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Mahendragarh-Narnaul News: कलश शोभायात्रा के साथ अग्र भागवत कथा शुरू
Fri, 16 Jan 2026 12:09 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
Updated Fri, 16 Jan 2026 12:09 AM IST
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फोटो नंबर-04अग्र भागवत कथा के शुभारंभ पर कलश यात्रा निकालती महिलाएं।
नारनौल। कलश शोभायात्रा के साथ वीरवार से अग्रवाल सभा भवन में अग्र भागवत कथा शुरू हो गई। शहर में जगह-जगह शोभायात्रा का स्वागत किया गया। कथा के पहले दिन महामंडलेश्वर आचार्य नर्मदा शंकर पुरी महाराज ने अग्रसेन महाराज के जीवन के बारे में बताया।
कलश यात्रा अग्रवाल सभा भवन से शुरू होकर काठ मंडी, लोहा मंडी व अग्रसेन चौक होते हुए पुन: अग्रवाल सभा भवन पहुंचकर संपन्न हुई। शोभायात्रा में बैंड-बाजे, घोड़ी-बग्गी के साथ पारंपरिक वेशभूषा में सजे सैकड़ों महिला-पुरुष शामिल हुए। मार्ग में विभिन्न स्थानों पर नागरिकों ने पुष्प वर्षा कर शोभायात्रा का स्वागत किया।
पहले दिन महामंडलेश्वर आचार्य नर्मदा शंकर पुरी महाराज ने श्री अग्रसेन के जीवन और आदर्शों पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि सूर्यवंशी, परम प्रतापी सम्राट एवं प्रतापपुरी के राजा बल्लभ सेन के यहां आश्विन शुक्ल प्रतिपदा को मध्याह्न काल में श्री अग्रसेन का जन्म हुआ था।
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महाराज ने कहा कि अग्रसेन ने ताण्ड्य ऋषि के आश्रम में शिक्षा ग्रहण की और अल्पकाल में ही वेदों, पुराणों, उपनिषदों, षड्दर्शन, वास्तु-ज्योतिष के साथ-साथ अस्त्र-शस्त्रों का गहन ज्ञान प्राप्त कर लिया, जिससे वे गुरु के अत्यंत प्रिय शिष्य बने।
अग्रसेन ने महाभारत के युद्ध में 18 दिनों तक युद्ध कर पांडवों की विजय में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इसी युद्ध में उन्हें भगवान श्रीकृष्ण का आशीर्वाद प्राप्त हुआ।
महाराज ने कहा कि आज कलियुग में अग्रसेन को पुरुषार्थ, परोपकार और सामाजिक समरसता के देवता के रूप में पूजित किया जाता है, जिनके सिद्धांत समाज को आर्थिक आत्मनिर्भरता और समानता का संदेश देते हैं।
इस अवसर पर मुख्य रूप से गोपाल शरण गर्ग, अग्रवाल सभा के प्रधान प्रेमचंद गुप्ता, सत्यनारायण गुप्ता, सूरज अग्रवाल, मोनू भाटा, संजय गर्ग, विष्णु गर्ग, प्रवीण बंसल, पारस गर्ग उपस्थित रहे।
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कलश यात्रा अग्रवाल सभा भवन से शुरू होकर काठ मंडी, लोहा मंडी व अग्रसेन चौक होते हुए पुन: अग्रवाल सभा भवन पहुंचकर संपन्न हुई। शोभायात्रा में बैंड-बाजे, घोड़ी-बग्गी के साथ पारंपरिक वेशभूषा में सजे सैकड़ों महिला-पुरुष शामिल हुए। मार्ग में विभिन्न स्थानों पर नागरिकों ने पुष्प वर्षा कर शोभायात्रा का स्वागत किया।
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पहले दिन महामंडलेश्वर आचार्य नर्मदा शंकर पुरी महाराज ने श्री अग्रसेन के जीवन और आदर्शों पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि सूर्यवंशी, परम प्रतापी सम्राट एवं प्रतापपुरी के राजा बल्लभ सेन के यहां आश्विन शुक्ल प्रतिपदा को मध्याह्न काल में श्री अग्रसेन का जन्म हुआ था।
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महाराज ने कहा कि अग्रसेन ने ताण्ड्य ऋषि के आश्रम में शिक्षा ग्रहण की और अल्पकाल में ही वेदों, पुराणों, उपनिषदों, षड्दर्शन, वास्तु-ज्योतिष के साथ-साथ अस्त्र-शस्त्रों का गहन ज्ञान प्राप्त कर लिया, जिससे वे गुरु के अत्यंत प्रिय शिष्य बने।
अग्रसेन ने महाभारत के युद्ध में 18 दिनों तक युद्ध कर पांडवों की विजय में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इसी युद्ध में उन्हें भगवान श्रीकृष्ण का आशीर्वाद प्राप्त हुआ।
महाराज ने कहा कि आज कलियुग में अग्रसेन को पुरुषार्थ, परोपकार और सामाजिक समरसता के देवता के रूप में पूजित किया जाता है, जिनके सिद्धांत समाज को आर्थिक आत्मनिर्भरता और समानता का संदेश देते हैं।
इस अवसर पर मुख्य रूप से गोपाल शरण गर्ग, अग्रवाल सभा के प्रधान प्रेमचंद गुप्ता, सत्यनारायण गुप्ता, सूरज अग्रवाल, मोनू भाटा, संजय गर्ग, विष्णु गर्ग, प्रवीण बंसल, पारस गर्ग उपस्थित रहे।