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Mahendragarh-Narnaul News: बाघेश्वर धाम पर आज देशभर से 1200 से अधिक कांवड़िये करेंगे जलाभिषेक
Fri, 08 Mar 2024 12:19 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
Updated Fri, 08 Mar 2024 12:19 AM IST
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कनीना। महाशिवरात्रि पर्व को लेकर बाघेश्वर धाम बाघोत में धार्मिक मेले का आयोजन किया जाएगा। भगवान शिव की अराधना के लिए धार्मिक दृष्टि से विशेष माने जाने वाली महाशिवरात्रि पर्व पर देशभर से कांवड़ के माध्यम से पवित्र गंगाजल लाकर भगवान शिव का जलाभिषेक किया जाएगा। इस दौरान श्रद्धालुओं द्वारा पुष्प वर्षा भी की जाएगी।
बाघेश्वर धाम के महंत रोशनपुरी ने बताया कि इस बार देशभर से करीब 1200 श्रद्धालुओं की ओर से कांवड़ के माध्यम से गंगाजल से भगवान का जलाभिषेक किया जाएगा। प्रशासन को मेले में सुरक्षा व्यवस्था के लिए पुलिस कर्मचारियों की तैनाती कर ली गई है। मंदिर में सेवा करने वाले सेवादारों की भी ड्यूटी लगा दी गई है। महाशिवरात्रि पर्व पर हजारों की संख्या में हरियाणा ही नहीं पंजाब, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात, राजस्थान, दिल्ली, उत्तराखंड राज्यों से लोग यहां आकर पूजा करते हैं। कावड़ियों के लिए अलग से शिविर लगाए हुए हैं जहां पर कांवड़ियों के लिए जलपान की व्यवस्था भी की गई है।
बताया जाता है कि यहां शिवलिंग भगवान राम के पूर्वजों के समय से विराजमान है। मंदिर के प्रवेश में कोई जातिभेद नहीं है। हर धर्म का व्यक्ति शिवलिंग पर जलाभिषेक करता है। बाघोत का मंदिर करीब 1684 वर्ष पुराना है। इस शिवालय के पास खड़े कदंब के पेड़, तालाब एवं स्वयंभू शिव लिंग ऋषि मुनियों की तप स्थली होने की याद दिलाते हैं। वर्ष में दो बार मेले लगते हैं।
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बाघेश्वर धाम के महंत रोशनपुरी ने बताया कि इस बार देशभर से करीब 1200 श्रद्धालुओं की ओर से कांवड़ के माध्यम से गंगाजल से भगवान का जलाभिषेक किया जाएगा। प्रशासन को मेले में सुरक्षा व्यवस्था के लिए पुलिस कर्मचारियों की तैनाती कर ली गई है। मंदिर में सेवा करने वाले सेवादारों की भी ड्यूटी लगा दी गई है। महाशिवरात्रि पर्व पर हजारों की संख्या में हरियाणा ही नहीं पंजाब, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात, राजस्थान, दिल्ली, उत्तराखंड राज्यों से लोग यहां आकर पूजा करते हैं। कावड़ियों के लिए अलग से शिविर लगाए हुए हैं जहां पर कांवड़ियों के लिए जलपान की व्यवस्था भी की गई है।
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बताया जाता है कि यहां शिवलिंग भगवान राम के पूर्वजों के समय से विराजमान है। मंदिर के प्रवेश में कोई जातिभेद नहीं है। हर धर्म का व्यक्ति शिवलिंग पर जलाभिषेक करता है। बाघोत का मंदिर करीब 1684 वर्ष पुराना है। इस शिवालय के पास खड़े कदंब के पेड़, तालाब एवं स्वयंभू शिव लिंग ऋषि मुनियों की तप स्थली होने की याद दिलाते हैं। वर्ष में दो बार मेले लगते हैं।
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