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Mahendragarh-Narnaul News: यादों की तस्वीर से हकीकत के दरवाजे तक पहुंचे शिष्य
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फोटो 5शिक्षिका सावित्री देवी से मुलाकात करते राजकीय महाविद्यालय नारनौल के प्राचार्य अमित चौधर
नारनौल। एक पुरानी तस्वीर में कुछ बच्चे खड़े थे और उनके बीच एक ऐसी शिक्षिका थीं, जिनकी याद एक शिष्य के मन में 47 साल बाद भी जिंदा थी। कॉलेज के प्राचार्य अमित चौधरी इसी तस्वीर को संभाले अपनी पहली शिक्षिका को तलाश रहे थे। शिक्षक दिवस पर आखिरकार वह तलाश पूरी हुई और चौधरी 85 वर्षीय सावित्री देवी के घर पहुंच गए।
दरवाजे पर पहुंचे तो सामने वही चेहरा था, जिसने बचपन में उन्हें पढ़ना सिखाया था। चौधरी ने उनके चरण स्पर्श किए और उपहार भेंट कर सम्मान किया। इतने वर्षों बाद अपने सामने पुराने शिष्य को देखकर सावित्री देवी की आंखें भी खुशी से नम हो गईं।
करीब एक माह पहले चौधरी का तबादला नारनौल राजकीय कॉलेज में हुआ था। तभी उनके मन में अपनी पहली शिक्षिका से दोबारा मिलने की इच्छा जागी। उनके पास वर्ष 1978 के समय की स्कूल की तस्वीर थी। वे कॉलेज में आने-जाने वाले लोगों और स्थानीय लोगों को तस्वीर दिखाकर शिक्षिका का पता पूछते रहे।
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एक दिन उनकी मुलाकात उसी मोहल्ले के एक व्यक्ति से हुई। उसने तस्वीर देखते ही सावित्री देवी को पहचान लिया। पता मिलते ही चौधरी ने तय किया कि शिक्षक दिवस पर कोई औपचारिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि सीधे गुरु के घर जाकर आशीर्वाद लिया जाएगा।
वर्ष 1978 में चौधरी के पिता ओमसिंह फूड कॉरपोरेशन में तैनात थे। परिवार नारनौल में रहता था और अमित ने करीब दो साल तक मिश्रवाड़ा में सावित्री देवी के स्कूल में प्रारंभिक शिक्षा ली। उस समय वह एक छोटा बच्चा था लेकिन उसी स्कूल से मिली शिक्षा ने उसके जीवन की पहली नींव रखी। आज वही बच्चा राजकीय महाविद्यालय का प्राचार्य है। संवाद
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दरवाजे पर पहुंचे तो सामने वही चेहरा था, जिसने बचपन में उन्हें पढ़ना सिखाया था। चौधरी ने उनके चरण स्पर्श किए और उपहार भेंट कर सम्मान किया। इतने वर्षों बाद अपने सामने पुराने शिष्य को देखकर सावित्री देवी की आंखें भी खुशी से नम हो गईं।
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करीब एक माह पहले चौधरी का तबादला नारनौल राजकीय कॉलेज में हुआ था। तभी उनके मन में अपनी पहली शिक्षिका से दोबारा मिलने की इच्छा जागी। उनके पास वर्ष 1978 के समय की स्कूल की तस्वीर थी। वे कॉलेज में आने-जाने वाले लोगों और स्थानीय लोगों को तस्वीर दिखाकर शिक्षिका का पता पूछते रहे।
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एक दिन उनकी मुलाकात उसी मोहल्ले के एक व्यक्ति से हुई। उसने तस्वीर देखते ही सावित्री देवी को पहचान लिया। पता मिलते ही चौधरी ने तय किया कि शिक्षक दिवस पर कोई औपचारिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि सीधे गुरु के घर जाकर आशीर्वाद लिया जाएगा।
वर्ष 1978 में चौधरी के पिता ओमसिंह फूड कॉरपोरेशन में तैनात थे। परिवार नारनौल में रहता था और अमित ने करीब दो साल तक मिश्रवाड़ा में सावित्री देवी के स्कूल में प्रारंभिक शिक्षा ली। उस समय वह एक छोटा बच्चा था लेकिन उसी स्कूल से मिली शिक्षा ने उसके जीवन की पहली नींव रखी। आज वही बच्चा राजकीय महाविद्यालय का प्राचार्य है। संवाद