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Mahendragarh-Narnaul News: बारिश से 30 से अधिक गांवों में गिरी बाजरे की फसल
Sun, 31 Aug 2025 12:18 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
Updated Sun, 31 Aug 2025 12:18 AM IST
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फोटो संख्या:58- शुक्रवार दोपहर बाद हुई बारिश के बाद गांव निंभेहड़ा में बिछी पड़ी बाजरे की फसल--
महेंद्रगढ़। जिले में लगातार हुई बारिश से 30 से अधिक गांवों में खेत में तैयार बाजरे की फसल गिर गई है। वहीं काट कर सूखने के लिए खेतों में रखे बाजरे के सिरटों में अंकुरण के साथ फफूंद लगने शुरू हो गए हैं। ऐसे में किसानों को काफी नुकसान पहुंचा है। अब किसानों को क्षतिपूर्ति पोर्टल खुलने का इंतजार है ताकि वे क्षतिपूर्ति के लिए आवेदन कर सकें।
महेंद्रगढ़ जिले की तीन लाख एकड़ में पककर तैयार बाजरे की फसल पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। शुक्रवार को हुई 75 मिमी बारिश के बाद करीब 30 से अधिक गांवों में बाजरे की फसल गिर गई है।
एक सप्ताह से लगातार हो रही बारिश के कारण सिरटों में जमवार शुरू हो गई है। काटकर खेतों में सूखने के लिए एकत्रित की गए सिरटों में अंकुरण होने के साथ ही फफूंद लगनी लगनी शुरू हो गई है। इससे उत्पादन प्रभावित होने का संकट पैदा हो गया है।
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शनिवार को धूप निकलने के बाद किसान अपनी फसल को बचाने की जुगत में जुट गए। सिरटोें को सूखने के लिए रखा गया। वहीं मौसम विभाग की ओर से आगामी चार सितंबर तक हल्की से मध्यम बारिश की संभावना जताई जा रही है। मौसम विभाग की चेतावनी से किसानों की चिंताएं और अधिक बढ़ गई हैं।
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एक सप्ताह से हो रही बारिश के कारण बाजरे के सिरटों में अंकुरण हो गया है। साथ ही फफूंद लगने के कारण बाजरा काला पड़ने लगा है। प्रदेश सरकार जल्द से क्षतिपूर्ति पोर्टल खोले ताकि किसान अपनी नुकसान की भरपाई के लिए आवेदन कर सकें। - सुरेंद्र सिंह, गांव निंबी।
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शुक्रवार को दोपहर बाद हुई तेज बारिश से गांवों में बाजरे की अगेती पकी हुई फसल गिर गई है। अब फसल कटाई में परेशानी होने के साथ ही बाजरे की गुणवत्ता प्रभावित होगी। पांच एकड़ में बाजरे की बिजाई की है। इसमें से तीन एकड़ अगेती फसल थी। - भूपेंद्र सिंह, गांव निंबी।
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इस समय फसल पककर तैयार है। किसान मौसम खुलने का इंतजार कर रहे हैं। दो-तीन दिनों तक बारिश होती है तो फसल में नुकसान होगा। किसान पोर्टल खुलने का इंतजार कर रहे हैं। अभी तक क्षतिपूर्ति पोर्टल नहीं खोला गया है।- राजेंद्र सिंह, गांव निंबेहड़ा।
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पांच एकड़ में बाजरे की कटाई कर सिरटों को एकत्रित कराया था। मौसम खुलते ही फसल की थ्रेसिंग करानी थी लेकिन एक सप्ताह से लगातार हो रही बारिश के कारण सिरटों में अंकुरण शुरू हो गया है। एक बार दाना अंकुरित होने के बाद वह खत्म हो जाता है जिससे उत्पादन प्रभावित होगा। - धर्मपाल नंबरदार, गांव पायगा।
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इस बार अच्छी पैदावार की उम्मीद थी। सही समय पर हुई बारिश के कारण फसल की आठ फुट तक बढ़वार हो गई थी। सिरटे में अधिक वजन होने से बाजरा गिरना आरंभ हो चुका है। बाजरे की फसल गिरने के बाद दो-तीन दिन कटाई नहीं होती है तो अंकुरण शुरू हो जाता है। - सुमेर सिंह, गांव अगिहार।
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कटाई कराने के बाद ढेरियों में सूखने के लिए रखे सिरटों में जमवार हो चुकी है। फफूद लगकर दाने काला पड़ने शुरू हो गए हैं। दो-तीन दिन तक बारिश का सिलसिला चलता रहा तो 50 प्रतिशत तक नुकसान की आशंका है। - कर्मबीर यादव, गांव सिगड़ा।
वर्जन
