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Mahendragarh-Narnaul News: बाघेश्वर धाम पर मेले की तैयारी शुरू, पहले दिन 200 कांवड़ियों ने चढ़ाई कांवड़

Tue, 11 Jul 2023 12:57 AM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल Updated Tue, 11 Jul 2023 12:57 AM IST
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Preparation for the fair started at Bageshwar Dham, on the first day 200 kanwariyas climbed the kanwar
गांव बाघोत में ​शिवलिंग पर जला​भिषेक करते श्रद्धालु।
कनीना। श्रावण के पहले सोमवार को उपमंडल के गांव बाघोत स्थित बाघेश्वर धाम में हजारों की संख्या में श्रद्धालुओं ने शिवलिंग पर जलाभिषेक किया। बाघोत में 15 जुलाई को लगने वाले मेले को लेकर मंदिर कमेटी ने तैयारी शुरू कर दी है। इस बार यहां एक लाख से अधिक कांवड़ चढ़ाए जाने की संभावना है। सुरक्षा की दृष्टि से पुलिस का कड़ा पहरा रहेगा।
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मंदिर के चारो ओर से सीसीटीवी कैमरे भी लगे हुए ताकि चैन स्नेचिंग तथा अन्य प्रकार की घटनाओं से बचा जा सके। बाघेश्वर धाम के महंत रोशन पुरी महाराज ने बताया कि मंदिर में आने वाले सभी श्रद्धालुओं के लिए अलग-अलग लाइन बनाई हुई है जिसके माध्यम से शिवलिंग पर जल चढ़ाया जा सकता है। कांवड़ियों के विश्राम करने के लिए और उनके सेवा करने के लिए अलग स्थान बनाया हुआ है पूरे श्रावण महीने में लंगर लगाया जाता है।
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आज से कांवड़ चढ़ना शुरू
बाघेश्वर धाम पर सोमवार से कांवड़ चढ़ानी शुरू कर दी गई है। बाघेश्वर धाम के महंत रोशनपुरी महाराज ने बताया कि अष्टमी से शिवरात्रि तक कांवड़ चढ़ाई जाएंगी। उन्होंने बताया कि पहले दिन लगभग 200 कांवड़ शिवभक्तों द्वारा चढ़ाई जा चुकी है। उन्होंने बताया हर बार हजारों की संख्या में कांवड़ चढ़ाई जाती है। कावंड़ चढ़ाने की 200 साल पूर्व की परंपरा है। उन्होंने बताया कि स्वयं शिवलिंग है जो कई वर्षों पहले निकला था। बाघेवश्वर धाम की मान्यता चरखी दादरी, रेवाड़ी, महेंद्रगढ़, झज्जर, रोहतक आदि जिलों में हैं। उन्होंने बताया कि यहां पर तीन चार दिन मेला लगता है जिसमें आठ से दस लाख लोग दर्शन करने के लिए आते हैं।
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1680 साल पुराना है बाघोत मंदिर
बाघोत का मंदिर करीब 1680 वर्ष पुराना है। इस शिवालय के पास खड़े कदंब के पेड़, तालाब एवं स्वयंभू शिवलिंग ऋषि मुनियों की तप स्थली होने की याद दिलाते हैं। भगवान श्रीराम के पूर्वजों ने भी यहां तप किया था। वर्ष में दो बार मेला लगता है। तत्कालीन समय में राजा दलीप को शिव ने बाघ के रूप में दर्शन दिए थे जिसके चलते गांव का मंदिर बाघेश्वरी धाम कहलाया। शिवालय का निर्माण कणाणा के राजा कल्याण सिंह रैबारी ने करवाया था। 15 जुलाई शिवरात्रि के मेले की तैयारियां चल रही हैं। मंदिर को सजाया जा रहा है हीं सुरक्षा के प्रबंध किए जा रहे हैं।
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