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Mahendragarh-Narnaul News: कथा में श्रीकृष्ण-रुक्मिणी विवाह प्रसंग सुनाया, श्रद्धालुओं ने की पुष्पवर्षा
Sun, 23 Jun 2024 11:18 PM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
Updated Sun, 23 Jun 2024 11:18 PM IST
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फोटो संख्या:63 बाबा मोलडनाथ मंदिर में आयोजित श्रीमद्भागत कथा में प्रवचन देते कथा व्यास दाशानू
कनीना। कनीना स्थित बाबा मोलड़नाथ मंदिर में श्रीमद्भागवत कथा के छठे दिन कथा व्यास ने श्रीकृष्ण-रुक्मिणी विवाह का प्रसंग सुनाया। श्रीकृष्ण-रुक्मिणी का वेश धारण किए बाल कलाकारों पर भारी संख्या में आए श्रद्धालुओं ने पुष्पवर्षा कर स्वागत किया। श्रद्धालुओं ने विवाह के मंगल गीत भी गाए।
कथा व्यास दाशानू दास आचार्य प्रवेश शर्मा ने कहा कि रुक्मिणी विदर्भ देश के राजा भीष्म की पुत्री और साक्षात लक्ष्मी का अवतार थीं। रुक्मिणी ने जब देवर्षि नारद के मुख से श्रीकृष्ण के रूप, सौंदर्य व गुणों की प्रशंसा सुनी तो उसने मन ही मन श्रीकृष्ण से विवाह करने का निश्चय किया। रुक्मिणी का बड़ा भाई रुकमी श्रीकृष्ण से शत्रुता रखता था और अपनी बहन का विवाह शिशुपाल से कराना चाहता था। रुकमणी को जब इस बात का पता चला तो उन्होंने एक ब्राह्मण संदेशवाहक द्वारा श्रीकृष्ण के पास अपना परिणय संदेश भिजवाया। तब श्रीकृष्ण विदर्भ देश की नगरी कुंडीनपुर पहुंचे और वहां बारात लेकर आए शिशुपाल व उसके मित्र राजाओं शाल्व, जरासंध, दंतवक्त्र, विदु रथ और पौंडरक को युद्ध में परास्त करके रुक्मिणी का उनकी इच्छा से हरण कर लाए। वे द्वारिकापुरी आ ही रहे थे कि उनका मार्ग रुकमी ने रोक लिया और कृष्ण को युद्ध के लिए ललकारा। तब युद्ध में श्रीकृष्ण व बलराम ने रुकमी को पराजित करके दंडित किया। तत्पश्चात श्रीकृष्ण ने द्वारिका में अपने संबंधियों के समक्ष रुकमणी से विवाह किया।
इस मौके पर अशोक, दीपक चौधरी, राजेंद्र, अनिल, दीपक, दिनेश यादव, राजेंद्र सिंह, अनिल कुमार, इंद्रजीत, शिव कुमार, लाल सिंह, पवन कुमार, सोनू यादव, मुकेश शर्मा सहित अनेक श्रद्धालु मौजूद रहे।
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कथा व्यास दाशानू दास आचार्य प्रवेश शर्मा ने कहा कि रुक्मिणी विदर्भ देश के राजा भीष्म की पुत्री और साक्षात लक्ष्मी का अवतार थीं। रुक्मिणी ने जब देवर्षि नारद के मुख से श्रीकृष्ण के रूप, सौंदर्य व गुणों की प्रशंसा सुनी तो उसने मन ही मन श्रीकृष्ण से विवाह करने का निश्चय किया। रुक्मिणी का बड़ा भाई रुकमी श्रीकृष्ण से शत्रुता रखता था और अपनी बहन का विवाह शिशुपाल से कराना चाहता था। रुकमणी को जब इस बात का पता चला तो उन्होंने एक ब्राह्मण संदेशवाहक द्वारा श्रीकृष्ण के पास अपना परिणय संदेश भिजवाया। तब श्रीकृष्ण विदर्भ देश की नगरी कुंडीनपुर पहुंचे और वहां बारात लेकर आए शिशुपाल व उसके मित्र राजाओं शाल्व, जरासंध, दंतवक्त्र, विदु रथ और पौंडरक को युद्ध में परास्त करके रुक्मिणी का उनकी इच्छा से हरण कर लाए। वे द्वारिकापुरी आ ही रहे थे कि उनका मार्ग रुकमी ने रोक लिया और कृष्ण को युद्ध के लिए ललकारा। तब युद्ध में श्रीकृष्ण व बलराम ने रुकमी को पराजित करके दंडित किया। तत्पश्चात श्रीकृष्ण ने द्वारिका में अपने संबंधियों के समक्ष रुकमणी से विवाह किया।
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इस मौके पर अशोक, दीपक चौधरी, राजेंद्र, अनिल, दीपक, दिनेश यादव, राजेंद्र सिंह, अनिल कुमार, इंद्रजीत, शिव कुमार, लाल सिंह, पवन कुमार, सोनू यादव, मुकेश शर्मा सहित अनेक श्रद्धालु मौजूद रहे।

फोटो संख्या:63 बाबा मोलडनाथ मंदिर में आयोजित श्रीमद्भागत कथा में प्रवचन देते कथा व्यास दाशानू
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