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भगवान का नाम सुमिरन सबसे बड़ा पुण्य : आचार्य

Sun, 26 Oct 2025 11:20 PM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल Updated Sun, 26 Oct 2025 11:20 PM IST
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Remembering God's name is the greatest virtue: Acharya
फोटो नंबर-04कथा के दौरान भागवत आरती करते यजमान। स्रोत-आयोजक
नारनौल। भूषण कलां में चल रही संगीतमय श्रीमद्भागवत कथा के चौथे दिन रविवार को आचार्य बजरंग शास्त्री ने सृष्टि निर्माण, मनु-शतरूपा की उत्पत्ति और उनके वंश की कथा सुनाई। उन्होंने अजामिल की कथा के माध्यम से बताया कि भगवान का नाम सुमिरन सबसे बड़ा पुण्य है।
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उन्होंने प्रियव्रत, नाभि, ऋषभदेव, भरत चरित्र के माध्यम से धर्म, कर्म और मोक्ष का महत्व समझाया। गज-ग्राह कथा में अहंकार त्याग और भगवान पर पूर्ण विश्वास का संदेश दिया गया। उन्होंने कहा कि सभी मानव मनु की संतान हैं।
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प्रजापति दक्ष, वृत्तासुर, नरसिंह अवतार और राम-कृष्ण जन्म की झांकी का सुंदर वर्णन किया। कृष्ण जन्म पर भक्तों ने भजनों पर नृत्य कर आनंद लिया। कथा प्रतिदिन दोपहर 12:15 से शाम 4:15 बजे तक होती है।
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