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Hindi News ›   Haryana ›   Mahendragarh/Narnaul News ›   The Gurdwara located in the old court was built on the orders of the Maharaja of the princely state of Patiala.

पटियाला रियासत के महाराज के आदेश पर बना था पुरानी कोर्ट स्थित गुरुद्वारा

Fri, 22 Apr 2022 12:00 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Fri, 22 Apr 2022 12:00 AM IST
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The Gurdwara located in the old court was built on the orders of the Maharaja of the princely state of Patiala.
सुरजीत सिंह अरोड़ा। - फोटो : Narnol
मानव कल्याण व मानवता का जन्म ही सभी धर्मों का सार है। इसी भावना को आगे बढ़ाने का काम कर रहा है पेप्सू काल में बना पुरानी कोर्ट स्थित गुरुद्वारा। इस गुरुद्वारे के निर्माण को लेकर कई रोचक तथ्य इतिहास में दर्ज हैं। गुरुद्वारे की कहानी के बारे में जानकारी देते हुए सुरजीत सिंह अरोड़ा ने बताया कि देश की आजादी के बाद 1948 से लेकर 1956 तक पेप्सू यानी पटियाला एंड ईस्ट पंजाब स्टेट यूनियन के काल में इस गुरुद्वारा का निर्माण हुआ था। आजादी से पहले यह पटियाला महाराजा की रियासत होती थी।
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देश की आजादी के बाद पेप्सू काल के दौरान ही स्टेट का सबसे पहला मुख्यमंत्री ज्ञान सिंह राडेवाला बना। इसी दौरान पटियाला के महाराजा भूपेंद्र सिंह आजादी के बाद नारनौल दौरे पर आए। पुरानी कोर्ट में स्थित कारागार में उन्होंने कैदियों से मुलाकात की। इसी दौरान कैदियों ने उनके समक्ष अपने धर्म के हिसाब से पूजा पद्धति करने की स्वतंत्रता की मांग रखते हुए वहां पर गुरुद्वारा व मंदिर बनवाने की मांग रखी।
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उन्होंने बताया कि पटियाला रियासत के बाद बने पेप्सू के पहले मुख्यमंत्री ज्ञान सिंह राडेवाला को महाराज भूपेंद्र सिंह ने तुरंत इस संबंध में कार्रवाई करने के निर्देश दिए। कैदियों की जायज मांग को देखते हुए तत्कालीन मुख्यमंत्री ने नारनौल की कारागार में एक छोटे मंदिर व एक गुरुद्वारा का निर्माण करवाया। इस गुरुद्वारे का पहले पुलिस विभाग में कार्यरत कर्मचारी ने ग्रंथि के रूप में कार्य किया उसके उपरांत सरदार महेंद्र सिंह ने ग्रंथि के रूप अपनी सेवाएं निभाई। अरोड़ा ने बताया कि इनका वेतन इत्यादि का खर्चा सरकार के खाते से मिलता रहा है। भाई महेंद्र सिंह के निधन के उपरांत उनकी धर्मपत्नी स्वर्ण कौर, प्रधान हरभजन सिंह की प्रधानता में इस कार्य को भली प्रकार से संभाल रहे हैं।
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उन्होंने बताया कि पटियाला रियासत के महाराज भूपेंद्र सिंह ने अपने काल में नारनौल में भूपेंद्रा स्कूल भी खुलवाया था जिसे बाद में राजकीय गर्ल्स सीनियर सेकेंडरी स्कूल कर दिया गया था। महाराजा पटियाला अपनी रियासत में अपनी धर्म व संस्कृति के रक्षक के तौर पर माने जाते थे। नारनौल की पुरानी कोर्ट में स्थित यह गुरुद्वारा आज विभिन्न धर्मों को शांति व भाईचारे का संदेश दे रहा है।
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