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मरीजों के पंजीकरण के लिए सिर्फ दो विंडो, घंटे भर में आता है नंबर

Sat, 04 Jan 2020 11:42 PM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Sat, 04 Jan 2020 11:42 PM IST
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उप नागरिक अस्पताल में ऑनलाइन ओपीडी पर्ची के लिए लगी भीड़। - फोटो : Narnol
ऑनलाइन पंजीकरण की सुविधा मरीजों के लिए मुसीबत बन गई है। मरीजों को पंजीकरण कराने के लिए एक-एक घंटा लाइन में खड़ा होना पड़ रहा है। दर्द से कराह रहे मरीजों के लिए एक घंटा लाइन में खड़ा होना मुश्किल होता है। रोजाना करीब 800 मरीजों की ओपीडी होती है। जिसमें पंजीकरण के लिए केवल दो काउंटर हैं।
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प्रदेश सरकार के निर्देश पर मरीजों को सुविधा देने के लिए ऑनलाइन पंजीकरण सिस्टम शुरू किया गया था। दो जनवरी से इसे लागू कर दिया गया है। यह व्यवस्था फिलहाल मरीजों को रास नहीं आ रही। मरीजों को अपनी पर्ची बनवाने के लिए एक एक घंटा लाइन में खड़ा होना पड़ रहा है। यहां केवल दो ही काउंटर बनाए गए हैं। इन काउंटर पर पंजीकरण का काम करने वाले कर्मचारियों की कंप्यूटर पर अभी स्पीड नहीं बनी है। इस कारण उनको एक पर्ची बनाने में दो से तीन मिनट का समय लग जाता है। हर काउंटर पर छह घंटे में 400 मरीजों का पंजीकरण करना पड़ रहा है। एक मरीज के पंजीकरण के लिए एक मिनट से भी कम समय मिलता है। सुबह के समय में भीड़ अधिक होती है। ऐसे मौके पर लाइन काफी लंबी रहती है। कई मरीज अपने दर्द से कराहते हुए लाइन में खड़ा रहने को मजबूर होते हैं। उप नागरिक अस्पताल में ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन का ट्रायल शुरू हुुआ था। बुधवार को 44 मरीजों का ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन कर उनका यूनिक आईडी बनाया गया था। दो जनवरी से इसे पूरी तरह से लागू कर दिया गया।
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ऐसे होगा काम
मरीजों के इलाज का रिकॉर्ड भी ऑनलाइन रखा जाएगा। चिकित्सकों को मरीजों को दी जाने वाली सभी दवाइयां उसके खातें में ऑनलाइन करनी होगी। मरीजों को 12 अंकों की एक यूनिक आईडी दी जाएगी। इस यूनिक आईडी से वह अपने रिकॉर्ड 20 वर्ष बाद भी चेक कर सकेगा। रजिस्ट्रेशन पर्ची पर रूम नंबर और चिकित्सक का नाम भी लिखा आएगा। उसी कमरे में मरीज को दिखाना होगा। अगर मरीज को लेब में जांच करवानी है तो चिकित्सक अपने कंप्यूटर से ही लैब में जांच के लिए भेज देगा जहां पर वह जांच करवा लेगा। साथ जांच के बाद लैब अटेंडेंट चिकित्सक को ऑनलाइन जांच भेज देगा। उसके बाद चिकित्सक उसका उपचार करेगा। इसके लिए अस्पताल को 26 नए कंप्यूटर मिले हैं।
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डिजिटल एक्सरे भी मिलेंगे
मरीजों को अब एक्सरे लेकर नहीं घूमना पड़ेगा। उनका डिजिटल एक्सरे चिकित्सक के पास पहुंचेगा। चिकित्सक की रिपोर्ट के अनुसार मरीज अपना एक्सरे कराएगा। एक्सरे रूम के कर्मी मरीज के यूनिक कोड के नंबर के हिसाब से उसका एक्सरे संबंधित चिकित्सक को भेज देंगे। चिकित्सक कंप्यूटर पर ही एक्सरे देख लेंगे। ऐसा करने से समय की बचत होगी। मरीज के पंजीकरण के समय दिए गए यूनिक नंबर के हिसाब से चिकित्सक उसे दी गई दवा को अपने कंप्यूटर में दर्ज करेगा। जब मरीज दोबारा आएगा तो चिकित्सक यूनिक नंबर पर क्लिक करेंगे तो उसकी पूरी जानकारी कंप्यूटर स्क्रीन पर आ जाएगी।
पोस्टमार्टम का रिकार्ड भी ऑनलाइन भेजेंगे
उप नागरिक अस्पताल में पोस्टमार्टम के बाद चिकित्सकों को उसकी पूरी डिटेल का प्रोफार्मा तैयार करना पड़ता है। ऑनलाइन सिस्टम के बाद पूरी रिपोर्ट कंप्यूटर पर ही लिखी जाएगी। इस रिपोर्ट को मैनुअल की बजाए ईमेल के जरिए पुलिस को भेज दिया जाएगा।
अभी नया कार्य शुरू हुआ है जिसको रूटीन में आने में थोड़ा समय लग जाएगा है। पंजीकरण के लिए तीन विंडो शुरू की गई हैं। इससे ज्यादा की आवश्यकता नहीं हैं। पहले भी तीन विंडो चल रही थीं।
- डॉ. मोना यादव, एसएमओ, महेंद्रगढ़।
क्या बोले मरीज
ऑनलाइन सिस्टम होने से काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। मेरा नंबर 40 मिनट में आया। मरीजों की संख्या को देखते हुए काउंटर बढाए जाने चाहिएं। ऐसा नहीं होगा तो मरीजों को परेशानी होती रहेगी।

विकास सैनी, मरीज
पहले तो आते ही पर्ची बन जाती थी।अब लाइन में खड़ा होकर काफी देर तक इंतजार करना पड़ रहा है। ऑनलाइन सिस्टम में कर्मियों को अधिक समय लग रहा है। यहां काउंटर की संख्या अधिक होनी चाहिए।
ओमप्रकाश, मरीज
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