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विभाजन का दर्द पीड़ितों के लिए असहनीय : प्रो. टंकेश्वर

Thu, 14 Aug 2025 11:52 PM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल Updated Thu, 14 Aug 2025 11:52 PM IST
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The pain of partition is unbearable for the victims: Prof. Tankeshwar
फोटो संख्या:59- विभाजन  विभिषिका पर केंद्रित प्रदर्शनी का अवलोकन करते कुलपति प्रो. टंकेश्वर कुम
महेंद्रगढ़। विभाजन का दर्द उन लोगों के लिए सदैव असहनीय है जो कहीं न कहीं इससे जुड़े हैं। 15 अगस्त 1947 को देश आजाद हुआ और इसी के साथ देश के विभाजन का दर्द झेला। यह बातें हरियाणा केंद्रीय विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. टंकेश्वर कुमार ने वीरवार को विभाजन की विभीषिका स्मृति दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में कही।
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कहा कि आज हम विभाजन की जिन तस्वीरों को देखते हैं, इनमें मंजर बेहद भयावह नजर आता है। हालात उससे कई गुणा अधिक वीभत्स थे। आज के दिन इस दर्द को याद करने के पीछे की एक ही वजह है कि ऐसे समय की कभी भी पुनरावृत्ति न हो।
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विश्वविद्यालय के इतिहास एवं पुरातत्व विभाग द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम की शुरुआत में विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. नरेंद्र परमार ने विषय परिचय प्रस्तुत किया। अखंड भारत के विभाजन से जुड़े विभिन्न ऐतिहासिक पक्षों को प्रतिभागियों के समक्ष रखा। बतौर मुख्य वक्ता में कैप्टन सतविंद्र सिंह की आपबीती सुनकर सभी की आंखें नम हो गईं। उन्होंने बताया कि वे वर्तमान में पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में स्थित मीरपुर से विस्थापित होकर भारत आए थे। उनके परिवार व साथ चले अन्य लोगों ने कई अपनों को खो दिया।
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उन्होंने कहा कि आज की पीढ़ी ने उस दर्द को सीधे ही महसूस नहीं किया, लेकिन पूर्वजों से उन किस्सों को जानकर विभाजन और उसके दर्द को न सिर्फ समझा जा सकता है बल्कि भविष्य में ऐसे किसी दर्द से बचने का मार्ग प्रशस्त किया जा सकता है। कुलपति ने विद्यार्थियों को इस विषय पर अध्ययन व शोध के लिए भी प्रेरित किया। कार्यक्रम में मानविकी एवं सामाजिक विज्ञान पीठ की अधिष्ठाता प्रो. पायल कंवर चंदेल, प्रो. राजीव कुमार सिंह, छात्र कल्याण अधिष्ठाता प्रो. रेनु यादव, डॉ. रवि प्रताप पांडेय, डॉ. मनीष कुमार, डॉ. के.आर. पलसानिया, डॉ. कुलभूषण मिश्रा सहित विभिन्न विभागों के शिक्षक, विद्यार्थी व शोधार्थी उपस्थित रहे।
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