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Mahendragarh-Narnaul News: सीबीएसई की दो सत्र परीक्षा प्रणाली लागू करने से हो सकते हैं संभावित परिणाम
Mon, 30 Jun 2025 12:00 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
Updated Mon, 30 Jun 2025 12:00 AM IST
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फोटो नंबर-16रविंद्र सैनी। प्राध्यापक मॉडल संस्कृति स्कूल
- फोटो : Chamber
नारनौल। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड ने अगले शैक्षणिक सत्र से दो सत्र परीक्षा प्रणाली लागू करने का निर्णय लिया है। इस पर शिक्षाविदों का मनाना है कि इससे छात्रों पर वार्षिक परीक्षा की तुलना में दो सत्र में परीक्षा से छात्रों पर कम दबाव पड़ेगा।
पूरे वर्ष की पढ़ाई को दो भागों में बांटने से विद्यार्थी बेहतर तैयारी कर पाएंगे। उनका समय-समय पर मूल्यांकन किया जा सकता है। यह प्रणाली सतत और व्यापक मूल्यांकन को बढ़ावा देती है। इससे विद्यार्थियों की पढ़ाई में निरंतरता बनी रहेगी और उनकी समझ का नियमित परीक्षण होगा। दो टर्म वाली प्रणाली में यदि किसी कारणवश एक सत्र की परीक्षा न हो पाए तो दूसरे सत्र का मूल्यांकन आधार बन सकता है। छात्र केवल रटने की बजाय अवधारणाओं को समझने पर जोर देंगे, क्योंकि परीक्षाएं कम अवधि में होंगी और पाठ्यक्रम सीमित होगा।
बाक्स-
सीबीएसई की यह पहल छात्रों की शिक्षा को अधिक सुव्यवस्थित और लचीली बनाने का प्रयास है। हालांकि इसकी सफलता के लिए शिक्षकों, छात्रों और अभिभावकों सभी को मिलकर प्रयास करने होंगे। यदि इसे सही दिशा में लागू किया जाए, तो यह प्रणाली भारतीय शिक्षा प्रणाली में एक सकारात्मक परिवर्तन ला सकती है।- रविन्द्र सैनी, प्राध्यापक मॉडल संस्कृति स्कूल।
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सीबीएसई ने दसवीं की परीक्षा वर्ष में दो बार लेने का निर्णय लिया है, जिससे छात्रों को अपनी तैयारी और प्रदर्शन में सुधार करने का अवसर मिलेगा। इससे छात्रों को अपनी तैयारी के लिए अधिक समय मिलेगा। छात्रों को अपने प्रदर्शन में सुधार करने का अवसर मिलेगा। परीक्षा के दबाव को कम करने में मदद मिल सकती है।-डॉ. जितेंद्र भारद्वाज, प्राध्यापक
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केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड का यह फैसला रटने की आदत से इतर व्यावहारिक एवं अनुप्रयोग आधारित है। सतत लर्निंग की प्रक्रिया पर ध्यान केंद्रित करने में प्रभावी रहेगा। यह एक प्रगतिशील कदम है और इसमें परीक्षा से संबंधित चिंता को कम किया जा सकेगा। यह फैसला नई शिक्षा नीति के उद्देश्यों और लक्ष्यों के प्रतिफल का ढांचा है।- डॉ. संजय शर्मा, प्रवक्ता राजनीति विज्ञान
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सीबीएसई का उद्देश्य है कि विद्यार्थियों को लचीलापन और स्कोर में सुधार करने का अवसर देने का है। दूसरा चरण पूरी तरह से ऐच्छिक है। अंक सुधार अथवा अधिक मौके देने की ही अवधारणा पर आधारित है। इसे आशावादी और सकारात्मक नजरिये से देखने की जरूरत है।-सीमा यादव, प्राचार्य
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फैसला नई शिक्षा नीति के लचीले और छात्र-केंद्रित मूल्यांकन ढांचे के दृष्टिकोण के साथ अच्छी तरह से मेल खाता है। शैक्षणिक योजना और बुनियादी ढांचे की तैयारी में विस्तृत समायोजन एनइपी 2020 के सफल कार्यान्वयन में मदद करेगा ही इसके अलावा परीक्षा की व्यवहार्यता को भी सार्थक बनाता है।-डॉ. मनोज यादव, प्रवक्ता इतिहास
