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Mahendragarh-Narnaul News: पुष्पा की बगिया बच्चों को सिखा रही हरियाली की जिम्मेदारी

Mon, 19 Jan 2026 12:20 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Mon, 19 Jan 2026 12:20 AM IST
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Pushpa's garden is teaching children about the responsibility of maintaining greenery.
फोटो संख्या:61- कृष्ण कॉलोनी में पौधों में पानी देती पुष्पा यादव--संवाद
महेंद्रगढ़। शहर निवासी पुष्पा यादव ने कभी घर की सुंदरता बढ़ाने और खाली जगह को सजाने के लिए एक-दो पौधे लगाए थे जो आज 150 पौधों की सजी-धजी बगिया में बन चुकी है। उनके घर में खास मौकों पर बच्चों को उपहार में खिलौनों की जगह एक पौधा दिया जाता है जिसकी देखभाल की जिम्मेदारी बच्चे खुद निभाते हैं।
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करीब 17 वर्ष पहले शुरू हुआ यह प्रयास आज पुष्पा यादव का शौक नहीं, बल्कि जुनून बन चुका है। उनके आंगन और छत पर सजावटी, फूलदार और औषधीय पौधे हरियाली की चादर बिछाए हुए हैं। इस काम में उनके पति और पोते भी पूरे उत्साह से हाथ बंटाते हैं।
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सुबह और शाम पौधों की देखभाल करना उनकी दिनचर्या का अहम हिस्सा है। पौधों को पानी देना, गुड़ाई करना, सूखे पत्ते हटाना और धूप दिखाना उनके लिए किसी पूजा से कम नहीं।
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पुष्पा का कहना है कि बगिया में समय बिताने से मानसिक शांति मिलती है और तनाव अपने आप दूर हो जाता है। साथ ही यह बच्चों को प्रकृति और पर्यावरण के प्रति जागरूक करने का एक सुंदर माध्यम भी है। यह बगिया न सिर्फ घर की शोभा बढ़ा रही है बल्कि परिवार को सुकून, स्वास्थ्य और पर्यावरण से जुड़ने का अवसर भी दे रही है।
बगिया में सजी हरियाली की विविधता
पुष्पा यादव की बगिया में तुलसी, अदरक, हल्दी, इलायची, गेंदा, गुलाब, मोगरा, बोगनवीलिया, डिफनबेकिया, मोरपंखी, कलेंचो, जेड प्लांट, सिंगोनियम, अजवाइन, पाम, लक्की बैंबू, शतावर सहित कई सजावटी और औषधीय पौधे लगे हैं। इनमें से कई पौधों का उपयोग वे रोजमर्रा की जिंदगी में चाय, पानी और भोजन में भी करती हैं। औषधीय गुणों के साथ-साथ इन पौधों की लंबी, पतली और हरी पत्तियां घर की सजावट में चार चांद लगाती हैं।

देशी खाद का करती हैं प्रयोग
पुष्पा यादव रासायनिक खाद से दूरी बनाए रखती हैं। वे गोशाला से लाई गई गोबर की खाद का उपयोग करती हैं जिसे महीने में एक बार पौधों की उम्र के अनुसार गुड़ाई कर डाला जाता है। इसके अलावा घर के फलों और सब्जियों के छिलकों से तैयार जैविक खाद को सप्ताह में एक बार पौधों में डालती हैं।
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