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Mahendragarh-Narnaul News: मैट पर मेहनत, मंच पर मेडल
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फोटो 11 प्रतियोगिता के दौरान योगासन करती अर्चना। स्रोत: कोच
नारनौल। गांव खातीवास के दिल्ली पुलिस में कार्यरत डीएसपी के घर जन्मी अर्चना जोतरीवाल को बचपन से ही फिटनेस का शौक रहा है। छह साल पहले लॉकडाउन में टीवी देखकर योगासन करना शुरू किया। फिर योग के जुनून से अर्चना ने विश्व के पहले योगासन चैपियनशिप में गोल्ड जीता।
साल 2020 से धीरे धीरे योग में रुचि बढ़ी तो उन्होंने नजफगढ़ स्टेडियम में कोच नवीन प्रसाद से लगभग डेढ़ साल प्रशिक्षण लिया। इस दौरान वे रोज सुबह और शाम चार चार घंटे कठिन अभ्यास करती रहीं और योग को गहराई से समझने लगीं।
उनकी मेहनत का परिणाम रहा कि पिछले तीन वर्षों में उन्होंने राज्य और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में छह स्वर्ण पदक जीतकर देश का नाम रोशन किया। अर्चना योग ने उन्हें न केवल शारीरिक रूप से मजबूत बनाया बल्कि मानसिक रूप से भी संतुलित किया और वह युवाओं को योग अपनाने की सलाह देती हैं।
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पापा के विश्वास से पाया मुकाम
अर्चना अपनी इस कामयाबी की असली वजह अपने पापा जगदीश को मानती है। उन्होंने बताया कि उनके पापा ने अपना विश्वास हमेशा उन पर बनाए रखा और इसी का परिणाम है कि आज मैं इस मुकाम तक पहुंच पाने में सफल रही।
योग में किया डिप्लोमा व एमए
वैसे तो अर्चना ने फाइनेंस में एमबीए किया है लेकिन योग की बारीकियों को समझने के लिए उन्होंने दिल्ली से योग में डिप्लोमा किया। डिप्लोमा करने के दौरान उनकी जिज्ञासा और बढ़ गई तो अर्चना ने राजस्थान विश्वविद्यालय जयपुर से योग विषय में स्नातकोत्तर भी किया। पढ़ाई के दौरान अर्चना ने योगाभ्यास निरंतर जारी रखा।
विश्व पटल पर दर्ज कराया नाम
गुजरात के अहमदाबाद में 4 से 8 जून तक आयोजित प्रथम विश्व योगासन चैंपियनशिप में विभिन्न देशों के अनेकों खिलाड़ियों ने भाग लिया था। जहां अर्चना ने अपने किताबी ज्ञान के साथ शरीरिक परिश्रम व इसके पीछे के अथक परिश्रम के दम पर सबको पछाड़ते हुए विश्व पटल पर अपना नाम हमेशा हमेशा के लिए दर्ज करवाया।
योग में जीते मेडल
साल प्रतियोगिता मेडल
2023 स्टेट लेवल गोल्ड
2024 स्टेट लेवल गोल्ड
2025 स्टेट लेवल गोल्ड
2026 अप्रैल एशियन चैपिंयनशिप 2 गोल्ड
2026 जूल विश्व योगासन चैपिंयनशिप गोल्ड
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साल 2020 से धीरे धीरे योग में रुचि बढ़ी तो उन्होंने नजफगढ़ स्टेडियम में कोच नवीन प्रसाद से लगभग डेढ़ साल प्रशिक्षण लिया। इस दौरान वे रोज सुबह और शाम चार चार घंटे कठिन अभ्यास करती रहीं और योग को गहराई से समझने लगीं।
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उनकी मेहनत का परिणाम रहा कि पिछले तीन वर्षों में उन्होंने राज्य और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में छह स्वर्ण पदक जीतकर देश का नाम रोशन किया। अर्चना योग ने उन्हें न केवल शारीरिक रूप से मजबूत बनाया बल्कि मानसिक रूप से भी संतुलित किया और वह युवाओं को योग अपनाने की सलाह देती हैं।
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पापा के विश्वास से पाया मुकाम
अर्चना अपनी इस कामयाबी की असली वजह अपने पापा जगदीश को मानती है। उन्होंने बताया कि उनके पापा ने अपना विश्वास हमेशा उन पर बनाए रखा और इसी का परिणाम है कि आज मैं इस मुकाम तक पहुंच पाने में सफल रही।
योग में किया डिप्लोमा व एमए
वैसे तो अर्चना ने फाइनेंस में एमबीए किया है लेकिन योग की बारीकियों को समझने के लिए उन्होंने दिल्ली से योग में डिप्लोमा किया। डिप्लोमा करने के दौरान उनकी जिज्ञासा और बढ़ गई तो अर्चना ने राजस्थान विश्वविद्यालय जयपुर से योग विषय में स्नातकोत्तर भी किया। पढ़ाई के दौरान अर्चना ने योगाभ्यास निरंतर जारी रखा।
विश्व पटल पर दर्ज कराया नाम
गुजरात के अहमदाबाद में 4 से 8 जून तक आयोजित प्रथम विश्व योगासन चैंपियनशिप में विभिन्न देशों के अनेकों खिलाड़ियों ने भाग लिया था। जहां अर्चना ने अपने किताबी ज्ञान के साथ शरीरिक परिश्रम व इसके पीछे के अथक परिश्रम के दम पर सबको पछाड़ते हुए विश्व पटल पर अपना नाम हमेशा हमेशा के लिए दर्ज करवाया।
योग में जीते मेडल
साल प्रतियोगिता मेडल
2023 स्टेट लेवल गोल्ड
2024 स्टेट लेवल गोल्ड
2025 स्टेट लेवल गोल्ड
2026 अप्रैल एशियन चैपिंयनशिप 2 गोल्ड
2026 जूल विश्व योगासन चैपिंयनशिप गोल्ड

फोटो 11 प्रतियोगिता के दौरान योगासन करती अर्चना। स्रोत: कोच