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लगता है कि दो बार परीक्षाओं का निर्णय व्यावहारिक नहीं है। परीक्षा को लेकर विद्यार्थियों का माइंड सेट अलग स्तर का होता है। उसके साथ प्रयोग करना खतरनाक भी हो सकता है। एक प्रयास प्रतिभाशाली विद्यार्थियों के आत्मविश्वास को कम कर सकता है, इसलिए फैसले पर पुनर्विचार किया जाना चाहिए।- भीमसेन शर्मा अध्यक्ष प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन
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पूरे वर्ष की पढ़ाई को दो भागों में बांटने से विद्यार्थी बेहतर तैयारी कर पाएंगे। उनका समय-समय पर मूल्यांकन किया जा सकता है। यह प्रणाली सतत और व्यापक मूल्यांकन को बढ़ावा देती है। इससे विद्यार्थियों की पढ़ाई में निरंतरता बनी रहेगी और उनकी समझ का नियमित परीक्षण होगा। दो टर्म वाली प्रणाली में यदि किसी कारणवश एक सत्र की परीक्षा न हो पाए तो दूसरे सत्र का मूल्यांकन आधार बन सकता है। छात्र केवल रटने की बजाय अवधारणाओं को समझने पर जोर देंगे, क्योंकि परीक्षाएं कम अवधि में होंगी और पाठ्यक्रम सीमित होगा।
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सीबीएसई की यह पहल छात्रों की शिक्षा को अधिक सुव्यवस्थित और लचीली बनाने का प्रयास है। हालांकि इसकी सफलता के लिए शिक्षकों, छात्रों और अभिभावकों सभी को मिलकर प्रयास करने होंगे। यदि इसे सही दिशा में लागू किया जाए, तो यह प्रणाली भारतीय शिक्षा प्रणाली में एक सकारात्मक परिवर्तन ला सकती है।- रविन्द्र सैनी, प्राध्यापक मॉडल संस्कृति स्कूल।
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सीबीएसई ने दसवीं की परीक्षा वर्ष में दो बार लेने का निर्णय लिया है, जिससे छात्रों को अपनी तैयारी और प्रदर्शन में सुधार करने का अवसर मिलेगा। इससे छात्रों को अपनी तैयारी के लिए अधिक समय मिलेगा। छात्रों को अपने प्रदर्शन में सुधार करने का अवसर मिलेगा। परीक्षा के दबाव को कम करने में मदद मिल सकती है।-डॉ. जितेंद्र भारद्वाज, प्राध्यापक
केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड का यह फैसला रटने की आदत से इतर व्यावहारिक एवं अनुप्रयोग आधारित है। सतत लर्निंग की प्रक्रिया पर ध्यान केंद्रित करने में प्रभावी रहेगा। यह एक प्रगतिशील कदम है और इसमें परीक्षा से संबंधित चिंता को कम किया जा सकेगा। यह फैसला नई शिक्षा नीति के उद्देश्यों और लक्ष्यों के प्रतिफल का ढांचा है।- डॉ. संजय शर्मा, प्रवक्ता राजनीति विज्ञान
सीबीएसई का उद्देश्य है कि विद्यार्थियों को लचीलापन और स्कोर में सुधार करने का अवसर देने का है। दूसरा चरण पूरी तरह से ऐच्छिक है। अंक सुधार अथवा अधिक मौके देने की ही अवधारणा पर आधारित है। इसे आशावादी और सकारात्मक नजरिये से देखने की जरूरत है।-सीमा यादव, प्राचार्य
फैसला नई शिक्षा नीति के लचीले और छात्र-केंद्रित मूल्यांकन ढांचे के दृष्टिकोण के साथ अच्छी तरह से मेल खाता है। शैक्षणिक योजना और बुनियादी ढांचे की तैयारी में विस्तृत समायोजन एनइपी 2020 के सफल कार्यान्वयन में मदद करेगा ही इसके अलावा परीक्षा की व्यवहार्यता को भी सार्थक बनाता है।-डॉ. मनोज यादव, प्रवक्ता इतिहास
लगता है कि दो बार परीक्षाओं का निर्णय व्यावहारिक नहीं है। परीक्षा को लेकर विद्यार्थियों का माइंड सेट अलग स्तर का होता है। उसके साथ प्रयोग करना खतरनाक भी हो सकता है। एक प्रयास प्रतिभाशाली विद्यार्थियों के आत्मविश्वास को कम कर सकता है, इसलिए फैसले पर पुनर्विचार किया जाना चाहिए।- भीमसेन शर्मा अध्यक्ष प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन