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Mahendragarh-Narnaul News: चंद्रग्रहण वाले दिन से शुरू होंगे श्राद्ध, सूर्य ग्रहण वाले दिन होंगे संपन्न
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कनीना। इस बार अनोखे संयोग से श्राद्ध आ रहे हैं जो चंद्रग्रहण से शुरू होंगे व सूर्यग्रहण के दिन संपन्न होंगे। दोनों ही ग्रहण इस साल के अंतिम ग्रहण होंगे। आचार्य सत्येंद्र शास्त्री ने बताया कि 18 सितंबर को जहां पूर्णिमा के दिन चंद्र ग्रहण लगेगा। यह भारत में नहीं दिखाई देगा। चंद्र ग्रहण सुबह 6 बजकर 12 मिनट से शुरू होगा।
उन्होंने बताया कि इसी दिन से श्राद्ध शुरू होंगे। लोग भ्रमित हो रहे हैं कि श्राद्ध 17 सितंबर से शुरू होंगे। 17 को पूर्णिमा है लेकिन कुछ समय के लिए। ऐसे में श्राद्ध 18 सितंबर को शुरू होंगे, क्योंकि चंद्र ग्रहण भारत में नहीं दिखाई देगा। इसलिए चंद्र ग्रहण का श्राद्ध से कोई संबंध नहीं होगा। उन्होंने बताया कि 2 अक्टूबर को श्राद्ध संपन्न होंगे और उस दिन अमावस्या है। अमावस्या को रात के 9 बजकर 13 से सूर्य ग्रहण प्रारंभ होगा और 3 अक्टूबर को सुबह 3 बजकर 17 मिनट तक जारी रहेगा। ऐसे में श्राद्ध पर इसका भी कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।
18 सितंबर से अश्विन शुरू होगा और पितरों के श्राद्ध 18 सितंबर से दो अक्टूबर तक निकाले जा सकते हैं। जिस किसी पितृ की मृत्यु तिथि याद नहीं है उनके श्राद्ध अमावस्या के दिन ही निकल जाते हैं। बाकी जिस दिन पितरों की मृत्यु तिथि याद है उसी दिन श्रद्धा निकाले जाने चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि श्राद्ध वास्तव में 18 सितंबर से ही निकालना उचित होगा। उनका कहना है कि हमेशा चंद्र ग्रहण पूर्णिमा के दिन लगता है और सूर्य ग्रहण हमेशा अमावस्या के दिन लगता है।
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उन्होंने बताया कि इसी दिन से श्राद्ध शुरू होंगे। लोग भ्रमित हो रहे हैं कि श्राद्ध 17 सितंबर से शुरू होंगे। 17 को पूर्णिमा है लेकिन कुछ समय के लिए। ऐसे में श्राद्ध 18 सितंबर को शुरू होंगे, क्योंकि चंद्र ग्रहण भारत में नहीं दिखाई देगा। इसलिए चंद्र ग्रहण का श्राद्ध से कोई संबंध नहीं होगा। उन्होंने बताया कि 2 अक्टूबर को श्राद्ध संपन्न होंगे और उस दिन अमावस्या है। अमावस्या को रात के 9 बजकर 13 से सूर्य ग्रहण प्रारंभ होगा और 3 अक्टूबर को सुबह 3 बजकर 17 मिनट तक जारी रहेगा। ऐसे में श्राद्ध पर इसका भी कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।
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18 सितंबर से अश्विन शुरू होगा और पितरों के श्राद्ध 18 सितंबर से दो अक्टूबर तक निकाले जा सकते हैं। जिस किसी पितृ की मृत्यु तिथि याद नहीं है उनके श्राद्ध अमावस्या के दिन ही निकल जाते हैं। बाकी जिस दिन पितरों की मृत्यु तिथि याद है उसी दिन श्रद्धा निकाले जाने चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि श्राद्ध वास्तव में 18 सितंबर से ही निकालना उचित होगा। उनका कहना है कि हमेशा चंद्र ग्रहण पूर्णिमा के दिन लगता है और सूर्य ग्रहण हमेशा अमावस्या के दिन लगता है।
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