{"_id":"68fe5f7c98d276c95d00bd2f","slug":"remembering-gods-name-is-the-greatest-virtue-acharya-narnol-news-c-196-1-nnl1003-131478-2025-10-26","type":"story","status":"publish","title_hn":"भगवान का नाम सुमिरन सबसे बड़ा पुण्य : आचार्य","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
भगवान का नाम सुमिरन सबसे बड़ा पुण्य : आचार्य
Sun, 26 Oct 2025 11:20 PM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
Updated Sun, 26 Oct 2025 11:20 PM IST
विज्ञापन
फोटो नंबर-04कथा के दौरान भागवत आरती करते यजमान। स्रोत-आयोजक
नारनौल। भूषण कलां में चल रही संगीतमय श्रीमद्भागवत कथा के चौथे दिन रविवार को आचार्य बजरंग शास्त्री ने सृष्टि निर्माण, मनु-शतरूपा की उत्पत्ति और उनके वंश की कथा सुनाई। उन्होंने अजामिल की कथा के माध्यम से बताया कि भगवान का नाम सुमिरन सबसे बड़ा पुण्य है।
उन्होंने प्रियव्रत, नाभि, ऋषभदेव, भरत चरित्र के माध्यम से धर्म, कर्म और मोक्ष का महत्व समझाया। गज-ग्राह कथा में अहंकार त्याग और भगवान पर पूर्ण विश्वास का संदेश दिया गया। उन्होंने कहा कि सभी मानव मनु की संतान हैं।
प्रजापति दक्ष, वृत्तासुर, नरसिंह अवतार और राम-कृष्ण जन्म की झांकी का सुंदर वर्णन किया। कृष्ण जन्म पर भक्तों ने भजनों पर नृत्य कर आनंद लिया। कथा प्रतिदिन दोपहर 12:15 से शाम 4:15 बजे तक होती है।
विज्ञापन
विज्ञापन
उन्होंने प्रियव्रत, नाभि, ऋषभदेव, भरत चरित्र के माध्यम से धर्म, कर्म और मोक्ष का महत्व समझाया। गज-ग्राह कथा में अहंकार त्याग और भगवान पर पूर्ण विश्वास का संदेश दिया गया। उन्होंने कहा कि सभी मानव मनु की संतान हैं।
विज्ञापन
प्रजापति दक्ष, वृत्तासुर, नरसिंह अवतार और राम-कृष्ण जन्म की झांकी का सुंदर वर्णन किया। कृष्ण जन्म पर भक्तों ने भजनों पर नृत्य कर आनंद लिया। कथा प्रतिदिन दोपहर 12:15 से शाम 4:15 बजे तक होती है।
विज्ञापन