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साझा प्रयासों से ही पर्यावरण को बचाया जा सकेगा - प्रो. कुहाड़
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हरियाणा केंद्रीय विश्वविद्यालय में शनिवार को अंतरराष्ट्रीय भौगोलिक संघ-भारत अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का शुभारंभ हुआ। 21 अक्टूबर चलने वाला यह तीन दिवसीय सम्मेलन जीरो की ओर अग्रसर: अर्थव्यवस्था, पर्यावरण और समाज का सतत विकास विषय पर केंद्रित है। उद्घाटन सत्र के मुख्य अतिथि अंतरराष्ट्रीय भौगोलिक संघ (आईजीयू), जापान के अध्यक्ष प्रो. युकिओ हिमियामा ने कहा कि सम्मेलन का विषय ही स्वयं ही इसमें होने वाली चर्चा का परिचायक है। तीन दिनों तक विशेषज्ञ पर्यावरण के समक्ष उपस्थित चुनौतियों पर चर्चा करेंगे । ठोस समाधानों की दिशा में कदम बढ़ाएंगे।
कुलपति प्रो. आरसी कुहाड़ ने अपने संदेश में कहा यह सम्मेलन उन कार्यकलापों के विकल्प खोजने के लिए एक मंच है। जो पर्यावरण को प्रदूषित करते हैं, ओर सतत विकास में बाधा उत्पन्न करते हैं। सतत विकास के क्षेत्र में विश्वस्तर पर चल रहे अनुसंधानों, नई तकनीकों और अभियानों को साझा करने और उसमें तेजी लाने का अवसर प्राप्त होगा। साझा प्रयासों से ही पर्यावरण को बचाया जा सकता है।
आईजीयू भारत के महासचिव और कोषाध्यक्ष प्रो. आरबी सिंह ने कहा कि पर्यावरण के समक्ष चुनौतियों के निदान में भूगोल और भूविज्ञान का योगदान महत्त्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि हम सब मिलकर पर्यावरण संरक्षण की दिशा में नीतिगत आधार पर योजनाबद्ध ढंग से काम करें। उन्होंने बताया कि किस प्रकार से भूगोल की सहायता से पर्यावरणीय समस्याओं का समाधान किया जा सकता है। विशेष अतिथि के रूप में शामिल हुए प्रो. बृज महाजन, यूनिवर्सिटी ऑफ कवाजुलू- नटाल, डर्बन, दक्षिण अफ्रीका ने विकास और भ्रष्टाचार विषय पर प्रकाश डाला और बताया कि किस तरह विश्व भर में भ्रष्टाचार पर्यावरण, विकास को प्रभावित कर रहा है।
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सम्मेलन के उद्घाटन सत्र में विश्वविद्यालय के प्रॉक्टर प्रोफेसर राजेश मलिक ने पर्यावरण के समक्ष चुनौतियों और उसके संबंध में विभिन्न स्तरों पर जारी प्रयासों पर भी प्रकाश डाला। बताया कि किस प्रकार हम छोटे-छोटे कदम उठाकर पर्यावरण को सुरक्षित करने के लिए कटिबद्ध हैं। उद्घाटन सत्र में विश्वविद्यालय के कुलसचिव रामदत्त, प्रो. नवल किशोर, प्रो. अमर सिंह, मनोरंजन त्रिपाठी, पृथ्वी पर्यावरण एवं अंतरिक्ष पीठ के अधिष्ठाता डॉ. सुशील दलाल, सम्मेलन के संयोजक डॉ खेराज व भूगोल विभाग के शिक्षक डॉ. नरेश कुमार, डॉ. संदीप राणा सहित अन्य प्रतिभागी उपस्थित रहे। सम्मेलन की सचिव किरण ने कार्यक्रम के अंत में धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया।
विश्वविद्यालय के प्रो. मूलचंद सभागार में आयोजित इस 12 देशों के प्रतिनिधि भी इस सम्मेलन में भाग ले रहे हैं।
कार्यक्रम के समन्वयक डॉ. खेराज ने बताया कि इस अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन सतत विकास को सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
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कुलपति प्रो. आरसी कुहाड़ ने अपने संदेश में कहा यह सम्मेलन उन कार्यकलापों के विकल्प खोजने के लिए एक मंच है। जो पर्यावरण को प्रदूषित करते हैं, ओर सतत विकास में बाधा उत्पन्न करते हैं। सतत विकास के क्षेत्र में विश्वस्तर पर चल रहे अनुसंधानों, नई तकनीकों और अभियानों को साझा करने और उसमें तेजी लाने का अवसर प्राप्त होगा। साझा प्रयासों से ही पर्यावरण को बचाया जा सकता है।
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आईजीयू भारत के महासचिव और कोषाध्यक्ष प्रो. आरबी सिंह ने कहा कि पर्यावरण के समक्ष चुनौतियों के निदान में भूगोल और भूविज्ञान का योगदान महत्त्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि हम सब मिलकर पर्यावरण संरक्षण की दिशा में नीतिगत आधार पर योजनाबद्ध ढंग से काम करें। उन्होंने बताया कि किस प्रकार से भूगोल की सहायता से पर्यावरणीय समस्याओं का समाधान किया जा सकता है। विशेष अतिथि के रूप में शामिल हुए प्रो. बृज महाजन, यूनिवर्सिटी ऑफ कवाजुलू- नटाल, डर्बन, दक्षिण अफ्रीका ने विकास और भ्रष्टाचार विषय पर प्रकाश डाला और बताया कि किस तरह विश्व भर में भ्रष्टाचार पर्यावरण, विकास को प्रभावित कर रहा है।
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सम्मेलन के उद्घाटन सत्र में विश्वविद्यालय के प्रॉक्टर प्रोफेसर राजेश मलिक ने पर्यावरण के समक्ष चुनौतियों और उसके संबंध में विभिन्न स्तरों पर जारी प्रयासों पर भी प्रकाश डाला। बताया कि किस प्रकार हम छोटे-छोटे कदम उठाकर पर्यावरण को सुरक्षित करने के लिए कटिबद्ध हैं। उद्घाटन सत्र में विश्वविद्यालय के कुलसचिव रामदत्त, प्रो. नवल किशोर, प्रो. अमर सिंह, मनोरंजन त्रिपाठी, पृथ्वी पर्यावरण एवं अंतरिक्ष पीठ के अधिष्ठाता डॉ. सुशील दलाल, सम्मेलन के संयोजक डॉ खेराज व भूगोल विभाग के शिक्षक डॉ. नरेश कुमार, डॉ. संदीप राणा सहित अन्य प्रतिभागी उपस्थित रहे। सम्मेलन की सचिव किरण ने कार्यक्रम के अंत में धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया।
विश्वविद्यालय के प्रो. मूलचंद सभागार में आयोजित इस 12 देशों के प्रतिनिधि भी इस सम्मेलन में भाग ले रहे हैं।
कार्यक्रम के समन्वयक डॉ. खेराज ने बताया कि इस अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन सतत विकास को सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।