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Mahendragarh-Narnaul News: स्कूलों में साइंस लैब की होगी जांच, बच्चों को मिलेगा बेहतर प्रैक्टिकल सीखने का मौका
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फोटो नंबर-16राजकीय स्कूल में बनी विज्ञान लैब।स्रोत-संस्थान
नारनौल। जिले के 62 सरकारी सीनियर सेकेंडरी स्कूलों में जहां 11वीं और 12वीं में साइंस पढ़ाई जा रही है, वहां की साइंस लैब्स को मजबूत करने की तैयारी शुरू हो गई है। इसके लिए विभाग ने सभी स्कूलों से उनकी लैब से जुड़ी पूरी जानकारी मांगी है।
शिक्षा विभाग ने इस काम के लिए खंड शिक्षा अधिकारियों को जिम्मेदारी दी है। उनके जरिये स्कूलों के प्रधानाचार्यों से एक तय फॉर्मेट में जानकारी मांगी जा रही है। इसमें यह बताना होगा कि लैब में कौन-कौन से उपकरण, केमिकल और जरूरी सामान मौजूद हैं। साथ ही, अगर किसी चीज की कमी है तो उसकी लिस्ट भी साफ-साफ देनी होगी।
जिला विज्ञान विशेषज्ञ रविंद्र कुमार का कहना है कि जिले में हजारों बच्चे साइंस की पढ़ाई कर रहे हैं। ऐसे में लैब का सही और पूरी तरह से तैयार होना बहुत जरूरी है। उनका मानना है कि सिर्फ किताबों से साइंस समझना काफी नहीं होता, बच्चों को प्रैक्टिकल करना भी जरूरी है, तभी उनकी पकड़ मजबूत बनती है।
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अब विभाग इस पूरे डाटा को देखकर यह तय करेगा कि किन स्कूलों को पहले संसाधन देने की जरूरत है। इससे आने वाले समय में बच्चों को बेहतर तरीके से साइंस सीखने का मौका मिलेगा और उनकी पढ़ाई और मजबूत होगी।
वर्जन:
सभी स्कूलों को अपनी रिपोर्ट जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय में अनिवार्य रूप से भेजनी होगी। इसके लिए एक तय प्रारूप भी जारी किया गया है ताकि सभी स्कूलों से समान और व्यवस्थित जानकारी प्राप्त हो सके। प्रयोगशालाओं का समुचित उपयोग विद्यार्थी हित में सुनिश्चित किया जा सके।-डॉ. विश्वेश्वर कौशिक, जिला शिक्षा अधिकारी, नारनौल
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शिक्षा विभाग ने इस काम के लिए खंड शिक्षा अधिकारियों को जिम्मेदारी दी है। उनके जरिये स्कूलों के प्रधानाचार्यों से एक तय फॉर्मेट में जानकारी मांगी जा रही है। इसमें यह बताना होगा कि लैब में कौन-कौन से उपकरण, केमिकल और जरूरी सामान मौजूद हैं। साथ ही, अगर किसी चीज की कमी है तो उसकी लिस्ट भी साफ-साफ देनी होगी।
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जिला विज्ञान विशेषज्ञ रविंद्र कुमार का कहना है कि जिले में हजारों बच्चे साइंस की पढ़ाई कर रहे हैं। ऐसे में लैब का सही और पूरी तरह से तैयार होना बहुत जरूरी है। उनका मानना है कि सिर्फ किताबों से साइंस समझना काफी नहीं होता, बच्चों को प्रैक्टिकल करना भी जरूरी है, तभी उनकी पकड़ मजबूत बनती है।
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अब विभाग इस पूरे डाटा को देखकर यह तय करेगा कि किन स्कूलों को पहले संसाधन देने की जरूरत है। इससे आने वाले समय में बच्चों को बेहतर तरीके से साइंस सीखने का मौका मिलेगा और उनकी पढ़ाई और मजबूत होगी।
वर्जन:
सभी स्कूलों को अपनी रिपोर्ट जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय में अनिवार्य रूप से भेजनी होगी। इसके लिए एक तय प्रारूप भी जारी किया गया है ताकि सभी स्कूलों से समान और व्यवस्थित जानकारी प्राप्त हो सके। प्रयोगशालाओं का समुचित उपयोग विद्यार्थी हित में सुनिश्चित किया जा सके।-डॉ. विश्वेश्वर कौशिक, जिला शिक्षा अधिकारी, नारनौल