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Mahendragarh-Narnaul News: विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विषय पर कल होगी विज्ञान नाटक प्रतियोगिता
Sun, 31 Aug 2025 11:48 PM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
Updated Sun, 31 Aug 2025 11:48 PM IST
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नारनौल। राजकीय और निजी विद्यालयों के कक्षा 6वीं से 10वीं तक के विद्यार्थियों के लिए विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विषय पर ब्लॉक से राष्ट्रीय स्तर तक विज्ञान नाटक प्रतियोगिता आयोजित की जाएगी। दो सितंबर को सुबह 8.30 बजे से ब्लॉक स्तरीय विज्ञान नाटक प्रतियोगिता खंड के विद्यालय में होगी।
इसके बाद जिलास्तरीय विज्ञान संगोष्ठी प्रतियोगिता आयोजित की जाएगी। इसमें पांचों खंडों में खंड स्तर पर आयोजित विज्ञान नाटक प्रतियोगिता में प्रथम एवं द्वितीय स्थान प्राप्त करने वाले विजेता टीमों के विद्यार्थी भाग लेंगे।
जिला विज्ञान विशेषज्ञ रविंद्र कुमार ने बताया कि प्रतियोगिता में कक्षा 6वीं से 10वीं कक्षा के सरकारी और निजी स्कूलों के विद्यार्थी भाग ले सकेंगे। नाटक मानव जाति के कल्याण के लिए विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विषय पर प्रतियोगिता होगी। इसमें एक विद्यालय से एक ही टीम भाग ले सकती है।
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टीम में एक निर्देशक और एक पटकथा लेखक होना चाहिए। इसमें आठ से अधिक छात्र-छात्राएं कलाकार नहीं होने चाहिए। नाटक की भाषा अंग्रेजी, हिंदी या कोई अन्य मान्यता प्राप्त भारतीय भाषा हो सकती है और नाटक की अवधि 30 मिनट से अधिक नहीं होनी चाहिए। नाटक की गुणवत्ता और विश्वसनीयता बढ़ाने के लिए वेशभूषा, नृत्य, संगीत, मूकाभिनय और मॉडल भी हो सकते हैं।
नाटक से विज्ञान की तरफ रुझान पैदा करना उद्देश्य
सरकार की ओर से विद्यार्थियों को नाट्य विधा के माध्यम से अन्वेषण और प्रयोग के लिए प्रोत्साहित करने के लिए विज्ञान नाट्य प्रतियोगिता का आयोजन किया जाता है। रंगमंच या नाटक हमारे समाज की एक प्राचीन सांस्कृतिक विधा है, जिसका उपयोग मनोरंजन और सामाजिक संवाद अर्थात सामाजिक संदेश देने के माध्यम के रूप में भी किया जाता रहा है। इस माध्यम की प्रभावशीलता को समझते हुए और अधिक से अधिक विद्यार्थियों को इस रचनात्मक माध्यम में भाग लेने के लिए प्रेरित करने के लिए विज्ञान नाट्य महोत्सव के आयोजन का प्रयास किया जा रहा है। नाटक की प्रस्तुति के 50 अंक, नाटक में वैज्ञानिक विषय वस्तु के 30 अंक एवं नाटक की प्रभावशीलता के 20 अंक निर्धारित किए गए हैं।
वर्जन-
विज्ञान नाटक का आयोजन विद्यार्थियों को नाटक के माध्यम से विज्ञान के बारे में अपने विचारों को व्यक्त करने का अवसर देता है। यह जटिल वैज्ञानिक विचारों को सरल और सुलभ तरीके से प्रस्तुत करने का एक रचनात्मक माध्यम है। सभी विद्यालय इसमें बढ़चढ़ कर भाग लेंगे।-सुनील दत्त, जिला शिक्षा अधिकारी, नारनौल।
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इसके बाद जिलास्तरीय विज्ञान संगोष्ठी प्रतियोगिता आयोजित की जाएगी। इसमें पांचों खंडों में खंड स्तर पर आयोजित विज्ञान नाटक प्रतियोगिता में प्रथम एवं द्वितीय स्थान प्राप्त करने वाले विजेता टीमों के विद्यार्थी भाग लेंगे।
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जिला विज्ञान विशेषज्ञ रविंद्र कुमार ने बताया कि प्रतियोगिता में कक्षा 6वीं से 10वीं कक्षा के सरकारी और निजी स्कूलों के विद्यार्थी भाग ले सकेंगे। नाटक मानव जाति के कल्याण के लिए विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विषय पर प्रतियोगिता होगी। इसमें एक विद्यालय से एक ही टीम भाग ले सकती है।
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टीम में एक निर्देशक और एक पटकथा लेखक होना चाहिए। इसमें आठ से अधिक छात्र-छात्राएं कलाकार नहीं होने चाहिए। नाटक की भाषा अंग्रेजी, हिंदी या कोई अन्य मान्यता प्राप्त भारतीय भाषा हो सकती है और नाटक की अवधि 30 मिनट से अधिक नहीं होनी चाहिए। नाटक की गुणवत्ता और विश्वसनीयता बढ़ाने के लिए वेशभूषा, नृत्य, संगीत, मूकाभिनय और मॉडल भी हो सकते हैं।
नाटक से विज्ञान की तरफ रुझान पैदा करना उद्देश्य
सरकार की ओर से विद्यार्थियों को नाट्य विधा के माध्यम से अन्वेषण और प्रयोग के लिए प्रोत्साहित करने के लिए विज्ञान नाट्य प्रतियोगिता का आयोजन किया जाता है। रंगमंच या नाटक हमारे समाज की एक प्राचीन सांस्कृतिक विधा है, जिसका उपयोग मनोरंजन और सामाजिक संवाद अर्थात सामाजिक संदेश देने के माध्यम के रूप में भी किया जाता रहा है। इस माध्यम की प्रभावशीलता को समझते हुए और अधिक से अधिक विद्यार्थियों को इस रचनात्मक माध्यम में भाग लेने के लिए प्रेरित करने के लिए विज्ञान नाट्य महोत्सव के आयोजन का प्रयास किया जा रहा है। नाटक की प्रस्तुति के 50 अंक, नाटक में वैज्ञानिक विषय वस्तु के 30 अंक एवं नाटक की प्रभावशीलता के 20 अंक निर्धारित किए गए हैं।
वर्जन-
विज्ञान नाटक का आयोजन विद्यार्थियों को नाटक के माध्यम से विज्ञान के बारे में अपने विचारों को व्यक्त करने का अवसर देता है। यह जटिल वैज्ञानिक विचारों को सरल और सुलभ तरीके से प्रस्तुत करने का एक रचनात्मक माध्यम है। सभी विद्यालय इसमें बढ़चढ़ कर भाग लेंगे।-सुनील दत्त, जिला शिक्षा अधिकारी, नारनौल।