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रैनबसेरों पर लगे ताले, कहां जाएं ठंड में रात गुजारने वाले

Sun, 14 Nov 2021 11:24 PM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Sun, 14 Nov 2021 11:24 PM IST
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The locks on the shelters, where to go, those who spend the night in the cold
बस स्टैंड के पास बंद पड़ा रैनबसेरा । संवाद - फोटो : Narnol
ठंड का मौसम शुरू होते मुसाफिरों को रैन बसेरों की याद आने लगी है। लेकिन प्रशासन ने अभी तक शहर में बने रैनबसेरों की सुध नहीं ली है। हालात यह हैं कि शहर केे बस स्टैंड और नागरिक अस्पताल के बाहर बने रैनबसेरों पर ताला लगा है तो दूसरा भी बंद पड़ा हुआ है। वहीं इनके अंदर गंदगी पसरी हुई है, जिससे रात में दूरदराज से आने वाले लोगों को ठंड के मौसम में खुले में रात गुजारनी पड़ रही है। जबकि अधिकारी अपने घरों में चैन की नींद सो रहे हैं।
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बता दें कि उच्चतम न्यायालय के आदेशानुसार ठंड के दौरान फुटपाथ या सड़कों पर सोने वाले प्रवासी मजदूर या रात्रि के समय दूरदराज से आने वाले मुसाफिरों के लिए शहर के बस स्टैंड व नागरिक अस्पताल के पास दो रैन बसेरे बनाए गए हैं, मगर उन पर ताले लटके हुए हैं, जबकि नगर परिषद ने भी रैन बसेरों की ओर ध्यान नहीं दिया है। इस कारण दूरदराज से रात्रि के समय आने वाले मुसाफिरों को रैन बसेरों का लाभ नहीं मिल पा रहा है। बस स्टैंड के पास बने रैन बसेरे में गद्दे, रजाई से लेकर अन्य सभी सुविधाएं हैं। जबकि यहां सदी के मौसम में रात के समय कई लोग सहारा लेते हैं।
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नागरिक अस्पताल के पास बने रैन बसेरे पर शुरूआत से लटका है ताला
ठंड के दौरान खुले में सोने वाले व रात्रि के समय दूर-दराज से आने वाले लोगों के लिए शहर के बस स्टैंड व नागरिक अस्पताल के पास रैन बसेरे बनाए गए है। इनमें बस स्टैंड के पास बने रैन बसेरे में ऐसे लोग बसेरा करते है। जबकि यहां ठंड से बचाव के सभी संसाधन उपलब्ध है, लेकिन नागरिक अस्पताल के पास बने रैन बसेरे का बनाने के बाद उपयोग ही नहीं किया गया है। उक्त रैन बसेरे पर ताला लटका हुआ है। इसके बाहर व अंदर धूल-मिट्टी व गंदगी फैली हुई है। ऐसे में नागरिक अस्पताल में मरीजों के साथ आने वाले लोगों को अस्पताल में इधर-उधर बैठक रात गुजारनी पड़ती है। अगर उक्त रैन बसेरे को शुरू किया जाए तो निश्चित ही ऐसे लोगों को लाभ होगा।
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रैन बसेरे होने के बावजूद ठंड में रात बिताने को मजबूर लोग
शहर में दो रैन बसेरे होने के बावजूद लोग ठंड में रात बिताने का मजबूर हैं, क्योंकि नगर प्रशासन के रैन बसेरे पर तो ताला लटका हुआ है तो एक बिना देखरेख के कारण बंद पड़ा हुआ है। इस प्रकार बेसहारा लोगों को सर्द रातों में सिर छिपाने के लिए छत नसीब नहीं हो रही है। जबकि सरकार की हिदायत अनुसार रैन बसेरों को 24 घंटे खुला रखना होता है, लेकिन शहर में दोनों रैन बसेरे बंद पड़े है।

बस स्टैंड व नागरिक अस्पताल के पास बने रैन बसेरे चल रहे हैं। दोनों में सभी सर्दी से बचाव के लिए सभी संसाधन उपलब्ध हैं। रैन बसेरों को ताला किस कारण से लगाया गया है इसकी जांच करवाई जाएगी। -सुमनलता, ईओ, नगर परिषद, नारनौल।

 नागरिक अस्पताल के पास बंद पड़ा रैनबसेरा । संवाद

नागरिक अस्पताल के पास बंद पड़ा रैनबसेरा । संवाद- फोटो : Narnol

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