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Mahendragarh-Narnaul News: शांति कुंज बना नई उम्मीद का घर
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फोटो 12आश्रम में भोजन करते बेसहारा लोग। संवाद
मंडी अटेली। बेगपुर स्थित शांति कुंज वृद्धाश्रम अनाथ बेसहारा और दिव्यांग लोगों के लिए सहारे की मजबूत छत बनकर उभरा है। आईसीटीएम मोडी की ओर से संचालित यह आश्रम उन लोगों को नया जीवन दे रहा है जिन्हें कभी अपने ही छोड़ गए थे। यहां 22 निवासी परिवार की तरह हंसी-खुशी जीवन बिता रहे हैं।
संचालक पवन राठौड़ ने बताया कि पिछले पांच वर्षों से आश्रम चल रहा है। निवासी मनोरंजन के साथ रचनात्मक कार्यों में भी सक्रिय हैं जिनमें पक्षियों के सुंदर घोंसले बनाना खास आकर्षण है। अब तक 58 लोगों को उनके परिवारों से मिलाया जा चुका है जिससे यह आश्रम उम्मीद की मिसाल बन गया है।
यहा निवास कर रहे लोगों को आश्रम की ओर से भोजन, कपड़े और नियमित रूप से चिकित्सा सेवा प्रदान की जाती हैं। राठौड़ ने बताया कि यह आश्रम विगत पांच वर्षों से चल रहा है। आश्रम में निवास करने वाले लोग एक परिवार के सदस्यों की भांति आपसी प्रेम के साथ रहते हैं।
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दैनिक कार्यों से निवृत्त होकर सभी प्रभुजन न केवल हंसते खेलते हुए मनोरंजन करते हैं। साथ ही कुछ रचनात्मक कार्य भी कर रहे हैं। आजकल प्रभुजन की ओर से तैयार किए गए पक्षियों के सुंदर घोंसले भी आगंतुकों को काफी पसंद आ रहे हैं।
संचालक ने बताया कि अब तक 58 लोगों को उनके परिवार से भी मिलाया जा चुका है। इनमें मध्यप्रदेश, बिहार, उतर प्रदेश, राजस्थान व दिल्ली से हैं। इनमें से मध्यप्रदेश का एक नागरिक ऐसा भी है, जो साधन सम्पन्न होने के बावजूद आश्रम में शरण लिए हुए है।
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संचालक पवन राठौड़ ने बताया कि पिछले पांच वर्षों से आश्रम चल रहा है। निवासी मनोरंजन के साथ रचनात्मक कार्यों में भी सक्रिय हैं जिनमें पक्षियों के सुंदर घोंसले बनाना खास आकर्षण है। अब तक 58 लोगों को उनके परिवारों से मिलाया जा चुका है जिससे यह आश्रम उम्मीद की मिसाल बन गया है।
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यहा निवास कर रहे लोगों को आश्रम की ओर से भोजन, कपड़े और नियमित रूप से चिकित्सा सेवा प्रदान की जाती हैं। राठौड़ ने बताया कि यह आश्रम विगत पांच वर्षों से चल रहा है। आश्रम में निवास करने वाले लोग एक परिवार के सदस्यों की भांति आपसी प्रेम के साथ रहते हैं।
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दैनिक कार्यों से निवृत्त होकर सभी प्रभुजन न केवल हंसते खेलते हुए मनोरंजन करते हैं। साथ ही कुछ रचनात्मक कार्य भी कर रहे हैं। आजकल प्रभुजन की ओर से तैयार किए गए पक्षियों के सुंदर घोंसले भी आगंतुकों को काफी पसंद आ रहे हैं।
संचालक ने बताया कि अब तक 58 लोगों को उनके परिवार से भी मिलाया जा चुका है। इनमें मध्यप्रदेश, बिहार, उतर प्रदेश, राजस्थान व दिल्ली से हैं। इनमें से मध्यप्रदेश का एक नागरिक ऐसा भी है, जो साधन सम्पन्न होने के बावजूद आश्रम में शरण लिए हुए है।