जिले में 50 प्रतिशत बाजरे की फसल पककर तैयार है। मौसम में नमी बनी के चलते सिरटों में जमवार व फफूंद लगने से दाने की गुणवत्ता प्रभावित होने की आशंका है। कटाई कर सूखने के लिए सिरटों की ढेरियां लगाई गई हैं उनमें भी जमवार शुरू हो गया है। किसान मौसम को ध्यान में रखते हुए फसल की कटाई करें। फसल को भीगने से बचाव के प्रबंध रखें। - डॉ. जयलाल यादव, वरिष्ठ संयोजक कृषि विज्ञान केंद्र महेंद्रगढ़।
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महेंद्रगढ़ जिले की तीन लाख एकड़ में पककर तैयार बाजरे की फसल पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। शुक्रवार को हुई 75 मिमी बारिश के बाद करीब 30 से अधिक गांवों में बाजरे की फसल गिर गई है।
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एक सप्ताह से लगातार हो रही बारिश के कारण सिरटों में जमवार शुरू हो गई है। काटकर खेतों में सूखने के लिए एकत्रित की गए सिरटों में अंकुरण होने के साथ ही फफूंद लगनी लगनी शुरू हो गई है। इससे उत्पादन प्रभावित होने का संकट पैदा हो गया है।
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शनिवार को धूप निकलने के बाद किसान अपनी फसल को बचाने की जुगत में जुट गए। सिरटोें को सूखने के लिए रखा गया। वहीं मौसम विभाग की ओर से आगामी चार सितंबर तक हल्की से मध्यम बारिश की संभावना जताई जा रही है। मौसम विभाग की चेतावनी से किसानों की चिंताएं और अधिक बढ़ गई हैं।
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एक सप्ताह से हो रही बारिश के कारण बाजरे के सिरटों में अंकुरण हो गया है। साथ ही फफूंद लगने के कारण बाजरा काला पड़ने लगा है। प्रदेश सरकार जल्द से क्षतिपूर्ति पोर्टल खोले ताकि किसान अपनी नुकसान की भरपाई के लिए आवेदन कर सकें। - सुरेंद्र सिंह, गांव निंबी।
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शुक्रवार को दोपहर बाद हुई तेज बारिश से गांवों में बाजरे की अगेती पकी हुई फसल गिर गई है। अब फसल कटाई में परेशानी होने के साथ ही बाजरे की गुणवत्ता प्रभावित होगी। पांच एकड़ में बाजरे की बिजाई की है। इसमें से तीन एकड़ अगेती फसल थी। - भूपेंद्र सिंह, गांव निंबी।
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इस समय फसल पककर तैयार है। किसान मौसम खुलने का इंतजार कर रहे हैं। दो-तीन दिनों तक बारिश होती है तो फसल में नुकसान होगा। किसान पोर्टल खुलने का इंतजार कर रहे हैं। अभी तक क्षतिपूर्ति पोर्टल नहीं खोला गया है।- राजेंद्र सिंह, गांव निंबेहड़ा।
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पांच एकड़ में बाजरे की कटाई कर सिरटों को एकत्रित कराया था। मौसम खुलते ही फसल की थ्रेसिंग करानी थी लेकिन एक सप्ताह से लगातार हो रही बारिश के कारण सिरटों में अंकुरण शुरू हो गया है। एक बार दाना अंकुरित होने के बाद वह खत्म हो जाता है जिससे उत्पादन प्रभावित होगा। - धर्मपाल नंबरदार, गांव पायगा।
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इस बार अच्छी पैदावार की उम्मीद थी। सही समय पर हुई बारिश के कारण फसल की आठ फुट तक बढ़वार हो गई थी। सिरटे में अधिक वजन होने से बाजरा गिरना आरंभ हो चुका है। बाजरे की फसल गिरने के बाद दो-तीन दिन कटाई नहीं होती है तो अंकुरण शुरू हो जाता है। - सुमेर सिंह, गांव अगिहार।
कटाई कराने के बाद ढेरियों में सूखने के लिए रखे सिरटों में जमवार हो चुकी है। फफूद लगकर दाने काला पड़ने शुरू हो गए हैं। दो-तीन दिन तक बारिश का सिलसिला चलता रहा तो 50 प्रतिशत तक नुकसान की आशंका है। - कर्मबीर यादव, गांव सिगड़ा।
वर्जन
जिले में 50 प्रतिशत बाजरे की फसल पककर तैयार है। मौसम में नमी बनी के चलते सिरटों में जमवार व फफूंद लगने से दाने की गुणवत्ता प्रभावित होने की आशंका है। कटाई कर सूखने के लिए सिरटों की ढेरियां लगाई गई हैं उनमें भी जमवार शुरू हो गया है। किसान मौसम को ध्यान में रखते हुए फसल की कटाई करें। फसल को भीगने से बचाव के प्रबंध रखें। - डॉ. जयलाल यादव, वरिष्ठ संयोजक कृषि विज्ञान केंद्र महेंद्रगढ़।