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Mahendragarh-Narnaul News: विद्यार्थियों ने मुख्यद्वार बंदकर की नारेबाजी
Tue, 08 Apr 2025 11:22 PM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
Updated Tue, 08 Apr 2025 11:22 PM IST
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फोटो संख्या:-72 हकेंवि में धरना प्रदर्शन करने वाले छात्राओं को समझाते प्रशासनिक अधिकारी--संवाद
महेंद्रगढ़। हरियाणा केंद्रीय विश्वविद्यालय में मंगलवार को एनएसयूआई (नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया) ने विरोध-प्रदर्शन किया। प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों ने विश्वविद्यालय के मुख्य द्वार को बंदकर विश्वविद्यालय प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की।
विद्यार्थियों का कहना है कि विश्वविद्यालय में छात्र प्रतिनिधियों (डीआर) के चयन की प्रक्रिया पक्षपात पूर्ण है। वर्तमान में 40 डीआर में से 20 का चुनाव होता है, जबकि बाकी 20 को नामांकित किया जाता है। विशेष रूप से एक संगठन से जुड़े छात्रों को ही महत्व दिया जा रहा है। उनकी मांग है कि सभी 40 डीआर का चुनाव सीधे छात्रों द्वारा कराया जाएं, ताकि लोकतांत्रिक प्रक्रिया सुनिश्चित हो सके। रिसर्च स्कॉलर्स की नॉन-नेट फेलोशिप को लेकर भी नाराजगी जताई गई।
एनएसयूआई इंचार्ज सुनील कमानियां, छात्र धीरज, मोहित, अनुज, ज्योति, अरुण, राजकुमार, उत्तम सिंह सहित अन्य छात्रों ने कहा कि पिछले आठ सालों से पीएचडी करने वाले नॉन-जेआरएफ छात्रों को केवल आठ हजार रुपये प्रतिमाह स्टाइपेंड मिल रहा है, जबकि महंगाई में 24 प्रतिशत की वृद्धि हो चुकी है। इस राशि में गुणवत्तापूर्ण रिसर्च करना असंभव है।
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विश्वविद्यालय में मूलभूत सुविधाओं की कमी है। गर्मी के मौसम में पीने के पानी की भारी समस्या है। वाटर कूलर का पानी खारा है और कैंपस में पर्याप्त पेयजल व्यवस्था नहीं है। सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि जब कोई घटना होती है तो पुलिस तीन घंटे बाद पहुंचती है, लेकिन छात्र संगठन का प्रदर्शन रोकने के लिए पहले ही पुलिस को बुला लिया जाता है। एनएसयूआई से जुड़े विद्यार्थियों ने विश्वविद्यालय प्रशासन पर एक विशेष संगठन के पक्ष में झुकाव का आरोप लगाते हुए कहा कि निष्पक्षता और पारदर्शिता का पूरी तरह से अभाव है। उनकी मांग है कि विश्वविद्यालय प्रशासन छात्रों की बात सुने, सभी मुद्दों पर तत्काल कार्रवाई करें।
वहीं प्रदर्शन की सूचना के बाद विश्वविद्यालय के प्रशासनिक अधिकारी डॉ. आनंद शर्मा मौके पर पहुंचे और विद्यार्थियों की मांगों को सुन जल्द ही सुधार करने का आश्वासन दिया।
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विद्यार्थियों का कहना है कि विश्वविद्यालय में छात्र प्रतिनिधियों (डीआर) के चयन की प्रक्रिया पक्षपात पूर्ण है। वर्तमान में 40 डीआर में से 20 का चुनाव होता है, जबकि बाकी 20 को नामांकित किया जाता है। विशेष रूप से एक संगठन से जुड़े छात्रों को ही महत्व दिया जा रहा है। उनकी मांग है कि सभी 40 डीआर का चुनाव सीधे छात्रों द्वारा कराया जाएं, ताकि लोकतांत्रिक प्रक्रिया सुनिश्चित हो सके। रिसर्च स्कॉलर्स की नॉन-नेट फेलोशिप को लेकर भी नाराजगी जताई गई।
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एनएसयूआई इंचार्ज सुनील कमानियां, छात्र धीरज, मोहित, अनुज, ज्योति, अरुण, राजकुमार, उत्तम सिंह सहित अन्य छात्रों ने कहा कि पिछले आठ सालों से पीएचडी करने वाले नॉन-जेआरएफ छात्रों को केवल आठ हजार रुपये प्रतिमाह स्टाइपेंड मिल रहा है, जबकि महंगाई में 24 प्रतिशत की वृद्धि हो चुकी है। इस राशि में गुणवत्तापूर्ण रिसर्च करना असंभव है।
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विश्वविद्यालय में मूलभूत सुविधाओं की कमी है। गर्मी के मौसम में पीने के पानी की भारी समस्या है। वाटर कूलर का पानी खारा है और कैंपस में पर्याप्त पेयजल व्यवस्था नहीं है। सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि जब कोई घटना होती है तो पुलिस तीन घंटे बाद पहुंचती है, लेकिन छात्र संगठन का प्रदर्शन रोकने के लिए पहले ही पुलिस को बुला लिया जाता है। एनएसयूआई से जुड़े विद्यार्थियों ने विश्वविद्यालय प्रशासन पर एक विशेष संगठन के पक्ष में झुकाव का आरोप लगाते हुए कहा कि निष्पक्षता और पारदर्शिता का पूरी तरह से अभाव है। उनकी मांग है कि विश्वविद्यालय प्रशासन छात्रों की बात सुने, सभी मुद्दों पर तत्काल कार्रवाई करें।
वहीं प्रदर्शन की सूचना के बाद विश्वविद्यालय के प्रशासनिक अधिकारी डॉ. आनंद शर्मा मौके पर पहुंचे और विद्यार्थियों की मांगों को सुन जल्द ही सुधार करने का आश्वासन दिया।

फोटो संख्या:-72 हकेंवि में धरना प्रदर्शन करने वाले छात्राओं को समझाते प्रशासनिक अधिकारी--संवाद