार भी बढ़ेगी। इस समय डीजल इंजन की अधिकतम स्पीड 120 किलोमीटर प्रति घंटा है, जबकि इलेक्ट्रिक इंजन की स्पीड 150 से 160 किलोमीटर प्रतिघंटा है। वर्तमान में महेंद्रगढ़ से बीकानेर में लगभग 8 घंटे का समय लगता है। इलेक्ट्रिक लाइन चालू होने के बाद यह दूरी सात घंटे में तय की जाएगी। यह ट्रैक दिल्ली-बीकानेर को जोड़ने वाला सबसे छोटा रास्ता है। इस रूट का विद्युतीकरण होने से ट्रेनों की संख्या में इजाफा होगा तथा लंबी दूरी की ट्रेनें भी इस ट्रैक पर चलेंगी।
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मॉडल रेलवे स्टेशन पर सुविधाओं का अभाव
महेंद्रगढ़ रेलवे स्टेशन के आदर्श स्टेशन होने के बावजूद अभी बहुत सी कमियां हैं। स्टेशन प्रांगण में शुल्क युक्त टॉयलेट एवं स्नानघर का अभाव है। यात्रियों की सुविधा के लिए स्टेशन पर लाइटिंग साइन बोर्ड कहीं नहीं लगा हुआ है। कोच गाइडेंस सिस्टम की सुविधा नहीं है। प्लेट फॉर्म नंबर- 2 पर टीनशेड नहीं है, जबकि प्लेट फॉर्म नंबर-1 पर टीनशेड छोटा है। स्टेशन का फर्श जगह-जगह से टूटा हुआ है। टीनशेड के नीचे ही कोटा स्टोन का फर्श लगा हुआ है, जबकि यह फर्श दोनों ओर पूरे प्लेटफॉर्म पर होना चाहिए। स्टेशन के पुल पर दिव्यांगों के चढ़ने के लिए कोई सुविधा नहीं हैं। प्लेटफॉर्म नंबर-2 पर शौचालय का भी अभाव है।
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केंद्र सरकार ने वर्ष 2018 के बजट में रेवाड़ी से हनुमानगढ़ वाया महेंद्रगढ़, सादुलपुर रेलवे लाइन का विद्युतीकरण करने की घोषणा को मंजूर करते हुए बजट जारी किया था। बजट में 320 किलोमीटर लंबी इस रेलवे लाइन पर 288.36 करोड़ रुपये खर्च किए जाने हैं। पिछले डेढ़ साल से इस विद्युतीकरण पर काम लगातार चल रहा है। रेवाड़ी से महेंद्रगढ़ तक का रेलवे ट्रैक का काम पूरा हो चुका है। बुधवार को मुख्य संरक्षा आयुक्त रेवाड़ी से महेंद्रगढ़ ट्रैक का स्पेशल ट्रेन के माध्यम से निरीक्षण करेंगे। सुबह 9.30 बजे रेवाड़ी से यह ट्रेन चलेगी और दोपहर एक बजे महेंद्रगढ़ पहुंचेगी। इस दौरान उनके साथ जयपुर एवं बीकानेर मंडल के अन्य अधिकारी उपस्थित रहेंगे। रेलवे अधिकारियों ने बताया कि केंद्र सरकार ने 2018-19 के आम बजट में रेवाड़ी एवं महेंद्रगढ़ को राजस्थान से जोड़ने वाले रेवाड़ी-सादलपुर-हनुमानगढ़ के इस ट्रैक का विद्युतीकरण करने की घोषणा की थी। 320 किलोमीटर दूरी के इस ट्रैक में 112 किलोमीटर हरियाणा की रेलवे लाइन शामिल है। इसके अतिरिक्त सादलपुर से रतनगढ़-बीकानेर-लालगढ़ के ट्रैक तथा रतनगढ़ एवं सरदार शहर के रेलवे ट्रैक का भी विद्युतीकरण किया जाना है। 286 किलोमीटर इस रेलवे ट्रैक पर 236.35 करोड़ रुपये की लागत आएगी।
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यह होगा फायदा
डीजल इंजन से चलने वाले रेवाड़ी-बीकानेर रूट पर इलेक्ट्रिक इंजन की ट्रेनें चलेंगी। इस इंजन का सबसे बड़ा फायदा है कि इससे प्रदूषण नहीं होगा तथा ट्रेनों की रफ्तार भी बढ़ेगी। इस समय डीजल इंजन की अधिकतम स्पीड 120 किलोमीटर प्रति घंटा है, जबकि इलेक्ट्रिक इंजन की स्पीड 150 से 160 किलोमीटर प्रतिघंटा है। वर्तमान में महेंद्रगढ़ से बीकानेर में लगभग 8 घंटे का समय लगता है। इलेक्ट्रिक लाइन चालू होने के बाद यह दूरी सात घंटे में तय की जाएगी। यह ट्रैक दिल्ली-बीकानेर को जोड़ने वाला सबसे छोटा रास्ता है। इस रूट का विद्युतीकरण होने से ट्रेनों की संख्या में इजाफा होगा तथा लंबी दूरी की ट्रेनें भी इस ट्रैक पर चलेंगी।
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मॉडल रेलवे स्टेशन पर सुविधाओं का अभाव
महेंद्रगढ़ रेलवे स्टेशन के आदर्श स्टेशन होने के बावजूद अभी बहुत सी कमियां हैं। स्टेशन प्रांगण में शुल्क युक्त टॉयलेट एवं स्नानघर का अभाव है। यात्रियों की सुविधा के लिए स्टेशन पर लाइटिंग साइन बोर्ड कहीं नहीं लगा हुआ है। कोच गाइडेंस सिस्टम की सुविधा नहीं है। प्लेट फॉर्म नंबर- 2 पर टीनशेड नहीं है, जबकि प्लेट फॉर्म नंबर-1 पर टीनशेड छोटा है। स्टेशन का फर्श जगह-जगह से टूटा हुआ है। टीनशेड के नीचे ही कोटा स्टोन का फर्श लगा हुआ है, जबकि यह फर्श दोनों ओर पूरे प्लेटफॉर्म पर होना चाहिए। स्टेशन के पुल पर दिव्यांगों के चढ़ने के लिए कोई सुविधा नहीं हैं। प्लेटफॉर्म नंबर-2 पर शौचालय का भी अभाव है।